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कई जनपदों तक पहुंचा पुवायां का साठा
Updated Sat, 31 Mar 2018 10:57 PM IST
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पुवायां।
पुवायां का साठा कई जनपदों तक जा पहुंचा है। हालात यह है कि दूसरे जिलों से आने वाले किसान पौध का मुंहमांगा रेट देने को तैयार हैं, लेकिन पौध पूरी नहीं हो पा रही है।
पुवायां क्षेत्र में साठा धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इसके लिए पौध तैयार करने का काम जनवरी माह से शुरू कर दिया जाता है। पौध के बढ़ने के साथ ही हरदोई, सीतापुर, बहराइच, खीरी, पीलीभीत, बरेली आदि के किसान यहां पौध खरीदने के लिए आने लगते हैं। सौदा तय हो जाने पर एडवांस देकर बात पक्की कर दी जाती है।
इस वर्ष गन्ने की खेती से किसानों का मोहभंग होने के कारण साठा का क्षेत्रफल बढ़ गया है। इस कारण पौध के लिए मारामारी मची है। तमाम फार्माें पर पौध समाप्त हो चुकी है। कई लोगों ने तो पौध को दुबारा तैयार कर बिक्री कर दी है। अभी साठा काफी क्षेत्रफल में लगाया जाना है, लेकिन पौध नहीं होने के कारण किसानों को दिक्कतें आ रही हैं। बढ़िया उपज देने वाले धान की किस्म गोविंदा, कलकत्ता वन, टीआर 13 आदि की पौध की भारी मांग है।
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पुवायां का साठा कई जनपदों तक जा पहुंचा है। हालात यह है कि दूसरे जिलों से आने वाले किसान पौध का मुंहमांगा रेट देने को तैयार हैं, लेकिन पौध पूरी नहीं हो पा रही है।
पुवायां क्षेत्र में साठा धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इसके लिए पौध तैयार करने का काम जनवरी माह से शुरू कर दिया जाता है। पौध के बढ़ने के साथ ही हरदोई, सीतापुर, बहराइच, खीरी, पीलीभीत, बरेली आदि के किसान यहां पौध खरीदने के लिए आने लगते हैं। सौदा तय हो जाने पर एडवांस देकर बात पक्की कर दी जाती है।
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इस वर्ष गन्ने की खेती से किसानों का मोहभंग होने के कारण साठा का क्षेत्रफल बढ़ गया है। इस कारण पौध के लिए मारामारी मची है। तमाम फार्माें पर पौध समाप्त हो चुकी है। कई लोगों ने तो पौध को दुबारा तैयार कर बिक्री कर दी है। अभी साठा काफी क्षेत्रफल में लगाया जाना है, लेकिन पौध नहीं होने के कारण किसानों को दिक्कतें आ रही हैं। बढ़िया उपज देने वाले धान की किस्म गोविंदा, कलकत्ता वन, टीआर 13 आदि की पौध की भारी मांग है।
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