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गन्ना और धान पर बारिश के साथ हवा के तेज अंधड़ों का कहर
Updated Sun, 23 Sep 2018 11:57 PM IST
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तेज हवा और बारिश से गन्ना, धान की फसलें खेतों में पसरीं
शनिवार शाम से रविवार सुबह तक 68 मिमी बारिश रिकार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। अगस्त माह में हुई भारी वर्षा और उससे उपजी बाढ़ के प्रकोप से कृषि प्रधान जिले में खरीफ सीजन की तमाम फसलें पहले ही चौपट हो चुकी हैं। अब सितंबर के आखिरी दौर में पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में तूफान के असर से हुई व्यापक वर्षा के साथ चले हवा के तेज अंधड़ गन्ना और धान की बाकी बची फसल के लिए कहर साबित हो रहे हैं। शनिवार शाम से रविवार सुबह तक हुई 68 मिमी की अप्रत्याशित बारिश ने उन सभी किसानों को चिंतित कर दिया है, जो बाढ़ और भारी वर्षा के कारण पहले से फसली क्षति का सामना कर चुके हैं। रोड साइड के खेतों में किनारे पर बोया गया गन्ना और धान तेज हवा से गिरने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का मानना है कि मौसम जल्द सामान्य होने और धूप निकलने पर गिरे हुए पौधे फिर से बढ़वार लेने लायक हो जाएंगे।
खरीफ सीजन में 2.43 लाख हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की बुवाई लक्ष्य तय किया गया था। 2,07,332 हेक्टेयर में धान की विभिन्न किस्मों की रोपाई होनी थी। मक्का, ज्वार, बाजरा आदि शस्य फसलों के लिए 6848 हेक्टेयर, दलहन के लिए 370 हेक्टेयर और तिलहनी फसलों के लिए 13244 हेक्टेयर रकबा सुरक्षित किया गया, लेकिन मानसून की लेटलतीफी के कारण धान से बमुश्किल 73 हजार हेक्टेयर रकबा आच्छादित हो सका। कृषि वैज्ञानिकों के सुझाव पर किसानों ने धान के विकल्प तौर पर करीब 25 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में मूंगफली, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, तिल, सोयाबीन आदि की बुआई की गई। गत माह बाढ़ और बारिश के कहर से करीब 13000 हेक्टेयर फसलें खराब हो चुकी हैं।
खास यह रहा कि इस दौरान हवा नहीं चलने से गन्ना और धान की फसल प्राकृतिक आपदा से बची रही, लेकिन दो दिन पहले अचानक मौसम के करवट बदलने के साथ रही-बची फसलों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे। पहले दिन 1.4 मिमी मामूली वर्षा हुई। बीते दिन 3.6 मिमी बारिश के साथ हवा का वेग भी थोड़ा बढ़ा, लेकिन देर रात बारिश के साथ हवा ने अंधड़ों का रूप लिया तो गन्ना और धान लहराते हुए खेतों में पसरने लगा। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार असम समेत अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में तूफान के प्रभाव से हवा का वेग 45 से 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गया। देर रात से सुबह तक हुई 68 मिमी बरसात से खेतों की मिट्टी गीली होकर फूलने से गन्ना और धान की जड़ें कमजोर पड़ गई हैं। ऐसी दशा में बारिश के साथ तेज हवा चलनी बंद नहीं हुई तो यह दोनों फसलें खेत में पसर जाएंगी।
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आलू को होगा लाभ, धान और दलहन का झड़ेगा फूल
कृषि विभाग के अधिकारी अवांछित बरसात से फसली नुकसान का आकलन करने में भले ही संकोच कर रहे हों, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन दिनों धान और दलहनी फसलों में फूल आने की प्रक्रिया बारिश से न केवल थमेगी, बल्कि फूल झड़ने से उत्पादन प्रभावित होगा। उन्नतशील फार्मरों का मानना है कि सिर्फ आलू की फसल के लिए बारिश मुफीद साबित होगी, लेकिन बरसात नहीं थमी तो धान, उड़द, मूंग आदि के पौधों का फूल गिर जाएगा। किसान जमीन पर फैलने वाली कद्दू, करेला, परवल, लौकी, तोरई आदि लतावर्गीय सब्जियों की सेहत को लेकर भी खासे परेशान हैं।
खरीफ फसलों का बुवाई क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
---------------------------------------------
फसल क्षेत्रफल
0 धान (सभी किस्में) 73807
0 मक्का 3391
0 ज्वार 1127
0 बाजरा 2333
0 उड़द 8467
0 मूंग 39
0 अरहर 371
0 मूंगफली 4206
0 तिल 5476
0 सोयाबीन 25
गन्ना को क्रॉस विधि से बांधकर गिरने से बचाएं किसान
तेजी से बढ़वार ले रहे गन्ना की जड़ें खेत गीले हो जाने से कमजोर हो गई हैं। ऐसे में तेज हवा से गन्ना को गिरने से बचाने के लिए किसान खेतों में गन्ना की एक लाइन को दूसरी लाइन से सीढ़ी की तरह क्रास पद्धति से बांधना शुरू कर दें। वैसे भी अगेती प्रजातियों के गन्ना की बंधाई का काम सितंबर माह में हो जाना चाहिए। धान समेत अन्य फसलों वाले खेतों में भरा पानी निकालने की व्यवस्था किसान शीघ्र करें, अन्यथा जड़ें और तना सड़ने की समस्या पैदा हो सकती है।
