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गोलमाल
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सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कार्य अधूरा
धनघटा (संतकबीरनगर)। गांव को साफ सुथरा बनाए रखने के उद्देश्य से पहले घर-घर शौचालय बनवाए गए। उसके बाद गांव-गांव सामुदायिक शौचालय का निर्माण शासन की ओर से प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। लेकिन आलम यह है कि सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य को पूर्ण कराने की जिम्मेदारी उठाने वाले लोगों के रुचि नहीं लेने से शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही। लिहाजा विकास खंड हैंसर बाजार और पौली में अभी भी कई गांवों में सामुदायिक शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं। जबकि उनका प्रयोग होना दिखाकर साफ-सफाई और देखरेख के मद में सरकारी रकम खर्च की जा रही है। जिम्मेदार इससे अनजान हैं।
विकास खंड हैंसर बाजार में 86 सामुदायिक शौचालय बनाए जाने का लक्ष्य है। जिनमें से ग्राम पंचायत हैसर, संठी, मुंडेरा शुक्ल, गायघाट, रामपुर में अभी भी जमीन न मिलने के कारण सामुदायिक शौचालय का निर्माण शुरू नही हो पाया। वही अशरफपुर, बालमपुर, छितौनी समेत 18 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय अपूर्ण हैं। सूत्र बताते हैं कि शौचालयों की देखरेख व साफ सफाई के लिए ग्राम पंचायतों में गठित स्वयं सहायता समूह के खाते में रुपये भेज गए हैं। अपूर्ण पड़े सामुदायिक शौचालय वाले गांव में भेजी गई रकम का बंदरबांट किया जा रहा है। जिन गांव में सामुदायिक शौचालय कथित रूप से बनकर तैयार भी हो गए हैं, उनका इस्तेमाल गांव के लोग नहीं कर रहे हैं। इसी तरह विकास खंड पौली में 54 सामुदायिक शौचालय के लक्ष्य के अनुरूप सात सामुदायिक शौचालय अपूर्ण पड़े हुए हैं। पचरा, दुलमपुर, पारासिर, पारा हरगोविंद, मकदूम पुर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय अपूर्ण भले ही है, लेकिन उनके भी साफ सफाई पर धन व्यय करके करके बंदरबांट किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। गांव वालों का कहना है कि सामुदायिक शौचालय बेमतलब साबित हो रहे हैं।
सामुदायिक शौचालय हो या पंचायत भवन का निर्माण सब पर सरकारी धन का दुरुपयोग खुलेआम किया जा रहा है। एडीओ पंचायत गजानन पाल ने बताया कि जिन गांव में सामुदायिक शौचालय प्रयोग किए जा रहे हैं, उन्हीं गांव में साफ- सफाई के लिए समूह के लोगों को मानदेय भेजा गया है। अपूर्ण पड़े शौचालय वाले गांव में भेजी रकम के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
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सीडीओ सुरेद्र नाथ श्रीवास्तव ने बताया कि अधूरे शौचालय को पूर्ण कराए जाने का निर्देश दिया गया है। बगैर उपायोग वाले शौचालयों की साफ-सफाई और देखरेख पर धन खर्च होने की वैसे तो जानकारी नहीं है लेकिन यदि ऐसा है तो मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में मामला सही पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
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धनघटा (संतकबीरनगर)। गांव को साफ सुथरा बनाए रखने के उद्देश्य से पहले घर-घर शौचालय बनवाए गए। उसके बाद गांव-गांव सामुदायिक शौचालय का निर्माण शासन की ओर से प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है। लेकिन आलम यह है कि सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य को पूर्ण कराने की जिम्मेदारी उठाने वाले लोगों के रुचि नहीं लेने से शासन की मंशा पूरी नहीं हो पा रही। लिहाजा विकास खंड हैंसर बाजार और पौली में अभी भी कई गांवों में सामुदायिक शौचालय अधूरे पड़े हुए हैं। जबकि उनका प्रयोग होना दिखाकर साफ-सफाई और देखरेख के मद में सरकारी रकम खर्च की जा रही है। जिम्मेदार इससे अनजान हैं।
विकास खंड हैंसर बाजार में 86 सामुदायिक शौचालय बनाए जाने का लक्ष्य है। जिनमें से ग्राम पंचायत हैसर, संठी, मुंडेरा शुक्ल, गायघाट, रामपुर में अभी भी जमीन न मिलने के कारण सामुदायिक शौचालय का निर्माण शुरू नही हो पाया। वही अशरफपुर, बालमपुर, छितौनी समेत 18 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय अपूर्ण हैं। सूत्र बताते हैं कि शौचालयों की देखरेख व साफ सफाई के लिए ग्राम पंचायतों में गठित स्वयं सहायता समूह के खाते में रुपये भेज गए हैं। अपूर्ण पड़े सामुदायिक शौचालय वाले गांव में भेजी गई रकम का बंदरबांट किया जा रहा है। जिन गांव में सामुदायिक शौचालय कथित रूप से बनकर तैयार भी हो गए हैं, उनका इस्तेमाल गांव के लोग नहीं कर रहे हैं। इसी तरह विकास खंड पौली में 54 सामुदायिक शौचालय के लक्ष्य के अनुरूप सात सामुदायिक शौचालय अपूर्ण पड़े हुए हैं। पचरा, दुलमपुर, पारासिर, पारा हरगोविंद, मकदूम पुर ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय अपूर्ण भले ही है, लेकिन उनके भी साफ सफाई पर धन व्यय करके करके बंदरबांट किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। गांव वालों का कहना है कि सामुदायिक शौचालय बेमतलब साबित हो रहे हैं।
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सामुदायिक शौचालय हो या पंचायत भवन का निर्माण सब पर सरकारी धन का दुरुपयोग खुलेआम किया जा रहा है। एडीओ पंचायत गजानन पाल ने बताया कि जिन गांव में सामुदायिक शौचालय प्रयोग किए जा रहे हैं, उन्हीं गांव में साफ- सफाई के लिए समूह के लोगों को मानदेय भेजा गया है। अपूर्ण पड़े शौचालय वाले गांव में भेजी रकम के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
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सीडीओ सुरेद्र नाथ श्रीवास्तव ने बताया कि अधूरे शौचालय को पूर्ण कराए जाने का निर्देश दिया गया है। बगैर उपायोग वाले शौचालयों की साफ-सफाई और देखरेख पर धन खर्च होने की वैसे तो जानकारी नहीं है लेकिन यदि ऐसा है तो मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में मामला सही पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।