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दस हजार की क्षतिपूर्ति पीड़ित को दिए जाने के आदेश
Updated Mon, 10 Dec 2018 11:28 PM IST
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अधिशासी अभियंता को क्षतिपूर्ति देने का आदेश
शाहजहांपुर। स्थायी लोक अदालत ने विद्युत वितरण खंड प्रथम बाईबाग के अधिशासी अभियंता की ओर से जारी 24,454 रुपये के विद्युत बिल को निरस्त कर, पीड़ित को क्षतिपूर्ति के तौर पर दस हजार रुपये निर्णय की तिथि से दो माह के अंदर दिलाए जाने के आदेश दिए हैं। साथ ही हिदायत दी है कि दोबारा कोई बिल न भेजा जाए।
पुवायां के गांव सैदापुर निवासी सुनील कुमार ने बताया कि वह अपने पिता शिव सिंह के साथ रहता है। उसके पिता ने सरकार की योजना के तहत अपने नाम मकान के लिए विद्युत कनेक्शन लिया। वह पिता के साथ ही रहता है, इसलिए उसे अलग से कनेक्शन लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। उसके नाम से विद्युत विभाग की ओर से 30 सिंतबर 2015 से 30 नवंबर 2015 तक विद्युत उपभोग का 24,454 रुपये का बिल 29 दिसंबर 2015 को जारी कर दिया गया। सुनील ने बताया कि उसके नाम भेजे गए बिल में पिता के नाम की जगह दादा का नाम लिखा था। वह बिल लेकर इंजीनियर के पास गया लेकिन इंजीनियर ने उसकी एक नहीं सुनी और धमकी दी कि बिल नहीं जमा किया तो कार्रवाई की जाएगी। 27 जनवरी 2016 को विभाग ने बिल को निरस्त करने से इंकार कर दिया। इस पर उसने स्थायी लोक अदालत में गुहार लगाई। जहां लोक अदालत के अध्यक्ष कमल चौधरी, सदस्य मनोज कृष्ण मिश्रा, तसनीम कौसर ने पत्रावली का अवलोकन कर फैसला सुनाया।
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शाहजहांपुर। स्थायी लोक अदालत ने विद्युत वितरण खंड प्रथम बाईबाग के अधिशासी अभियंता की ओर से जारी 24,454 रुपये के विद्युत बिल को निरस्त कर, पीड़ित को क्षतिपूर्ति के तौर पर दस हजार रुपये निर्णय की तिथि से दो माह के अंदर दिलाए जाने के आदेश दिए हैं। साथ ही हिदायत दी है कि दोबारा कोई बिल न भेजा जाए।
पुवायां के गांव सैदापुर निवासी सुनील कुमार ने बताया कि वह अपने पिता शिव सिंह के साथ रहता है। उसके पिता ने सरकार की योजना के तहत अपने नाम मकान के लिए विद्युत कनेक्शन लिया। वह पिता के साथ ही रहता है, इसलिए उसे अलग से कनेक्शन लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। उसके नाम से विद्युत विभाग की ओर से 30 सिंतबर 2015 से 30 नवंबर 2015 तक विद्युत उपभोग का 24,454 रुपये का बिल 29 दिसंबर 2015 को जारी कर दिया गया। सुनील ने बताया कि उसके नाम भेजे गए बिल में पिता के नाम की जगह दादा का नाम लिखा था। वह बिल लेकर इंजीनियर के पास गया लेकिन इंजीनियर ने उसकी एक नहीं सुनी और धमकी दी कि बिल नहीं जमा किया तो कार्रवाई की जाएगी। 27 जनवरी 2016 को विभाग ने बिल को निरस्त करने से इंकार कर दिया। इस पर उसने स्थायी लोक अदालत में गुहार लगाई। जहां लोक अदालत के अध्यक्ष कमल चौधरी, सदस्य मनोज कृष्ण मिश्रा, तसनीम कौसर ने पत्रावली का अवलोकन कर फैसला सुनाया।
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