-डॉ. केएम सिंह, शस्य वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
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तेज हवा और बारिश से गन्ना, धान की फसलें खेतों में पसरीं
शनिवार शाम से रविवार सुबह तक 68 मिमी बारिश रिकार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। अगस्त माह में हुई भारी वर्षा और उससे उपजी बाढ़ के प्रकोप से कृषि प्रधान जिले में खरीफ सीजन की तमाम फसलें पहले ही चौपट हो चुकी हैं। अब सितंबर के आखिरी दौर में पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में तूफान के असर से हुई व्यापक वर्षा के साथ चले हवा के तेज अंधड़ गन्ना और धान की बाकी बची फसल के लिए कहर साबित हो रहे हैं। शनिवार शाम से रविवार सुबह तक हुई 68 मिमी की अप्रत्याशित बारिश ने उन सभी किसानों को चिंतित कर दिया है, जो बाढ़ और भारी वर्षा के कारण पहले से फसली क्षति का सामना कर चुके हैं। रोड साइड के खेतों में किनारे पर बोया गया गन्ना और धान तेज हवा से गिरने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का मानना है कि मौसम जल्द सामान्य होने और धूप निकलने पर गिरे हुए पौधे फिर से बढ़वार लेने लायक हो जाएंगे।
खरीफ सीजन में 2.43 लाख हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की बुवाई लक्ष्य तय किया गया था। 2,07,332 हेक्टेयर में धान की विभिन्न किस्मों की रोपाई होनी थी। मक्का, ज्वार, बाजरा आदि शस्य फसलों के लिए 6848 हेक्टेयर, दलहन के लिए 370 हेक्टेयर और तिलहनी फसलों के लिए 13244 हेक्टेयर रकबा सुरक्षित किया गया, लेकिन मानसून की लेटलतीफी के कारण धान से बमुश्किल 73 हजार हेक्टेयर रकबा आच्छादित हो सका। कृषि वैज्ञानिकों के सुझाव पर किसानों ने धान के विकल्प तौर पर करीब 25 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में मूंगफली, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, तिल, सोयाबीन आदि की बुआई की गई। गत माह बाढ़ और बारिश के कहर से करीब 13000 हेक्टेयर फसलें खराब हो चुकी हैं।
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खास यह रहा कि इस दौरान हवा नहीं चलने से गन्ना और धान की फसल प्राकृतिक आपदा से बची रही, लेकिन दो दिन पहले अचानक मौसम के करवट बदलने के साथ रही-बची फसलों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे। पहले दिन 1.4 मिमी मामूली वर्षा हुई। बीते दिन 3.6 मिमी बारिश के साथ हवा का वेग भी थोड़ा बढ़ा, लेकिन देर रात बारिश के साथ हवा ने अंधड़ों का रूप लिया तो गन्ना और धान लहराते हुए खेतों में पसरने लगा। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार असम समेत अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में तूफान के प्रभाव से हवा का वेग 45 से 50 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गया। देर रात से सुबह तक हुई 68 मिमी बरसात से खेतों की मिट्टी गीली होकर फूलने से गन्ना और धान की जड़ें कमजोर पड़ गई हैं। ऐसी दशा में बारिश के साथ तेज हवा चलनी बंद नहीं हुई तो यह दोनों फसलें खेत में पसर जाएंगी।
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कृषि विभाग के अधिकारी अवांछित बरसात से फसली नुकसान का आकलन करने में भले ही संकोच कर रहे हों, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इन दिनों धान और दलहनी फसलों में फूल आने की प्रक्रिया बारिश से न केवल थमेगी, बल्कि फूल झड़ने से उत्पादन प्रभावित होगा। उन्नतशील फार्मरों का मानना है कि सिर्फ आलू की फसल के लिए बारिश मुफीद साबित होगी, लेकिन बरसात नहीं थमी तो धान, उड़द, मूंग आदि के पौधों का फूल गिर जाएगा। किसान जमीन पर फैलने वाली कद्दू, करेला, परवल, लौकी, तोरई आदि लतावर्गीय सब्जियों की सेहत को लेकर भी खासे परेशान हैं।
खरीफ फसलों का बुवाई क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
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फसल क्षेत्रफल
0 धान (सभी किस्में) 73807
0 मक्का 3391
0 ज्वार 1127
0 बाजरा 2333
0 उड़द 8467
0 मूंग 39
0 अरहर 371
0 मूंगफली 4206
0 तिल 5476
0 सोयाबीन 25
गन्ना को क्रॉस विधि से बांधकर गिरने से बचाएं किसान
तेजी से बढ़वार ले रहे गन्ना की जड़ें खेत गीले हो जाने से कमजोर हो गई हैं। ऐसे में तेज हवा से गन्ना को गिरने से बचाने के लिए किसान खेतों में गन्ना की एक लाइन को दूसरी लाइन से सीढ़ी की तरह क्रास पद्धति से बांधना शुरू कर दें। वैसे भी अगेती प्रजातियों के गन्ना की बंधाई का काम सितंबर माह में हो जाना चाहिए। धान समेत अन्य फसलों वाले खेतों में भरा पानी निकालने की व्यवस्था किसान शीघ्र करें, अन्यथा जड़ें और तना सड़ने की समस्या पैदा हो सकती है।
-डॉ. केएम सिंह, शस्य वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र