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Sant Kabir Nagar News: विधि विधान से सम्पन्न हुआ तुलसी सालिग्राम विवाह
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- महुली कस्बे में देवोत्थान एकादशी पर्व पर आयोजित हुआ कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। महुली कस्बे में बृहस्पतिवार को देवोत्थान एकादशी पर्व पर हर्षोल्लास के साथ तुलसी विवाह का आयोजन किया गया। इस दौरान मंडप में वर पूजा, कन्यादान सब कुछ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित हुआ। महिलाओं ने विवाह गीत और भजन गाया। उसके उपरांत प्रसाद वितरण हुआ।
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि दिन बृहस्पतिवार को महुली कस्बा निवासी हरिवंश यादव के घर शाम के समय तुलसी चौरा के पास गन्ने का भव्य मंडप बनाकर उसमें साक्षात नारायण स्वरूप सालिग्राम की मूर्ति रखी गई। मंडप में वर पूजा, कन्यादान, हवन सब कुछ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाया गया। इस विवाह में सालिग्राम वर और तुलसी कन्या की भूमिका में रही। तुलसी के पौधे को यानी लड़की को लाल चुनरी-ओढ़नी ओढ़ाया गया था। तुलसी विवाह में सोलह शृंगार के सभी सामान चढ़ावे के लिए रखा गया था।
महंत गौतम दास ने बताया कि पद्मपुराण के पौराणिक कथा अनुसार राजा जालंधर की पत्नी वृंदा के श्राप से भगवान विष्णु पत्थर बन गए थे। जिस कारणवश प्रभु को सालिग्राम भी कहा जाता है। भक्तगण इस रूप में भी उनकी पूजा करते हैं। इसी श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु को अपने सालिग्राम स्वरुप में तुलसी से विवाह करना पड़ा था। उसी समय से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुलसी विवाह का उत्सव मनाया जाता है। हिंदुओं के संस्कार अनुसार तुलसी को देवी रूप में हर घर में पूजा जाता है। तुलसी की नियमित पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति तथा पुण्य फल में वृद्धि मिलती है। तुलसी बहुत पवित्र मानी जाती है। तुलसी विवाह से पूर्व बरात निकाली गई।
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इस अवसर पर सरिता यादव, विंध्यवासिनी, निकिता, गीता, बबीता, मोनी, कविता, उमा, रमा, श्रेया, नीरज यादव, रामनाथ यादव, नागेंद्र यादव, शेषनाथ यादव, शिवांश यादव, पडोही, विनीत, धीरेंद्र पांडेय, विवेक यादव, घनश्याम द्विवेदी, छोटू यादव, गोलू यादव, शुभ यादव, हरिवंश यादव आदि मौजूद रहे। इसी तरह खलीलाबाद के अचकवापुर में कृष्ण मोहन त्रिपाठी के घर पर तुलसी विवाह का आयोजन हुआ। यहां पर पंडित उमेश दत्त पांडेय, उर्मिला त्रिपाठी, पूर्व सभासद रुद्र नाथ मिश्र, सुनील त्रिपाठी, बालमुकुंद राय, छोटे लाल पाठक, दुलारी देवी, ममता त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। महुली कस्बे में बृहस्पतिवार को देवोत्थान एकादशी पर्व पर हर्षोल्लास के साथ तुलसी विवाह का आयोजन किया गया। इस दौरान मंडप में वर पूजा, कन्यादान सब कुछ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित हुआ। महिलाओं ने विवाह गीत और भजन गाया। उसके उपरांत प्रसाद वितरण हुआ।
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि दिन बृहस्पतिवार को महुली कस्बा निवासी हरिवंश यादव के घर शाम के समय तुलसी चौरा के पास गन्ने का भव्य मंडप बनाकर उसमें साक्षात नारायण स्वरूप सालिग्राम की मूर्ति रखी गई। मंडप में वर पूजा, कन्यादान, हवन सब कुछ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाया गया। इस विवाह में सालिग्राम वर और तुलसी कन्या की भूमिका में रही। तुलसी के पौधे को यानी लड़की को लाल चुनरी-ओढ़नी ओढ़ाया गया था। तुलसी विवाह में सोलह शृंगार के सभी सामान चढ़ावे के लिए रखा गया था।
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महंत गौतम दास ने बताया कि पद्मपुराण के पौराणिक कथा अनुसार राजा जालंधर की पत्नी वृंदा के श्राप से भगवान विष्णु पत्थर बन गए थे। जिस कारणवश प्रभु को सालिग्राम भी कहा जाता है। भक्तगण इस रूप में भी उनकी पूजा करते हैं। इसी श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु को अपने सालिग्राम स्वरुप में तुलसी से विवाह करना पड़ा था। उसी समय से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को तुलसी विवाह का उत्सव मनाया जाता है। हिंदुओं के संस्कार अनुसार तुलसी को देवी रूप में हर घर में पूजा जाता है। तुलसी की नियमित पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति तथा पुण्य फल में वृद्धि मिलती है। तुलसी बहुत पवित्र मानी जाती है। तुलसी विवाह से पूर्व बरात निकाली गई।
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इस अवसर पर सरिता यादव, विंध्यवासिनी, निकिता, गीता, बबीता, मोनी, कविता, उमा, रमा, श्रेया, नीरज यादव, रामनाथ यादव, नागेंद्र यादव, शेषनाथ यादव, शिवांश यादव, पडोही, विनीत, धीरेंद्र पांडेय, विवेक यादव, घनश्याम द्विवेदी, छोटू यादव, गोलू यादव, शुभ यादव, हरिवंश यादव आदि मौजूद रहे। इसी तरह खलीलाबाद के अचकवापुर में कृष्ण मोहन त्रिपाठी के घर पर तुलसी विवाह का आयोजन हुआ। यहां पर पंडित उमेश दत्त पांडेय, उर्मिला त्रिपाठी, पूर्व सभासद रुद्र नाथ मिश्र, सुनील त्रिपाठी, बालमुकुंद राय, छोटे लाल पाठक, दुलारी देवी, ममता त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।