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बाढ़ से घिरे गंगा-रामगंगा के तटवर्ती गांव, भूमि कटान का बढ़ा खतरा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,शाहजहांपुर
Updated Fri, 03 Aug 2018 12:08 AM IST
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पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक हो रही वर्षा और बैराजों से पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी रहने से गंगा और रामगंगा के तटवर्ती गांवों पर बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ रहा है। रामगंगा में लगातार तीसरे दिन जल स्तर में 58 सेमी बढ़ोतरी हुई। भैंसार बांध पर गंगा के जल स्तर में पांच सेमी की कमी के बावजूद नदी में असामान्य बहाव हिलोरें ले रहा है। बाढ़ से घिरे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने विभिन्न तहसीलों में लगभग 20 नावों की व्यवस्था करने का दावा किया है, लेकिन मौके पर बाढ़ राहत और बचाव के कोई खास इंतजाम नजर नहीं आ रहे। बाढ़ चौकियों पर आटा, चावल, दालें, चीनी आदि रसद समेत जीवनरक्षक दवाओं का अभाव बना हुआ है।
गंगा के खादर में बाढ़ से घिरे कई गांव
मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा-रामगंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गंगा के खादर मे बसे कई गांव पानी से घिर चुके हैं। जबकि रामगंगा नदी की मुख्य धारा को मोड़ने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा पहाड़पुर गांव के निकट लगाए गए जिओ ट्यूब से पानी ओवरफ्लो होकर पुरानी धारा में आ गया है। इससे रामगंगा के तटवर्ती ग्राम कुनिया, हरिहरपुर, पहरूआ और मौजमपुर पर भूकटान का खतरा मंडराने लगा है। इन गांवों में ओमकार, महेश, बुधपाल, बांकेलाल, राजवीर, तेजराम, बृजनंदन, रामवीर आदि के घर नदी के मुहाने पर हैं। उधर, ग्राम आजादनगर और इस्लामनगर का दक्षिणी इलाका चारों ओर से गंगा की बाढ़ के पानी से घिर गया है। क्षेत्रीय लेखपाल संजीव सिंह ने ग्राम प्रधान फारूक अली के साथ बाढ़ ग्रस्त गांवों का भ्रमणकर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की सलाह दी है। आजादनगर के ग्रामीण ईशाक, साबिर, नाजिम व गुड्डू आदि ने बताया कि अभी तक बाढ़ राहत के नाम पर एक माचिस तक नसीब नहीं हुई है। वे अपनी निजी नावों से सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी में हैं।
इकलौती जर्जर नाव के सहारे परौर क्षेत्र के ग्रामीण
रामगंगा के किनारे परौर गांव के मझरा माहनपुर के बाशिंदे चौतरफा रामगंगा से घिरने लगे हैं। हालांकि, वहां कृषि भूमि का कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बांस से बैंबू क्रैट बनाकर उनमें बालू की बोरियां फंसाकर नदी तट पर बनाई गई ठोकरों के पास डालनी शुरू कर दी हैं, लेकिन बाढ़ में फंसनेे की दशा में ग्रामीणों के पास बाहर निकलने को एक पुरानी जर्जर नाव के सिवा अन्य कोई जरिया नहीं है। इस नाव में क्षमता से तीन गुना अधिक ग्रामीण बैठकर नदी पार कर रहे हैं। नाव का संचालन भी अप्रशिक्षित चरवाहे कर रहे हैं और इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। परौर में जहां बाढ़ चौकी बताई जा रही है, वहां कोई कर्मचारी नजर नहीं आया।
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कलान मेें सिर्फ कागजों पर चल रहीं 13 बाढ़ चौकियां
डीएम अमृत त्रिपाठी ने कलान तहसील में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 13 बाढ़ चौकियां स्थापित की हैं, लेकिन डीएम के यहां आने के बाद भी बाढ़ चौकियों का कहीं अता पता नहीं है। कलान के तहसीलदार रामऔतार वर्मा के अनुसार विकास खंड के ग्राम बेहटा जंगल, कुंडरिया, विक्रमपुर, परौर, लक्ष्मनपुर, मालौं एवं सनाय और मिर्जापुर ब्लाक के ग्राम पृथ्वीपुर-ढाई, कीलापुर, जरीनपुर, दहेलिया, मई खुर्दकलां व चौरा बगरखेत में बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं, लेकिन संबंधित गांवों के ग्रामीण चौकियां खोले जाने से इंकार कर रहे हैं।
