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Sant Kabir Nagar News: तालाब के पास मृत मिले दो राष्ट्रीय पक्षी मोर, जहरखुरानी की आशंका
Sun, 04 May 2025 11:54 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 04 May 2025 11:54 PM IST
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मृत पड़ा हुआ मोर तथा उसकी चोच के पास रखा मौके पर मिला गेहूं ।
बखिरा। बखिरा थानाक्षेत्र के जसवल भरवलिया गांव में स्थित एक तालाब के पास राष्ट्रीय पक्षी मोर के दो शव संदिग्ध अवस्था में पाए गए। घटना की जानकारी ग्रामीणों ने वन विभाग की टीम को दी तो मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मोर के दोनों शवों को अपने कब्जे में ले लिया तथा उनको पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
जसवल भरवलिया गांव में स्थित खाद्यान्न गोदाम के निकट स्थित पोखरा और भीटा पर स्थित झाड़ के बीच तकरीबन दो दर्जन की संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोरों ने अपना बसेरा बनाया है। यह मोर यहां पर स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। रविवार की सुबह जब गांव के लोग तालाब के पास अपनी भैसों को चराने के लिए गए तो देखा कि पोखरे के निकट दो मोर मृत अवस्था में पड़े मिले। उनसे कुछ ही दूरी पर एक जलमुर्गी भी मृत अवस्था में देखी गई।
मृत पड़े इन मोरों के अगल-बगल गेहूं के कुछ दाने भी बिखरे पड़े थे। ग्रामीणों ने इस बात की जानकारी वन विभाग को दी। इसके बाद बघौली ब्लाॅक क्षेत्र के वन दरोगा शशिभूषण शर्मा के साथ बखिरा पक्षी बिहार के कर्मचारी दिलीप तिवारी, हनुमान व विष्णु तथा अन्य लोग मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम ने दोनों मोरों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जिला पशु चिकित्सालय पर दो पशु चिकित्सकों के पैनल ने इन शवों का पोस्टमार्टम किया।
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राष्ट्रीय पक्षी के कम होने पर लोगों ने जताई चिंता
बखिरा पक्षी बिहार के बगल में स्थित इस क्षेत्र के तालाब और झाड़ वाले टीले पर दर्जनों की संख्या में मोर रहते हैं। धीरे-धीरे यह मोर गायब होते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने इन पक्षियों के लगातार गायब होने को लेकर आशंका जताई है कि इन मोरों की तस्करी की जा रही है। कबीरा फाउंडेशन के सत्येंद्र तिवारी ने कहा कि मोर राष्ट्रीय पक्षी है। इनके संरक्षण के लिए प्रशासन को व्यवस्था करनी चाहिए, लेकिन मोरों की घटती संख्या को लेकर वन विभाग संवेदनशील नहीं है। इसकी जांच की जानी चाहिए।
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दो चिकित्सकों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
इन मोरों का दो चिकित्सकों के पैनल ने जिला पशु चिकित्सालय पर पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों में बघौली के पशु चिकित्सक डॉ. दिनेश वर्मा तथा विसौवा के चिकित्सक डॉ श्रवण कुमार के साथ पशुधन प्रसार अधिकारी कृष्ण गोपाल राय शामिल थे। तकरीबन आधे घंटे में चिकित्सकों ने बारीकी से इसका पोस्टमार्टम किया।
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पेट में मिले गेहूं के दाने और काली गोलियां
सूत्रों की मानें तो इन मोरों के पेट में पांच-सात की संख्या में गेहूं के दाने पाए गए हैं। इसके साथ ही काली गोलियां भी पाई गई हैं। मोरों का पेट सिकुड़ गया था। इसके साथ ही कई लक्षण भी मिले हैं। उनके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं पाए गए हैं। पोस्टमार्टम में मिले लक्षणों के वृहद विश्लेषण के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।
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मोर के शिकार पर आठ साल कारावास की सजा का प्रावधान
