फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sant Kabir Nagar News ›   wel was dangerous

खतरे को दावत दे रहे कुएं, जिम्मेदार नहीं ले रहे सुध

Tue, 22 Feb 2022 10:14 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Feb 2022 10:14 PM IST
विज्ञापन
wel was dangerous
खतरे को दावत दे रहे कुएं, जिम्मेदार नहीं ले रहे सुध
विज्ञापन

जीर्ण-शीर्ण हाल में गांवों में पड़े हैं, शुभ कार्य में महिलाओं और बच्चों की जुटती है भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। विकास खंड हैंसर बाजार और पौली के गांवों में तमाम कुएं ऐसे हैं, जो हादसे को दावत दे रहे हैं। जमीन के बराबर हुए इन कुओं की मरम्मत किए जाने की मांग गांव के लोग जिम्मेदारों से कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार खामोश हैं। जबकि शुभ कार्य के दौरान रस्म अदायगी के लिए कुओं पर महिलाएं व बच्चे जुटते हैं।
कभी गांवों में पानी पीने का साधन कुएं ही हुआ करते थे, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ पानी पीने के साधन भी बदलते गए। कुओं की जगह अब हैंडपंप, इंडिया मार्का हैंडपंप और ओवरहेड टैंक पानी के स्रोत हो गए हैं। जिससे कुओं की तरफ से लोगों का ध्यान हट गया और कुएं जीर्णशीर्ण हाल में पहुंच गए। आलम यह है कि कुएं जमीन के समतल में पहुंच गए हैं। गांव में लोग अपना मकान भी ऊंचा कराते गए। जमीन के बराबर हुए कुओं में पशुओं और जानवरों के साथ बच्चों, बुजुर्ग के गिरने का खतरा भी बन गया, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। अभी हाल में ही कुशीनगर जिले में कुएं में गिरने से 13 लोगों की जान चली गई थी। जबकि कई लोग घायल हो गए थे। इस घटना से भी जिम्मेदार सबक नहीं ले रहे हैं। एडीओ पंचायत गजानन पाल ने बताया कि कुओं की मरम्मत कराए जाने का आदेश ग्राम पंचायत अधिकारियों को पहले से ही दे दिया गया है। राज्य वित्त के मद से इस कार्य के लिए धन खर्च किया जा सकता है। गांव में खुले पड़े कुओं को ऊंचा कराकर ढक्कन लगाए जाने की जरूरत है। जिससे किसी तरह का कोई खतरा न हो।
विज्ञापन

लोगों ने कहा, कुओं का महत्व पर सुरक्षा जरूरी
कुशीनगर में घटित घटना से प्रशासन और प्रतिनिधि को सबक लेनी चाहिए। कुंओं का अभी भी महत्व है। शादी-विवाह के दौरान महिलाओं व बच्चों की भीड़ कुओं पर जुटती है। गांव में बनाए गए कुएं काफी पुराने और जर्जर हो गए हैं। ऐसे कुएं खतरे को दावत दे रहे हैं। इनकी मरम्मत कराया जाना अति आवश्यक है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- प्रदीप कुमार अग्रहरि, डेबरी
गांव में खोदे गए कुएं कभी गांव वालों के लिए वरदान थे, लेकिन समय के साथ उनका महत्व खत्म हो गया। अब कुएं का पानी कोई नहीं पीता है। मरम्मत के अभाव में कुएं जर्जर होकर खतरे की घंटी बने हुए हैं। कुओं को ऊंचा कराकर सुरिक्षत किया जाना जरूरी है। प्रधान और सचिव को इस तरफ ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
--उदयभान यादव, आगापुर गुलरिहा,
गांव में पानी पीने के लिए और सीवान में सिंचाई के लिए कुओं की खुदाई की गई थी। कुएं अब प्रयोग में नहीं लाए जा रहे हैं। जमीन के बराबर हुए कुएं खतरे के संकेत दे रहे हैं, लेकिन इस ओर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं जा रहा है। कुओं का सुंदरीकरण और ऊंचीकरण कराया जाना आवश्यक है।
- अयोध्या प्रसाद, धनघटा
गांव में खोदे गए कुएं हो या सीवान में हर जगह कुओं से खतरा उत्पन्न हो गया है। कुओं का जीर्णोद्घार कराया जाना अति आवश्यक है। कुशीनगर की घटना से सबक लेने की जरूरत है। जिम्मेदारों को चाहिए कि इस दिशा में सार्थक कदम उठाएं। जिससे गांवों में खतरा खत्म हो जाए।

- आनंद स्वरूप, आगापुर गुलरिया,
गांवों में स्थापित पुराने कुओं की मरम्मत ग्राम पंचायतें करा सकती हैं। इसके लिए निर्देश पत्र जारी किया जाएगा। एडीओ पंचायत और सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि जहां कहीं कुएं खतरा बन गए हो, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित कराएं।
- राजेंद्र प्रसाद, डीपीआरओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed