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Sant Kabir Nagar News: करोड़ों का कारोबार, फिर भी समस्याओं का अंबार
Wed, 19 Mar 2025 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 19 Mar 2025 11:58 PM IST
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बरदहिया बाजार में दुकानों पर नहीं लगे टीन शेड।
संतकबीरनगर। जिला मुख्यालय पर स्थित बरदहिया मंडी में शनिवार और रविवार को करोड़ों का कारोबार होता है। दो दिन लगातार चलने वाली पूर्वांचल की सबसे बड़ी कपड़े की इस मंडी दूर-दूर से आने वाले व्यापारियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। जमीन पर खुले में चौकी लगाकर इनको कपड़ा बेचना पड़ता है।
यहां पर सप्ताह में करोड़ों का कारोबार होता है, लेकिन सुविधाओं को लेकर किसी का ध्यान नहीं है। यही नहीं जाम की समस्या भी बनी रहती है। बाजार में पेयजल, शौचालय से लेकर विश्रामालय तक लिए भी कोई प्रबंध नहीं है। बरसात में कपड़े भीग जाते हैं, वहीं गर्मी में खुले आसमान के नीचे व्यापारी गर्मी झेलने को विवश रहते हैं।
खलीलाबाद के बरदहिया बाजार में जिले के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, आजमगढ़, कानपुर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, नेपाल तक दुकानदार सप्ताह में दो दिन कपड़े की दुकानें लगाते हैं। यहां पर लोग थोक में कपड़ा खरीदते हैं और स्थानीय बाजारों में बेचते हैं।
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इसके साथ ही जिले के विभिन्न बाजारों से भी लोग कपड़े की खरीदारी के लिए आते हैं, लेकिन यहां पर न तो दुकानदारों के बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही पीने के पानी का ही इंतजाम है। एक शौचालय बना है, लेकिन वह भी भेली मंडी में है।
यहां दुकान लगाने वाले मौसम की मार झेलते हैं। बरसात में जहां कपड़ा भीगने का डर बना रहता है वहीं परिसर में पानी भर जाता है, जिससे आना-जाना मुश्किल होता है। गर्मी में सूर्य की तपिश झेलनी पड़ती है। इसके बाद कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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यहां पर सप्ताह में करोड़ों का कारोबार होता है, लेकिन सुविधाओं को लेकर किसी का ध्यान नहीं है। यही नहीं जाम की समस्या भी बनी रहती है। बाजार में पेयजल, शौचालय से लेकर विश्रामालय तक लिए भी कोई प्रबंध नहीं है। बरसात में कपड़े भीग जाते हैं, वहीं गर्मी में खुले आसमान के नीचे व्यापारी गर्मी झेलने को विवश रहते हैं।
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खलीलाबाद के बरदहिया बाजार में जिले के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, आजमगढ़, कानपुर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, कुशीनगर, नेपाल तक दुकानदार सप्ताह में दो दिन कपड़े की दुकानें लगाते हैं। यहां पर लोग थोक में कपड़ा खरीदते हैं और स्थानीय बाजारों में बेचते हैं।
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इसके साथ ही जिले के विभिन्न बाजारों से भी लोग कपड़े की खरीदारी के लिए आते हैं, लेकिन यहां पर न तो दुकानदारों के बैठने की समुचित व्यवस्था है और न ही पीने के पानी का ही इंतजाम है। एक शौचालय बना है, लेकिन वह भी भेली मंडी में है।
यहां दुकान लगाने वाले मौसम की मार झेलते हैं। बरसात में जहां कपड़ा भीगने का डर बना रहता है वहीं परिसर में पानी भर जाता है, जिससे आना-जाना मुश्किल होता है। गर्मी में सूर्य की तपिश झेलनी पड़ती है। इसके बाद कोई ध्यान नहीं दे रहा है।