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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बना रहीं पीपीई किट, 100 तैयार
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विकास भवन में पीपीई किट दिखाते पीडी।
- फोटो : KHALILABAD
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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बना रहीं पीपीई किट, 100 तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। कोरोना से बचाव में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही है। महिलाओं ने पीपीई किट बनाने का कार्य शुरू कर दिया है।
डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद यादव ने बताया कि जनपद में 1495 स्वयं सहायता समूह हैं। प्रत्येक समूह में दस महिलाएं जुड़ी हैं। कोरोना वायरस से बचाव में पहले करीब 50 समूह मास्क, सैनिटाइजर और फिनायल बनाने का काम शुुरू किए। अब एक लाख आठ हजार मास्क, 5000 शीशी सैनिटाइजर और 1000 लीटर फिनायल बना चुकी हैं, जो बाजार दर से सस्ते है। इधर कमिश्नर और डीएम ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से पीपीई किट बनवाए जाने की इच्छा जताई। उसके बाद हरदी गांव की मुस्कान और साई स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पीपीई किट बनाने को तैयार हो गईं। गोरखपुर से संपर्क करके पॉली पापलीन कपड़े की व्यवस्था कराई गई। महिलाओं ने एक सेट पीपीई किट को खोल कर उसकी कटिंग और सिलाई को समझा और फिर नया पीपीई किट सिल कर तैयार की। अब तक 100 पीपीई किट तैयार कर चुकी हैं। एक पीपीई किट तैयार करने में करीब 300 रुपये की लागत आई है। उसे 350 रुपये में बेचा जाएगा। स्वास्थ्य कर्मी और सफाई कर्मी को पीपीई किट उपलब्ध कराया जाएगा। डीएम रवीश गुप्त ने पीपीई किट बनाने वाले स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की तारीफ की। इस काम को बड़े स्तर पर किए जाने की जरूरत जताई।
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अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। कोरोना से बचाव में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रही है। महिलाओं ने पीपीई किट बनाने का कार्य शुरू कर दिया है।
डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद यादव ने बताया कि जनपद में 1495 स्वयं सहायता समूह हैं। प्रत्येक समूह में दस महिलाएं जुड़ी हैं। कोरोना वायरस से बचाव में पहले करीब 50 समूह मास्क, सैनिटाइजर और फिनायल बनाने का काम शुुरू किए। अब एक लाख आठ हजार मास्क, 5000 शीशी सैनिटाइजर और 1000 लीटर फिनायल बना चुकी हैं, जो बाजार दर से सस्ते है। इधर कमिश्नर और डीएम ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से पीपीई किट बनवाए जाने की इच्छा जताई। उसके बाद हरदी गांव की मुस्कान और साई स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पीपीई किट बनाने को तैयार हो गईं। गोरखपुर से संपर्क करके पॉली पापलीन कपड़े की व्यवस्था कराई गई। महिलाओं ने एक सेट पीपीई किट को खोल कर उसकी कटिंग और सिलाई को समझा और फिर नया पीपीई किट सिल कर तैयार की। अब तक 100 पीपीई किट तैयार कर चुकी हैं। एक पीपीई किट तैयार करने में करीब 300 रुपये की लागत आई है। उसे 350 रुपये में बेचा जाएगा। स्वास्थ्य कर्मी और सफाई कर्मी को पीपीई किट उपलब्ध कराया जाएगा। डीएम रवीश गुप्त ने पीपीई किट बनाने वाले स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की तारीफ की। इस काम को बड़े स्तर पर किए जाने की जरूरत जताई।