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कबीर को समझने के लिए कबीर बनना पड़ेगा : प्रो रामदरश

Thu, 09 Feb 2023 12:49 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Feb 2023 12:49 AM IST
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To understand Kabir one has to become Kabir: Prof. Ramdarsh
मगहर महोत्सव के दुसरे दिन कबीर भजन व कबीर गोष्ठी में मौजूद मंचासीन संत व विद्वान।संवाद
मगहर महोत्सव में कबीर गोष्ठी का हुआ आयोजन
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
मगहर। कबीर को बहुत पढ़ा गया, लेकिन जिसने भी अन्त: मन से कबीर को पढ़ लिया, वह मानो कबीर हो गया। संत कबीर के जैसा व्यक्तित्व वाला कोई संत नहीं है। कबीर पर देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में हजारों लोगों ने शोध किया और कराया भी, लेकिन कबीर के शब्दों को परख नहीं पाए। उक्त बातें मगहर महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को कबीर गोष्ठी एवं निर्गुण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राम दरश राय ने कही।
उन्होंने कहा कि कबीर की वाणी का अध्ययन किया जाए तो मनुष्य का जीवन भी कम पड़ जाएगा। कबीर को समझने के लिए कबीर बनना पड़ेगा।। वह एक मात्र ऐसे कबीर संत हुए हैं जिन्होंने मानव समाज को सही और सरल भाषा में राह दिखाने का काम किया। उन्होंने कबीर और गांधी की एक- दूसरे से तुलना करते हुए कहा कि कबीर ने भोजपुरी भाषा के माध्यम से देश वासियों को समझाने की बात कही, वहीं गांधी वैरिस्टर होने के बावजूद हिंदी को राष्ट्र भाषा के रूप में व्यवहार में लाने के लिए संघर्ष किया था।
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अयोध्या के विवेक दास ने कहा कि कबीर ने पूरा जीवन सामाजिक विषमता को दूर करने के लिए संघर्ष किया था। उमाशंकर ने कहा कि कबीर में जैसे को तैसे बोलने की हिम्मत थी। कमला पति त्रिपाठी ने कहा कि कबीर को पढ़ा कम और पढ़ाया अधिक जाता है। महंत विचार दास ने कहा कि कबीर के वाणी और विचारों को पढ़ और जीवन में आत्मसात करने से ही जीवन को सफल बनाया जा सकता है।
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निर्गुण भजन का हुआ कार्यक्रम
मगहर। कबीर निर्गुण कार्यक्रम की शुरुआत संत रामचंद्र दास चौरीचौरा के गाए निर्गुण पानी बिच मीन पियासी, मोहि सुनि सुनि हासि, बाबा हमके खेले द नईहरवा दिनचारि... भजन से की गई।

कबीर भजन गायक डॉ. हरिशरण शास्त्री ने कहवां से आइल बात कहवां तू जईबा ये पिजड़ा के पंछी सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर कमलापति त्रिपाठी, रामवृक्ष दास, उमा शंकर दास, उदय नारायण राय, हीरालाल तिवारी, सूर्य नाथ दास, अभिषेक पांडेय, केशव दास, अरविंद दास शास्त्री आदि मौजूद रहे। संवाद
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