मोर शेड्यूल वन के भाग दो में संरक्षित पक्षी है। यह सबसे उच्च श्रेणी के संरक्षित पक्षियों में आता है। मोर का शिकार या तस्करी करने पर अगर अपराध घोषित हो जाता है तो आठ साल तक की कैद का प्रावधान है।
कोट
मृत मोरों का पोस्टमार्टम कराया गया है। इसके बाद इनको सम्मान के साथ दफन कर दिया गया। इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट बनाई जाएगी। रिपोर्ट में अगर उनका शिकार या उनके साथ क्रूरता की बात सामने आएगी तो केस दर्ज कराया जाएगा।
-इंद्रभान सोनकर, वन क्षेत्राधिकारी, खलीलाबाद
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जसवल भरवलिया गांव में स्थित खाद्यान्न गोदाम के निकट स्थित पोखरा और भीटा पर स्थित झाड़ के बीच तकरीबन दो दर्जन की संख्या में राष्ट्रीय पक्षी मोरों ने अपना बसेरा बनाया है। यह मोर यहां पर स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। रविवार की सुबह जब गांव के लोग तालाब के पास अपनी भैसों को चराने के लिए गए तो देखा कि पोखरे के निकट दो मोर मृत अवस्था में पड़े मिले। उनसे कुछ ही दूरी पर एक जलमुर्गी भी मृत अवस्था में देखी गई।
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मृत पड़े इन मोरों के अगल-बगल गेहूं के कुछ दाने भी बिखरे पड़े थे। ग्रामीणों ने इस बात की जानकारी वन विभाग को दी। इसके बाद बघौली ब्लाॅक क्षेत्र के वन दरोगा शशिभूषण शर्मा के साथ बखिरा पक्षी बिहार के कर्मचारी दिलीप तिवारी, हनुमान व विष्णु तथा अन्य लोग मौके पर पहुंचे। वन विभाग की टीम ने दोनों मोरों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जिला पशु चिकित्सालय पर दो पशु चिकित्सकों के पैनल ने इन शवों का पोस्टमार्टम किया।
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राष्ट्रीय पक्षी के कम होने पर लोगों ने जताई चिंता
बखिरा पक्षी बिहार के बगल में स्थित इस क्षेत्र के तालाब और झाड़ वाले टीले पर दर्जनों की संख्या में मोर रहते हैं। धीरे-धीरे यह मोर गायब होते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने इन पक्षियों के लगातार गायब होने को लेकर आशंका जताई है कि इन मोरों की तस्करी की जा रही है। कबीरा फाउंडेशन के सत्येंद्र तिवारी ने कहा कि मोर राष्ट्रीय पक्षी है। इनके संरक्षण के लिए प्रशासन को व्यवस्था करनी चाहिए, लेकिन मोरों की घटती संख्या को लेकर वन विभाग संवेदनशील नहीं है। इसकी जांच की जानी चाहिए।
दो चिकित्सकों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम
इन मोरों का दो चिकित्सकों के पैनल ने जिला पशु चिकित्सालय पर पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों में बघौली के पशु चिकित्सक डॉ. दिनेश वर्मा तथा विसौवा के चिकित्सक डॉ श्रवण कुमार के साथ पशुधन प्रसार अधिकारी कृष्ण गोपाल राय शामिल थे। तकरीबन आधे घंटे में चिकित्सकों ने बारीकी से इसका पोस्टमार्टम किया।
पेट में मिले गेहूं के दाने और काली गोलियां
सूत्रों की मानें तो इन मोरों के पेट में पांच-सात की संख्या में गेहूं के दाने पाए गए हैं। इसके साथ ही काली गोलियां भी पाई गई हैं। मोरों का पेट सिकुड़ गया था। इसके साथ ही कई लक्षण भी मिले हैं। उनके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं पाए गए हैं। पोस्टमार्टम में मिले लक्षणों के वृहद विश्लेषण के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।
मोर के शिकार पर आठ साल कारावास की सजा का प्रावधान
मोर शेड्यूल वन के भाग दो में संरक्षित पक्षी है। यह सबसे उच्च श्रेणी के संरक्षित पक्षियों में आता है। मोर का शिकार या तस्करी करने पर अगर अपराध घोषित हो जाता है तो आठ साल तक की कैद का प्रावधान है।
कोट
मृत मोरों का पोस्टमार्टम कराया गया है। इसके बाद इनको सम्मान के साथ दफन कर दिया गया। इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट बनाई जाएगी। रिपोर्ट में अगर उनका शिकार या उनके साथ क्रूरता की बात सामने आएगी तो केस दर्ज कराया जाएगा।
-इंद्रभान सोनकर, वन क्षेत्राधिकारी, खलीलाबाद