जिले में सभी 71 बाढ़ चौकियों पर स्टाफ की तैनाती कर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के मोबाइल नंबर दीवार पर लिखवाए जा रहे हैं। हालांकि, अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन सभी चौकियों के स्टाफ को पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ प्रभावितों को आटा, चावल, दालें, आलू आदि उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए इन सभी वस्तुओं की दरें तय उनके वितरण की जिम्मेदारी नेकाफ संस्था को दी गई है। पानी से घिरे लोगों को बाहर निकालने के लिए फर्रुखाबाद के घटिया घाट से 50 नावें मंगाने की व्यवस्था की जा रही है। जरूरत पड़ी तो मोटरबोट से लैस पीएसी बल की मदद ली जाएगी। -सर्वेश कुमार, आपदा राहत प्रभारी/एडीएम फाइनेंस
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गंगा के खादर में बाढ़ से घिरे कई गांव
मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा-रामगंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गंगा के खादर मे बसे कई गांव पानी से घिर चुके हैं। जबकि रामगंगा नदी की मुख्य धारा को मोड़ने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा पहाड़पुर गांव के निकट लगाए गए जिओ ट्यूब से पानी ओवरफ्लो होकर पुरानी धारा में आ गया है। इससे रामगंगा के तटवर्ती ग्राम कुनिया, हरिहरपुर, पहरूआ और मौजमपुर पर भूकटान का खतरा मंडराने लगा है। इन गांवों में ओमकार, महेश, बुधपाल, बांकेलाल, राजवीर, तेजराम, बृजनंदन, रामवीर आदि के घर नदी के मुहाने पर हैं। उधर, ग्राम आजादनगर और इस्लामनगर का दक्षिणी इलाका चारों ओर से गंगा की बाढ़ के पानी से घिर गया है। क्षेत्रीय लेखपाल संजीव सिंह ने ग्राम प्रधान फारूक अली के साथ बाढ़ ग्रस्त गांवों का भ्रमणकर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की सलाह दी है। आजादनगर के ग्रामीण ईशाक, साबिर, नाजिम व गुड्डू आदि ने बताया कि अभी तक बाढ़ राहत के नाम पर एक माचिस तक नसीब नहीं हुई है। वे अपनी निजी नावों से सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी में हैं।
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इकलौती जर्जर नाव के सहारे परौर क्षेत्र के ग्रामीण
रामगंगा के किनारे परौर गांव के मझरा माहनपुर के बाशिंदे चौतरफा रामगंगा से घिरने लगे हैं। हालांकि, वहां कृषि भूमि का कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बांस से बैंबू क्रैट बनाकर उनमें बालू की बोरियां फंसाकर नदी तट पर बनाई गई ठोकरों के पास डालनी शुरू कर दी हैं, लेकिन बाढ़ में फंसनेे की दशा में ग्रामीणों के पास बाहर निकलने को एक पुरानी जर्जर नाव के सिवा अन्य कोई जरिया नहीं है। इस नाव में क्षमता से तीन गुना अधिक ग्रामीण बैठकर नदी पार कर रहे हैं। नाव का संचालन भी अप्रशिक्षित चरवाहे कर रहे हैं और इससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। परौर में जहां बाढ़ चौकी बताई जा रही है, वहां कोई कर्मचारी नजर नहीं आया।
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कलान मेें सिर्फ कागजों पर चल रहीं 13 बाढ़ चौकियां
डीएम अमृत त्रिपाठी ने कलान तहसील में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 13 बाढ़ चौकियां स्थापित की हैं, लेकिन डीएम के यहां आने के बाद भी बाढ़ चौकियों का कहीं अता पता नहीं है। कलान के तहसीलदार रामऔतार वर्मा के अनुसार विकास खंड के ग्राम बेहटा जंगल, कुंडरिया, विक्रमपुर, परौर, लक्ष्मनपुर, मालौं एवं सनाय और मिर्जापुर ब्लाक के ग्राम पृथ्वीपुर-ढाई, कीलापुर, जरीनपुर, दहेलिया, मई खुर्दकलां व चौरा बगरखेत में बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं, लेकिन संबंधित गांवों के ग्रामीण चौकियां खोले जाने से इंकार कर रहे हैं।
जिले में सभी 71 बाढ़ चौकियों पर स्टाफ की तैनाती कर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के मोबाइल नंबर दीवार पर लिखवाए जा रहे हैं। हालांकि, अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन सभी चौकियों के स्टाफ को पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। बाढ़ प्रभावितों को आटा, चावल, दालें, आलू आदि उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए इन सभी वस्तुओं की दरें तय उनके वितरण की जिम्मेदारी नेकाफ संस्था को दी गई है। पानी से घिरे लोगों को बाहर निकालने के लिए फर्रुखाबाद के घटिया घाट से 50 नावें मंगाने की व्यवस्था की जा रही है। जरूरत पड़ी तो मोटरबोट से लैस पीएसी बल की मदद ली जाएगी। -सर्वेश कुमार, आपदा राहत प्रभारी/एडीएम फाइनेंस