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Sant Kabir Nagar News: सामूहिक यौन शोषण मामले में तीन दोषियों को 10-10 वर्ष की सजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। नाबालिग से सामूहिक यौन शोषण के 15 वर्ष पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-द्वितीय)/महिलाओं के विरुद्ध अपराध डॉ. दिव्यानंद द्विवेदी की अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 75-75 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को दिए जाने का भी आदेश दिया है। थाना मेंहदावल क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 16 मार्च 2011 को पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उसकी 15 वर्षीय बेटी तीन मार्च 2011 की शाम घर से निकली थी।
आरोप है कि उसे बहला-फुसलाकर केवल उर्फ राम केवल अपने साथ ले गया। परिजनों ने तहरीर में यह भी आरोप लगाया कि किशोरी अपने साथ 50 हजार रुपये नकद और करीब एक लाख रुपये के जेवर भी ले गई थी।
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मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच के दौरान पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचक ने केवल उर्फ राम केवल, नागेंद्र शुक्ला और राजेश चौबे के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन के अनुसार आरोपियों ने पीड़िता को प्राथमिक विद्यालय परिसर सहित कैंपियरगंज और अन्य स्थानों पर ले जाकर करीब एक माह तक उसका यौन शोषण किया।
विचारण के दौरान तीनों आरोपियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना किया। अदालत में अभियोजन की ओर से गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कारावास और 75-75 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाया।
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संतकबीरनगर। नाबालिग से सामूहिक यौन शोषण के 15 वर्ष पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-द्वितीय)/महिलाओं के विरुद्ध अपराध डॉ. दिव्यानंद द्विवेदी की अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 75-75 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अर्थदंड अदा न करने पर प्रत्येक दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को दिए जाने का भी आदेश दिया है। थाना मेंहदावल क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 16 मार्च 2011 को पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उसकी 15 वर्षीय बेटी तीन मार्च 2011 की शाम घर से निकली थी।
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आरोप है कि उसे बहला-फुसलाकर केवल उर्फ राम केवल अपने साथ ले गया। परिजनों ने तहरीर में यह भी आरोप लगाया कि किशोरी अपने साथ 50 हजार रुपये नकद और करीब एक लाख रुपये के जेवर भी ले गई थी।
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मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच के दौरान पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचक ने केवल उर्फ राम केवल, नागेंद्र शुक्ला और राजेश चौबे के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन के अनुसार आरोपियों ने पीड़िता को प्राथमिक विद्यालय परिसर सहित कैंपियरगंज और अन्य स्थानों पर ले जाकर करीब एक माह तक उसका यौन शोषण किया।
विचारण के दौरान तीनों आरोपियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना किया। अदालत में अभियोजन की ओर से गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कारावास और 75-75 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाया।