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जान जोखिम में डाल भविष्य संवारने की कवायद
Updated Thu, 03 Aug 2017 08:06 PM IST
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जान जोखिम में डाल भविष्य संवारने की कवायद
नगर क्षेत्र में किराये के भवनों में चल रहे कई परिषदीय स्कूल
बच्चों और शिक्षकों के लिए शौचालय और पेयजल भी मुहैया नहीं
स्कूल समय में बच्चों के बैठने के स्थान पर सुखाए जाते हैं कपड़े
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
नगर क्षेत्र के कुछ मोहल्लों में बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित स्कूलाें को भवन न मिलने से शिक्षा व्यवस्था ही प्रभावित नहीं हो रही है, बल्कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों की जान को भी खतरा बना हुआ है। शहरी क्षेत्र में करीब नौ ऐसे स्कूल हैं, जो लंबे अरसे से मुकदमेबाजी के जंजाल में फंसे हुए हैं। विभाग उन्हें छोड़ने की स्थिति में नहीं है और भवन स्वामी स्कूल खाली कराने की जिद पकड़े हुए हैं, लिहाजा वह स्कूल भवनों की मरम्मत कराने की अनुमति भी नहीं दे रहे हैं। दो-तीन स्कूलों को एक ही भवन में शिफ्ट करके जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। ऐसे जर्जर स्कूल भवनों में बच्चों को हर समय खतरा बना रहता है। खासतौर पर बरसात में इन भवनों के गिरने की आशंका भी बनी रहती है। हालत तो यहां तक खराब हैं कि इन किराये के स्कूल भवनों में बच्चों और स्टाफ के लिए शौचालय तथा पेयजल की सुविधा भी नहीं है। बता दें कि नगर क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय रंगीन चौपाल, तारीन टिकली, सिंजई, मतानी, हाथीथान, हाथीथान प्रथम, भारद्वाजी, प्रथम, महमंद जलालनगर और प्राथमिक विद्यालय बाडूजई द्वितीय जर्जर भवन में वर्षों से संचालित हैं। इन भवनों को खाली कराने तथा स्वामित्व हासिल करने के लिए भवन स्वामियों ने कोर्ट में शरण ले रखी है और विभाग उन्हें खाली करने की स्थिति में नहीं है। लिहाजा मुकदमेबाजी चल रही है। इन भवनों का किराया भी नगण्य ही है। गिरताऊ हालत होने के कारण प्राथमिक विद्यालय रंगीन चौपाल और तारीन टिकली को एक भवन में संचालित किया जा रहा है। इसी तरह सिंजई, मतानी, महमंद, जलालनगर और बाडूजई द्वितीय को एक भवन में शिफ्ट किया जा चुका है। तारीन टिकली और रंगीन चौपाल स्कूल में तो भवन स्वामी द्वारा सुबह से ही तार कपड़े सुखाने के लिए डाल दिए जाते हैं, जोे बच्चों और शिक्षकों के सिर पर झूलते रहते हैं। जानकारी के अनुसार हाथीथान और हाथीथान प्रथम में शौचालय और पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे ही अन्य किराए वाले स्कूलों में कहीं शौचालय नहीं है तो कहीं हैंडपंप का अभाव है।
ऐसी दशा में बच्चों को कैसे पढ़ाएं
परिषदीय स्कूल तारीन टिकली प्रथम और रंगीन चौपाल स्कूल में शौचालय और हैंडपंप न होने से स्कूल स्टाफ और छात्र-छात्राओं को बहुत परेशानी होती है। तारीन टिकली स्कूल में 40 और रंगीन चौपाल स्कूल में कुल 30 बच्चे हैं। पड़ोस के घर से बाल्टी में पानी मंगाकर रख लिया जाता है, लघुशंका आदि के लिए भी बच्चे पड़ोस के एक घर में जाते हैं। स्कूल गिरताऊ हालत में है, भवन के अंदर-बाहर पानी भी भरा रहता है और स्कूल समय में ही भवन स्वामी द्वारा कपड़े भी सुखाए जाते हैं। बच्चों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पढ़ाई कैसे कराई जाए।
अर्शी परवीन, इंचार्ज प्रधान अध्यापिका
फोटो- 07 में
स्कूल शिफ्टिंग का प्रस्ताव भेजा है
किराये के भवनों में स्कूल संचालित करना समस्या तो है ही। नगर क्षेत्र में हर मोहल्ले में जमीन मिलना अब असंभव है, लिहाजा अपने स्कूलों में इन्हें शिफ्ट किया जा सकता है। इसके लिए सचिव परिषद को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अभी वहां से कोई जवाब नहीं आया है। जर्जर स्कूलों में बच्चों के लिए खतरा तो बना ही रहता है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। कुछ स्कूलों में शौचालय और पेयजल की भी समस्या है। बच्चों के हित में भवन स्वामियों को चाहिए कि वह मरम्मत कराते रहें अथवा विभाग को कराने दें।
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राकेश कुमार, बीएसए
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फोटो- 07 में
जान जोखिम में डाल भविष्य संवारने की कवायद
नगर क्षेत्र में किराये के भवनों में चल रहे कई परिषदीय स्कूल
बच्चों और शिक्षकों के लिए शौचालय और पेयजल भी मुहैया नहीं
स्कूल समय में बच्चों के बैठने के स्थान पर सुखाए जाते हैं कपड़े
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
नगर क्षेत्र के कुछ मोहल्लों में बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित स्कूलाें को भवन न मिलने से शिक्षा व्यवस्था ही प्रभावित नहीं हो रही है, बल्कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों की जान को भी खतरा बना हुआ है। शहरी क्षेत्र में करीब नौ ऐसे स्कूल हैं, जो लंबे अरसे से मुकदमेबाजी के जंजाल में फंसे हुए हैं। विभाग उन्हें छोड़ने की स्थिति में नहीं है और भवन स्वामी स्कूल खाली कराने की जिद पकड़े हुए हैं, लिहाजा वह स्कूल भवनों की मरम्मत कराने की अनुमति भी नहीं दे रहे हैं। दो-तीन स्कूलों को एक ही भवन में शिफ्ट करके जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है। ऐसे जर्जर स्कूल भवनों में बच्चों को हर समय खतरा बना रहता है। खासतौर पर बरसात में इन भवनों के गिरने की आशंका भी बनी रहती है। हालत तो यहां तक खराब हैं कि इन किराये के स्कूल भवनों में बच्चों और स्टाफ के लिए शौचालय तथा पेयजल की सुविधा भी नहीं है। बता दें कि नगर क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय रंगीन चौपाल, तारीन टिकली, सिंजई, मतानी, हाथीथान, हाथीथान प्रथम, भारद्वाजी, प्रथम, महमंद जलालनगर और प्राथमिक विद्यालय बाडूजई द्वितीय जर्जर भवन में वर्षों से संचालित हैं। इन भवनों को खाली कराने तथा स्वामित्व हासिल करने के लिए भवन स्वामियों ने कोर्ट में शरण ले रखी है और विभाग उन्हें खाली करने की स्थिति में नहीं है। लिहाजा मुकदमेबाजी चल रही है। इन भवनों का किराया भी नगण्य ही है। गिरताऊ हालत होने के कारण प्राथमिक विद्यालय रंगीन चौपाल और तारीन टिकली को एक भवन में संचालित किया जा रहा है। इसी तरह सिंजई, मतानी, महमंद, जलालनगर और बाडूजई द्वितीय को एक भवन में शिफ्ट किया जा चुका है। तारीन टिकली और रंगीन चौपाल स्कूल में तो भवन स्वामी द्वारा सुबह से ही तार कपड़े सुखाने के लिए डाल दिए जाते हैं, जोे बच्चों और शिक्षकों के सिर पर झूलते रहते हैं। जानकारी के अनुसार हाथीथान और हाथीथान प्रथम में शौचालय और पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे ही अन्य किराए वाले स्कूलों में कहीं शौचालय नहीं है तो कहीं हैंडपंप का अभाव है।
ऐसी दशा में बच्चों को कैसे पढ़ाएं
परिषदीय स्कूल तारीन टिकली प्रथम और रंगीन चौपाल स्कूल में शौचालय और हैंडपंप न होने से स्कूल स्टाफ और छात्र-छात्राओं को बहुत परेशानी होती है। तारीन टिकली स्कूल में 40 और रंगीन चौपाल स्कूल में कुल 30 बच्चे हैं। पड़ोस के घर से बाल्टी में पानी मंगाकर रख लिया जाता है, लघुशंका आदि के लिए भी बच्चे पड़ोस के एक घर में जाते हैं। स्कूल गिरताऊ हालत में है, भवन के अंदर-बाहर पानी भी भरा रहता है और स्कूल समय में ही भवन स्वामी द्वारा कपड़े भी सुखाए जाते हैं। बच्चों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में पढ़ाई कैसे कराई जाए।
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अर्शी परवीन, इंचार्ज प्रधान अध्यापिका
फोटो- 07 में
स्कूल शिफ्टिंग का प्रस्ताव भेजा है
किराये के भवनों में स्कूल संचालित करना समस्या तो है ही। नगर क्षेत्र में हर मोहल्ले में जमीन मिलना अब असंभव है, लिहाजा अपने स्कूलों में इन्हें शिफ्ट किया जा सकता है। इसके लिए सचिव परिषद को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अभी वहां से कोई जवाब नहीं आया है। जर्जर स्कूलों में बच्चों के लिए खतरा तो बना ही रहता है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। कुछ स्कूलों में शौचालय और पेयजल की भी समस्या है। बच्चों के हित में भवन स्वामियों को चाहिए कि वह मरम्मत कराते रहें अथवा विभाग को कराने दें।
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राकेश कुमार, बीएसए