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घरों में पानी, बांध और छतों पर गुजारा कर रहे लोग
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धनघटा तहसील क्षेत्र के सियर कला गांव के लोग छत पर गुजर-बसर कर रहे हैं।
- फोटो : KHALILABAD
घरों में पानी, बांध और छतों पर गुजारा कर रहे लोग
- घाघरा ने धनघटा तहसील क्षेत्र के 22 गांवों में मचाई तबाही
संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से आवागमन में हो रही दिक्कत
धनघटा। घाघरा नदी और एमबीडी बांध के बीच बसे धनघटा तहसील क्षेत्र के 22 गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। इन गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। बुधवार को नदी का पानी और अधिक बढ़ जाने के कारण कई गांव के लोगों के घरों में पानी घुस गया। अपना घर छोड़कर कुछ लोग एमबीडी बांध पर शरण लेने को विवश हुए तो कुछ छत के ऊपर गुजारा करने को मजबूर हैं। संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने के कारण लोग पानी में चलकर आ जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से लगाई गई नावों को भी लोग नाकाफी बता रहे हैं।
एक सप्ताह से घाघरा का जलस्तर बढ़कर बुधवार शाम 79.650 मीटर पर पहुंच गया। नदी अब बिडहर घाट पर खतरे के निशान से मात्र 20 सेंटीमीटर नीचे रह गई है। नदी के बाढ़ से पश्चिम में आगापुर गुलरिहा, खाले पुरवा, केवटाही टोला, पटौवा, धमचिया, सीयर कला, दौलतपुर, कंचनपुर, गुनवतिया, चकदहा, सरैया, खरैया, ढोल बजा, सुअरहा, गायघाट दक्षिणी, सियाराम अधीन सिंह, करनपुर समेत 22 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। लोगों के घरों में कमर से ऊपर तक पानी हो जाने के कारण लोग घर छोड़कर इधर-उधर शरण लेने को विवश हैं। बुधवार को सीयर कला, दौलतपुर, कंचनपुर, गुनवतिया, चकदहा, सरैया, खड़कपुर निवासी रामरूप, जय श्री, सीताराम, भगवान दास, राम निहोर, सुभावती आदि लोग घर से पलायन करके एमबीडी बांध पर पहुंचे तो उनकी आंखों में आंसू भर आए थे। पीड़ितों का कहना है कि एक सप्ताह से बाढ़ का दंश यहां के लोग झेल रहे हैं। अब घर छोड़ना भी मजबूरी हो गई है। यहां पर कुछ दिनों पहले हवाई सर्वेक्षण करके प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हाल जाने थे, डीएम और विधायक भी आए थे, लेकिन अभी तक नाव के अलावा शासन-प्रशासन खाने-पीने के लिए खाद्यान्न की व्यवस्था नहीं कर सका। कहने के लिए प्रशासन बाढ़ राहत केंद्र तिघरा में बनाए जाने की बात कर रहा है, लेकिन वहां कोई इंतजाम नहीं है। दर्जनभर से अधिक गांवों के लोग बाढ़ से पीड़ित हैं। सबसे बड़ी समस्या पशुओं के चारा की है। बांध पर उगी घास खाकर और नदी का पानी पीकर पशु तो गुजारा कर रहे हैं, लेकिन लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। छोटे-छोटे बच्चे भूख से तड़पते हुए जब रोटी की मांग कर रहे तो कलेजा फट जा रहा है। ढोल बजाकर गांव निवासी रामनिवास के परिवार के लोग छत पर रहकर गुजारा कर रहे हैं। घाघरा नदी की बाढ़ से सर्वाधिक तबाही गायघाट दक्षिणी ग्राम पंचायत में रहने वाले 14 राजस्व गांव के लोगों को झेलनी पड़ रही है। पीड़ितों का कहना है कि पहले जब चुनाव करीब होता था, तो कई दलों के नेता यहां आकर कुछ न कुछ सामान वितरित किया करते थे, लेकिन इस वर्ष तो कोई सामाजिक संगठन संकट के समय काम आने वाला है और न ही किसी पार्टी का नेता।
इंसेट
40 नाव बाढ़ से प्रभावित गांवों में लगाई जा चुकी है। खाद्यान्न समेत जरूरत के अन्य सामानों की डिमांड की गई है। अनाज उपलब्ध होने के बाद तुरंत जरूरतमंदों में वितरित कराया जाएगा। बाढ़ पीड़ितों के लिए बाढ़ शरणालय भी स्थापित कर दिया गया है।
