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सूखी पड़ी नहरों पर दबंगों की निगाह
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:13 AM IST
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शाहजहांपुर।
जिले में फसलों की सिंचाई के लिए शारदा नहर खंड और राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना के नियंत्रण में सदर व तिलहर तहसील में नहरों का जाल बिछा है, लेकिन कई नहरों की पटरियों पर आसपास के दबंगों ने झोपड़ियां डालकर कब्जा कर लिया है और नहर के किनारे स्थित विभागीय कृषि भूमि पर अनधिकृत तरीके से खेती की जा रही है। यह मसला सिंचाई बंधु की बैठकों में भी उठता रहा है पर अवैध कब्जे से नहरों को मुक्ति नहीं मिल पाई है।
जिले में करीब साढ़े चार लाख किसान हैं। इनमें से लगभग 2.5 लाख किसान कम जोत वाले लघु-सीमांत श्रेणी के हैं। इनमें से अधिकतर के पास सिंचाई के निजी संसाधनों का अभाव है। ये किसान रबी, खरीफ, जायद आदि सभी फसली सीजनों में सिंचाई के लिए मानसून की बारिश या फिर सरकारी नलकूपों और नहरों पर निर्भर हैं। कृषि उत्पादन में अग्रणी सदर और तिलहर तहसील में सिंचाई के लिए विभाग के नहर खंड और राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना के तहत 121 नहरों का जाल बिछा है।
इसके अतिरिक्त 452 राजकीय नलकूप विभिन्न तहसीलों में स्थापित हैं। चूंकि, जलालाबाद और पुवायां तहसील में नहरों की कमी है। इसलिए वहां अधिकतम कृषि रकबा सिंचन के दायरे में लाने के लिए नलकूपों की संख्या अधिक है। इन नलकूपों का कोई विकल्प नहीं होने से उन्हें ठीक रखा जाता है, लेकिन नहराें के कमांड एरिया वाली तहसीलों में करीब 30 प्रतिशत ऐसी माइनरें हैं, जिनकी वर्षों से उपेक्षा के चलते अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है। सूखी पड़ी इन्हीं नहरों के इर्द-गिर्द खाली पड़ी जमीनों पर आसपास के गांवों में रहने वाले दबंगों की निगाहें लगी रहती हैं। विभाग के अधिकारी बंद पड़ी नहरों का दौरा करने की जहमत नहीं उठाते। इसीलिए ग्रामीणों को विभाग की जमीनों पर डेरा डालने का मौका मिल जाता है।
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झाड़ियों में गुम हुआ सरही माइनर का रोजा रजबहा
रोजा।
गन्ना शोध परिषद के 125 एकड़ में फैले गन्ना प्रक्षेत्र की सिंचाई के लिए करीब पांच दशक पहले शारदा नहर खंड की कोरोकुइयां नहर से सिंधौली ब्लॉक में सरही माइनर निकालकर पांच किमी लंबा रोजा रजबहा निकाला गया था। यह रजबहा हथौड़ा से नायक जदुनाथ सिंह स्टेडियम वाली रोड के समानान्तर है। कई दशक तक इससे गन्ना प्रक्षेत्र की सिंचाई होती रही, लेकिन बाद में रजबहा से पानी की सप्लाई रुकने पर गन्ना प्रक्षेत्र परिसर में नलकूपों से सिंचाई होने लगी। इसी के साथ रजबहा की पटरियों पर हथौड़ा के ग्रामीणों ने खोखे-झोपड़ियां आदि रखकर कब्जे करने शुरू कर दिए। शिकायत मिलने पर सिंचाई विभाग ने दोनों पटरियों से कब्जेे हटाकर उन्हें खाली करा लिया, लेकिन रजबहा की सफाई नहीं होने से उसकी हालत नाला से भी गई-गुजरी हो चुकी है।
तिलहर माइनर का अंतिम छोर खेतों में लुप्त
तिलहर।
तहसील में सिंचाई के लिए 18 किमी लंबा गंधार रजबहा और सात किमी लंबी माइनर कांट तक निकाली गई है। ये नहरें कई साल से किसानों के लिए दिखावटी बनी हैं। उनमें पानी नहीं आने से नहरों के दोनों किनारों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। तिलहर माइनर के अंतिम छोर का करीब दो किमी हिस्ससा किसानों ने अपने खेतों में मिला लिया है।
खुदागंज में काटी जा चुकीं नहरों की पटरियां
खुदागंज।
अफसरों की अनदेेखी के कारण क्षेत्र में बंद पड़ी कई नहरों की पटरियां काटकर किसान अपने खेत चौड़े करने में जुटे हैं। भुड़िया से कपसेड़ा तक जाने वाली करीब नौ किमी लंबी भुड़िया माइनर से परशुरामपुर, रमापुर, उखरी, टिकरी, बाजपुर कुमरखा, सैजना, मरेना आदि गांवों के किसान सिंचाई सुविधा का लाभ लेते रहे, लेकिन अब यह माइनर बदहाल हो चुकी है। शाहबाजपुर से निगोही जाने वाली नहर काटकर रोड बना लिए जाने से यह नहर स्थायी रूप से बंद हो चुकी है।
अवैध कब्जेदारों को सींचपाल दे रहे ऑक्सीजन
कोरोकुइयां की शारदा नहर के निरीक्षण को कोरोकुइयां समेत भांभी, सिंघापुर आदि क्षेत्रों में निरीक्षण गृह बनाए गए, जिन्हें बोेलचाल में नहर कोठी कहा जाता है। इन कोठियों के आसपास खाली पड़ी कृषि भूमि के पट्टे विभाग द्वारा क्षेत्र के भूमिहीन किसानों को जारी किए जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार सींचपालों की मिलीभगत के चलते असरदार किसान अपने नौकरों के नाम पट्टे कराकर उनकी जमीनों पर फसलें स्वयं ले रहे हैं। यही नही, इन जमीनों पर सिंचाई के लिए हजारों की रकम लेकर अवैध कुलाबे भी लगाए जा रहे है। अवैध कुलाबों से नहर कटने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन नहर की मरम्मत को भी महकमे के लोग कमाई का जरिया बना लेते हैं। ऐसे ही एक मामले में डीएम से शिकायत होने पर अधिकारी जांच में जुटे हैं।
कुछ माइनरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना तकनीकी समस्याओं के कारण संभव नहीं हो रहा है। नहरों की देखभाल के साथ उनकी नियमित सफाई कराई जा रही है। रोजा रजबहा से अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं। अन्य स्थानों पर कब्जे के बारे में सूची नोडल अफसर बनाए गए शारदा नहर खंड के एक्सईएन को उपलब्ध करा दी है।
-उस्मान अली, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना
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जिले में फसलों की सिंचाई के लिए शारदा नहर खंड और राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना के नियंत्रण में सदर व तिलहर तहसील में नहरों का जाल बिछा है, लेकिन कई नहरों की पटरियों पर आसपास के दबंगों ने झोपड़ियां डालकर कब्जा कर लिया है और नहर के किनारे स्थित विभागीय कृषि भूमि पर अनधिकृत तरीके से खेती की जा रही है। यह मसला सिंचाई बंधु की बैठकों में भी उठता रहा है पर अवैध कब्जे से नहरों को मुक्ति नहीं मिल पाई है।
जिले में करीब साढ़े चार लाख किसान हैं। इनमें से लगभग 2.5 लाख किसान कम जोत वाले लघु-सीमांत श्रेणी के हैं। इनमें से अधिकतर के पास सिंचाई के निजी संसाधनों का अभाव है। ये किसान रबी, खरीफ, जायद आदि सभी फसली सीजनों में सिंचाई के लिए मानसून की बारिश या फिर सरकारी नलकूपों और नहरों पर निर्भर हैं। कृषि उत्पादन में अग्रणी सदर और तिलहर तहसील में सिंचाई के लिए विभाग के नहर खंड और राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना के तहत 121 नहरों का जाल बिछा है।
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इसके अतिरिक्त 452 राजकीय नलकूप विभिन्न तहसीलों में स्थापित हैं। चूंकि, जलालाबाद और पुवायां तहसील में नहरों की कमी है। इसलिए वहां अधिकतम कृषि रकबा सिंचन के दायरे में लाने के लिए नलकूपों की संख्या अधिक है। इन नलकूपों का कोई विकल्प नहीं होने से उन्हें ठीक रखा जाता है, लेकिन नहराें के कमांड एरिया वाली तहसीलों में करीब 30 प्रतिशत ऐसी माइनरें हैं, जिनकी वर्षों से उपेक्षा के चलते अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है। सूखी पड़ी इन्हीं नहरों के इर्द-गिर्द खाली पड़ी जमीनों पर आसपास के गांवों में रहने वाले दबंगों की निगाहें लगी रहती हैं। विभाग के अधिकारी बंद पड़ी नहरों का दौरा करने की जहमत नहीं उठाते। इसीलिए ग्रामीणों को विभाग की जमीनों पर डेरा डालने का मौका मिल जाता है।
