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Sant Kabir Nagar News: पुल निर्माण में गुणवत्ताविहीन सामग्री का प्रयोग करने का आरोप, ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
Fri, 16 May 2025 11:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 16 May 2025 11:35 PM IST
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पुल निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाकर प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण
बेलहर। बेलहर क्षेत्र के बुद्धा नाले के सिअरहवा घाट पर बन रहे पुल के निर्माण में मानकों का ध्यान न देने का आरोप लगाते हुए गांव के लोगों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप था कि इस पुल के निर्माण में गुणवत्ताविहीन सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने पुल के गुणवत्ता के जांच की मांग की।
ग्रामीण जीवन प्रसाद अग्रहरि, सुभाष, विजय, कुमार, संजय कुमार, सोनू निषाद, अवध राज, आबिदअली, बाबूराम, भगेलू, फूलचंद आदि ने आरोप लगाया कि इस पुल का निर्माण में 4.51 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ठेकेदार द्वारा पुल का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन इसमें गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। लापरवाही बरती जा रही है, मोटे सरिया के जगह पतले सरिया का उपयोग किया जा रहा है।
यही नहीं बालू भी मानक के अनुसार नहीं लगाया जा रहा है। जब मोटा सरिया का उपयोग होता तो पुल का निर्माण सही ढंग से होता और कई वर्षों तक चलता। उक्त निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इसके निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। पांच पाए के इस पुल के तीन पिलर पर काम चल रहा है। जबकि दो पाए जो वन विभाग की जमीन पर बनने हैं, उसपर काम रुका हुआ है।
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वन विभाग की जमीन में रूका हुआ है काम
वन क्षेत्राधिकारी टीएन त्रिपाठी ने बताया कि अभी तक जो जमीन वन विभाग को मिलना था, वह जमीन वन विभाग के नाम नहीं की गई है। वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने आगे का काम रोक दिया है। जबकि नदी के अन्दर के पिलर का निर्माण जारी है। जब तक वन विभाग को जमीन के बदले जमीन नहीं मिलेगी, कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
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कोट
पुल को मानक अनुरूप ही बन रहा है। अगर मानक विहीन बन रहा होगा तो जांच करके मानक के अनुरूप ही निर्माण कराया जाएगा। वन विभाग के रोकने के कारण चार सालों से पुल का निर्माण नहीं हो पाया था। अब इसपर काम शुरू किया गया है। मानक की नियमित तौर पर जांच होती है।
-सुरेश कुमार, जेई पीडब्ल्यूडी
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ग्रामीण जीवन प्रसाद अग्रहरि, सुभाष, विजय, कुमार, संजय कुमार, सोनू निषाद, अवध राज, आबिदअली, बाबूराम, भगेलू, फूलचंद आदि ने आरोप लगाया कि इस पुल का निर्माण में 4.51 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ठेकेदार द्वारा पुल का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन इसमें गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। लापरवाही बरती जा रही है, मोटे सरिया के जगह पतले सरिया का उपयोग किया जा रहा है।
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यही नहीं बालू भी मानक के अनुसार नहीं लगाया जा रहा है। जब मोटा सरिया का उपयोग होता तो पुल का निर्माण सही ढंग से होता और कई वर्षों तक चलता। उक्त निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इसके निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। पांच पाए के इस पुल के तीन पिलर पर काम चल रहा है। जबकि दो पाए जो वन विभाग की जमीन पर बनने हैं, उसपर काम रुका हुआ है।
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वन विभाग की जमीन में रूका हुआ है काम
वन क्षेत्राधिकारी टीएन त्रिपाठी ने बताया कि अभी तक जो जमीन वन विभाग को मिलना था, वह जमीन वन विभाग के नाम नहीं की गई है। वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने आगे का काम रोक दिया है। जबकि नदी के अन्दर के पिलर का निर्माण जारी है। जब तक वन विभाग को जमीन के बदले जमीन नहीं मिलेगी, कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
कोट
पुल को मानक अनुरूप ही बन रहा है। अगर मानक विहीन बन रहा होगा तो जांच करके मानक के अनुरूप ही निर्माण कराया जाएगा। वन विभाग के रोकने के कारण चार सालों से पुल का निर्माण नहीं हो पाया था। अब इसपर काम शुरू किया गया है। मानक की नियमित तौर पर जांच होती है।
-सुरेश कुमार, जेई पीडब्ल्यूडी