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रत्नेश तिवारी, तहसीलदार
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- घाघरा ने धनघटा तहसील क्षेत्र के 22 गांवों में मचाई तबाही
संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से आवागमन में हो रही दिक्कत
धनघटा। घाघरा नदी और एमबीडी बांध के बीच बसे धनघटा तहसील क्षेत्र के 22 गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। इन गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। बुधवार को नदी का पानी और अधिक बढ़ जाने के कारण कई गांव के लोगों के घरों में पानी घुस गया। अपना घर छोड़कर कुछ लोग एमबीडी बांध पर शरण लेने को विवश हुए तो कुछ छत के ऊपर गुजारा करने को मजबूर हैं। संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने के कारण लोग पानी में चलकर आ जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से लगाई गई नावों को भी लोग नाकाफी बता रहे हैं।
एक सप्ताह से घाघरा का जलस्तर बढ़कर बुधवार शाम 79.650 मीटर पर पहुंच गया। नदी अब बिडहर घाट पर खतरे के निशान से मात्र 20 सेंटीमीटर नीचे रह गई है। नदी के बाढ़ से पश्चिम में आगापुर गुलरिहा, खाले पुरवा, केवटाही टोला, पटौवा, धमचिया, सीयर कला, दौलतपुर, कंचनपुर, गुनवतिया, चकदहा, सरैया, खरैया, ढोल बजा, सुअरहा, गायघाट दक्षिणी, सियाराम अधीन सिंह, करनपुर समेत 22 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। लोगों के घरों में कमर से ऊपर तक पानी हो जाने के कारण लोग घर छोड़कर इधर-उधर शरण लेने को विवश हैं। बुधवार को सीयर कला, दौलतपुर, कंचनपुर, गुनवतिया, चकदहा, सरैया, खड़कपुर निवासी रामरूप, जय श्री, सीताराम, भगवान दास, राम निहोर, सुभावती आदि लोग घर से पलायन करके एमबीडी बांध पर पहुंचे तो उनकी आंखों में आंसू भर आए थे। पीड़ितों का कहना है कि एक सप्ताह से बाढ़ का दंश यहां के लोग झेल रहे हैं। अब घर छोड़ना भी मजबूरी हो गई है। यहां पर कुछ दिनों पहले हवाई सर्वेक्षण करके प्रदेश के मुख्यमंत्री भी हाल जाने थे, डीएम और विधायक भी आए थे, लेकिन अभी तक नाव के अलावा शासन-प्रशासन खाने-पीने के लिए खाद्यान्न की व्यवस्था नहीं कर सका। कहने के लिए प्रशासन बाढ़ राहत केंद्र तिघरा में बनाए जाने की बात कर रहा है, लेकिन वहां कोई इंतजाम नहीं है। दर्जनभर से अधिक गांवों के लोग बाढ़ से पीड़ित हैं। सबसे बड़ी समस्या पशुओं के चारा की है। बांध पर उगी घास खाकर और नदी का पानी पीकर पशु तो गुजारा कर रहे हैं, लेकिन लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। छोटे-छोटे बच्चे भूख से तड़पते हुए जब रोटी की मांग कर रहे तो कलेजा फट जा रहा है। ढोल बजाकर गांव निवासी रामनिवास के परिवार के लोग छत पर रहकर गुजारा कर रहे हैं। घाघरा नदी की बाढ़ से सर्वाधिक तबाही गायघाट दक्षिणी ग्राम पंचायत में रहने वाले 14 राजस्व गांव के लोगों को झेलनी पड़ रही है। पीड़ितों का कहना है कि पहले जब चुनाव करीब होता था, तो कई दलों के नेता यहां आकर कुछ न कुछ सामान वितरित किया करते थे, लेकिन इस वर्ष तो कोई सामाजिक संगठन संकट के समय काम आने वाला है और न ही किसी पार्टी का नेता।
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40 नाव बाढ़ से प्रभावित गांवों में लगाई जा चुकी है। खाद्यान्न समेत जरूरत के अन्य सामानों की डिमांड की गई है। अनाज उपलब्ध होने के बाद तुरंत जरूरतमंदों में वितरित कराया जाएगा। बाढ़ पीड़ितों के लिए बाढ़ शरणालय भी स्थापित कर दिया गया है।
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रत्नेश तिवारी, तहसीलदार