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झाड़ियों में गुम हुआ सरही माइनर का रोजा रजबहा
रोजा।
गन्ना शोध परिषद के 125 एकड़ में फैले गन्ना प्रक्षेत्र की सिंचाई के लिए करीब पांच दशक पहले शारदा नहर खंड की कोरोकुइयां नहर से सिंधौली ब्लॉक में सरही माइनर निकालकर पांच किमी लंबा रोजा रजबहा निकाला गया था। यह रजबहा हथौड़ा से नायक जदुनाथ सिंह स्टेडियम वाली रोड के समानान्तर है। कई दशक तक इससे गन्ना प्रक्षेत्र की सिंचाई होती रही, लेकिन बाद में रजबहा से पानी की सप्लाई रुकने पर गन्ना प्रक्षेत्र परिसर में नलकूपों से सिंचाई होने लगी। इसी के साथ रजबहा की पटरियों पर हथौड़ा के ग्रामीणों ने खोखे-झोपड़ियां आदि रखकर कब्जे करने शुरू कर दिए। शिकायत मिलने पर सिंचाई विभाग ने दोनों पटरियों से कब्जेे हटाकर उन्हें खाली करा लिया, लेकिन रजबहा की सफाई नहीं होने से उसकी हालत नाला से भी गई-गुजरी हो चुकी है।
तिलहर माइनर का अंतिम छोर खेतों में लुप्त
तिलहर।
तहसील में सिंचाई के लिए 18 किमी लंबा गंधार रजबहा और सात किमी लंबी माइनर कांट तक निकाली गई है। ये नहरें कई साल से किसानों के लिए दिखावटी बनी हैं। उनमें पानी नहीं आने से नहरों के दोनों किनारों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। तिलहर माइनर के अंतिम छोर का करीब दो किमी हिस्ससा किसानों ने अपने खेतों में मिला लिया है।
खुदागंज में काटी जा चुकीं नहरों की पटरियां
खुदागंज।
अफसरों की अनदेेखी के कारण क्षेत्र में बंद पड़ी कई नहरों की पटरियां काटकर किसान अपने खेत चौड़े करने में जुटे हैं। भुड़िया से कपसेड़ा तक जाने वाली करीब नौ किमी लंबी भुड़िया माइनर से परशुरामपुर, रमापुर, उखरी, टिकरी, बाजपुर कुमरखा, सैजना, मरेना आदि गांवों के किसान सिंचाई सुविधा का लाभ लेते रहे, लेकिन अब यह माइनर बदहाल हो चुकी है। शाहबाजपुर से निगोही जाने वाली नहर काटकर रोड बना लिए जाने से यह नहर स्थायी रूप से बंद हो चुकी है।
अवैध कब्जेदारों को सींचपाल दे रहे ऑक्सीजन
कोरोकुइयां की शारदा नहर के निरीक्षण को कोरोकुइयां समेत भांभी, सिंघापुर आदि क्षेत्रों में निरीक्षण गृह बनाए गए, जिन्हें बोेलचाल में नहर कोठी कहा जाता है। इन कोठियों के आसपास खाली पड़ी कृषि भूमि के पट्टे विभाग द्वारा क्षेत्र के भूमिहीन किसानों को जारी किए जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार सींचपालों की मिलीभगत के चलते असरदार किसान अपने नौकरों के नाम पट्टे कराकर उनकी जमीनों पर फसलें स्वयं ले रहे हैं। यही नही, इन जमीनों पर सिंचाई के लिए हजारों की रकम लेकर अवैध कुलाबे भी लगाए जा रहे है। अवैध कुलाबों से नहर कटने का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन नहर की मरम्मत को भी महकमे के लोग कमाई का जरिया बना लेते हैं। ऐसे ही एक मामले में डीएम से शिकायत होने पर अधिकारी जांच में जुटे हैं।
कुछ माइनरों के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना तकनीकी समस्याओं के कारण संभव नहीं हो रहा है। नहरों की देखभाल के साथ उनकी नियमित सफाई कराई जा रही है। रोजा रजबहा से अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं। अन्य स्थानों पर कब्जे के बारे में सूची नोडल अफसर बनाए गए शारदा नहर खंड के एक्सईएन को उपलब्ध करा दी है।
-उस्मान अली, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना