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कृषि से सुदृढ़ हो सकती है राष्ट्र की अर्थव्यवस्था
Updated Fri, 15 Dec 2017 11:19 PM IST
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भूटानी छात्राअाें का स्वागत
- फोटो : अमर उजाला
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शाहजहांपुर। आर्य महिला महाविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग की ओर से वर्तमान में देश के आर्थिक विकास में कृषि की भूमिका विषयक शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एसएस कॉलेज के अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में शामिल होने आए भूटान के शैक्षिक दल ने उपस्थिति दर्ज कराकर छात्राओं को विषयांतर्गत उपयोगी जानकारी दी। इस अवसर पर छात्राओं ने अतिथियों के सम्मान में मनमोहक रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।
महाविद्यालय सभागार में हुई संगोष्ठी में भूटान के दल मुखिया और मुख्य वक्ता डॉ. शाद अहमद खान ने कहा कि कृषि के माध्यम से किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस गति से जनसंख्या में वृद्धि हो रही है, उसको देखते हुए अगले 50 वर्षों में दोगुने खाद्यान्न की आवश्यकता होगी। औद्योगीकरण एवं आवासीय विकास के कारण कृषि योग्य भूमि की निरंतर कमी हो रही है। केवल बर्टिकल फार्मिंग के द्वारा ही इस कमी को दूर किया जा सकता है। इससे 95 प्रतिशत पानी का प्रयोग कम होता है।
महाविद्यालय की प्रवक्ता डॉ. उपासना श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था में कृषि के योगदान को हरित क्रांति, निवेश और नाशवान खाद्य पदार्थों को संरक्षित कर बढ़ाया जा सकता है। इस अवसर पर डॉ. संजीता अग्रवाल, प्रबंध समिति के सदस्य रामनरेश वाजपेयी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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इससे पूर्व संचालक विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि द्विवेदी ने विषय स्थापना की। छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। महाविद्यालय की ओर से प्रबंधक अमितेश अमित, प्राचार्य डॉ. कनकरानी ने अतिथि दल को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। आयोजन में प्रबंध समिति के अध्यक्ष त्रिलोकीनाथ पांडेय, चंद्रकांता सिंहह, मंजू अग्निहोत्री, राम कैलाश तिवारी, संतोष दीक्षित, अर्चना मिश्रा, डॉ. रूपांशुमाला, डॉ. दुर्गावती सिंह, डॉ. मीरा गुप्ता, डॉ. आलोक दीक्षित, डॉ. एमपी सिंह चौहान, डॉ. विजय गुप्ता, डॉ. आशीष गोयल, डॉ. अरुणकांत पांडेय आदि मौजूद रहे।
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महाविद्यालय सभागार में हुई संगोष्ठी में भूटान के दल मुखिया और मुख्य वक्ता डॉ. शाद अहमद खान ने कहा कि कृषि के माध्यम से किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस गति से जनसंख्या में वृद्धि हो रही है, उसको देखते हुए अगले 50 वर्षों में दोगुने खाद्यान्न की आवश्यकता होगी। औद्योगीकरण एवं आवासीय विकास के कारण कृषि योग्य भूमि की निरंतर कमी हो रही है। केवल बर्टिकल फार्मिंग के द्वारा ही इस कमी को दूर किया जा सकता है। इससे 95 प्रतिशत पानी का प्रयोग कम होता है।
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महाविद्यालय की प्रवक्ता डॉ. उपासना श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्र की आर्थिक व्यवस्था में कृषि के योगदान को हरित क्रांति, निवेश और नाशवान खाद्य पदार्थों को संरक्षित कर बढ़ाया जा सकता है। इस अवसर पर डॉ. संजीता अग्रवाल, प्रबंध समिति के सदस्य रामनरेश वाजपेयी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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इससे पूर्व संचालक विभागाध्यक्ष डॉ. रुचि द्विवेदी ने विषय स्थापना की। छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। महाविद्यालय की ओर से प्रबंधक अमितेश अमित, प्राचार्य डॉ. कनकरानी ने अतिथि दल को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। आयोजन में प्रबंध समिति के अध्यक्ष त्रिलोकीनाथ पांडेय, चंद्रकांता सिंहह, मंजू अग्निहोत्री, राम कैलाश तिवारी, संतोष दीक्षित, अर्चना मिश्रा, डॉ. रूपांशुमाला, डॉ. दुर्गावती सिंह, डॉ. मीरा गुप्ता, डॉ. आलोक दीक्षित, डॉ. एमपी सिंह चौहान, डॉ. विजय गुप्ता, डॉ. आशीष गोयल, डॉ. अरुणकांत पांडेय आदि मौजूद रहे।