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Sant Kabir Nagar News: जिंदगी पर पलायन का दंश... पानी बढ़ते ही बांध पर लेनी पड़ती है शरण
Fri, 20 Feb 2026 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 20 Feb 2026 12:25 AM IST
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सिद्धार्थनगर। बरसात का मौसम शुरू होते ही उसका क्षेत्र के हथिवड़ताल गांव के टोला तिवारीडीह के लोगों के रात की नींद उड़ जाती है। नदी के बढ़ते-घटते जलस्तर के साथ ही कटान से लोगों के घर नदी में विलीन होने का खतरा बढ़ जाता है। जिनके मकान कटान से सटे हैं उनकी सांसों की रफ्तार नदी के बढ़ते-घटते जल स्तर के साथ उठती-गिरती है।
कटान से घर नदी में विलीन होने और हर साल बाढ़ से पलायन की त्रासदी से आजिज कई लोगों ने तो बांध पर की मकान बना लिया है जबकि कुछ ने तो गांव के नजदीकी कस्बा उसका में घर बना रहने लगे है। गांव निवासी अधिवक्ता वीरेंद्र नाथ त्रिपाठी कहते है कि हर साल बाढ़ की विभीषिका से पलायन ही लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गई है।
बूढ़ी राप्ती नदी के उत्तर किनारे पर स्थित उसका ब्लॉक के हथिवड़ताल गांव के 32 घरों वाले टोला तिवारीडीह में पिछले 15 वर्षों में हुई कटान के चलते 12 से अधिक घर नदी में विलीन हो चुके हैं। कटान से घर नदी में विलीन होने के बाद मोहरत, दशरथ, सोहरत, कन्हैया, भुवाल, दिनेश ने तो बांध के किनारे ही अपना आशियाना बना लिया है। वहीं, कटान से बेघर हुए साधुसरन और कौशल भी दूसरी जगह अपना ठिकाना बनाने को मजबूर रहे। वर्तमान में कटान और हर साल बाढ़ की त्रासदी के चलते गांव में मुश्किल से 18 परिवार ही रह रहे है, जो बारिश के मौसम नदी के बढ़ते और घटते जलस्तर के बीच खुद के मकान नदी में गिरने के खतरे के बीच दिन व रात काटने काे मजबूर रहते हैं। गांव निवासी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य घनश्याम कहते हैं कि बारिश के मौसम में हर समय खतरे के एहसास के बीच समय गुजरता है।
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कटान से घर नदी में विलीन होने और हर साल बाढ़ से पलायन की त्रासदी से आजिज कई लोगों ने तो बांध पर की मकान बना लिया है जबकि कुछ ने तो गांव के नजदीकी कस्बा उसका में घर बना रहने लगे है। गांव निवासी अधिवक्ता वीरेंद्र नाथ त्रिपाठी कहते है कि हर साल बाढ़ की विभीषिका से पलायन ही लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गई है।
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बूढ़ी राप्ती नदी के उत्तर किनारे पर स्थित उसका ब्लॉक के हथिवड़ताल गांव के 32 घरों वाले टोला तिवारीडीह में पिछले 15 वर्षों में हुई कटान के चलते 12 से अधिक घर नदी में विलीन हो चुके हैं। कटान से घर नदी में विलीन होने के बाद मोहरत, दशरथ, सोहरत, कन्हैया, भुवाल, दिनेश ने तो बांध के किनारे ही अपना आशियाना बना लिया है। वहीं, कटान से बेघर हुए साधुसरन और कौशल भी दूसरी जगह अपना ठिकाना बनाने को मजबूर रहे। वर्तमान में कटान और हर साल बाढ़ की त्रासदी के चलते गांव में मुश्किल से 18 परिवार ही रह रहे है, जो बारिश के मौसम नदी के बढ़ते और घटते जलस्तर के बीच खुद के मकान नदी में गिरने के खतरे के बीच दिन व रात काटने काे मजबूर रहते हैं। गांव निवासी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य घनश्याम कहते हैं कि बारिश के मौसम में हर समय खतरे के एहसास के बीच समय गुजरता है।
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