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चंद्रिका की रिहाई की आस जगी
अमर उजाला/संतकबीरनगर
Updated Fri, 05 Feb 2016 12:23 AM IST
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संतकबीरनगर। बेटे के कत्ल के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कैदी
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के अच्छे आचरण के कारण उसकी रिहाई की आस जगी है।
इस बाबत बृहस्पतिवार को डीएम की अध्यक्षता वाली समिति ने कैदी से पूछताछ के बाद पूरे मामले पर मंथन किया। कोतवाली क्षेत्र के बनोहिया गांव का चंद्रिका पुत्र रामदौर सप्ताह भर पहले ही वाराणसी से बस्ती जेल ट्रांसफर हुआ है।
डीएम को चंद्रिका ने नम आंखों से बताया कि वर्ष 1993 में पत्नी से अक्सर विवाद होने के कारण गुस्से में उसने तीन साल के मासूम का कत्ल कर दिया था। इसी जुर्म में 1998 से वह आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। इस दौरान पत्नी भी कहीं चली गई। अब उसका जीवन अंधकारमय हो गया है।
रिहाई के बाद वह कहां जाना चाहता है, इस प्रश्न पर उसने रुंधे गले से कहा कि घर जाकर वह शेष जीवन जीना चाहता है।
जेल अधीक्षक बस्ती वीके मिश्र और डिप्टी जेलर केके मिश्र ने बताया कि करीब 22 साल से चंद्रिका जेल में बंद है।
वाराणसी जेल से वह हाल ही में बस्ती जेल आया है। वाराणसी जेल प्रशासन ने उसके अच्छे आचरण की वजह से उसका फार्म ए निकाला और छोड़ने के लिए संतकबीरनगर के डीएम की समिति के समक्ष रखने की रिपोर्ट दी।
उसी के तहत बंदी चंद्रिका को यहां लाया गया।समिति के अध्यक्ष डीएम डॉक्टर सरोज कुमार, एसपी शैैलेष कुमार पांडेय, जेल अधीक्षक वीके मिश्रा और जिला प्रोवेशन अधिकारी विजय कुमार पांडेय ने बंदी को छोड़ने के प्रकरण पर काफी मंथन किया।
डीएम डॉक्टर सरोज कुमार ने बताया कि कोतवाली पुलिस से इस बारे में रिपोर्ट मांगी जा रही है। पुलिस रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
इस बाबत बृहस्पतिवार को डीएम की अध्यक्षता वाली समिति ने कैदी से पूछताछ के बाद पूरे मामले पर मंथन किया। कोतवाली क्षेत्र के बनोहिया गांव का चंद्रिका पुत्र रामदौर सप्ताह भर पहले ही वाराणसी से बस्ती जेल ट्रांसफर हुआ है।
डीएम को चंद्रिका ने नम आंखों से बताया कि वर्ष 1993 में पत्नी से अक्सर विवाद होने के कारण गुस्से में उसने तीन साल के मासूम का कत्ल कर दिया था। इसी जुर्म में 1998 से वह आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। इस दौरान पत्नी भी कहीं चली गई। अब उसका जीवन अंधकारमय हो गया है।
रिहाई के बाद वह कहां जाना चाहता है, इस प्रश्न पर उसने रुंधे गले से कहा कि घर जाकर वह शेष जीवन जीना चाहता है।
जेल अधीक्षक बस्ती वीके मिश्र और डिप्टी जेलर केके मिश्र ने बताया कि करीब 22 साल से चंद्रिका जेल में बंद है।
वाराणसी जेल से वह हाल ही में बस्ती जेल आया है। वाराणसी जेल प्रशासन ने उसके अच्छे आचरण की वजह से उसका फार्म ए निकाला और छोड़ने के लिए संतकबीरनगर के डीएम की समिति के समक्ष रखने की रिपोर्ट दी।
उसी के तहत बंदी चंद्रिका को यहां लाया गया।समिति के अध्यक्ष डीएम डॉक्टर सरोज कुमार, एसपी शैैलेष कुमार पांडेय, जेल अधीक्षक वीके मिश्रा और जिला प्रोवेशन अधिकारी विजय कुमार पांडेय ने बंदी को छोड़ने के प्रकरण पर काफी मंथन किया।
डीएम डॉक्टर सरोज कुमार ने बताया कि कोतवाली पुलिस से इस बारे में रिपोर्ट मांगी जा रही है। पुलिस रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।