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सवाल आसान थे, पर डगर कठिन
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मस्त शर्मा,परीक्षार्थी।
- फोटो : KHALILABAD
सवाल आसान थे, पर डगर कठिन
परीक्षार्थी बोले-अपने ही जिले में ही होनी चाहिए परीक्षा
अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में हुई परेशान
संतकबीरनगर। प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पेट) के लिए जिले में आए अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए तमाम झंझवात झेलने पड़े। केंद्रों का नाम सही तरीके से अंकित न होने से वे भटकते रहे। उनका कहना था कि सरकार को परीक्षा केंद्र उनके जिले में ही बनाना चाहिए था।
...
यहां तक आने में काफी परेशानी हुई है। हालांकि शहर में ही परीक्षा केंद्र आवंटित था। परीक्षा द्वितीय पाली में थी। घर से सुबह सात बजे चले थे। यहां तक आने में एक बज गया। सरकार को परीक्षा केंद्र जिले में ही बना देना चाहिए था।
-हर्षिता श्रीवास्तव, गोंडा
...
गोंडा से ट्रेन से सुबह ही आ गए। दूसरी पाली में परीक्षा थी। पूरे दिन परीक्षा केंद्र के बाहर बैठकर समय व्यतीत करना पड़ा। यदि केंद्र बगल के जिले या उनके जिले में बना होता तो इतनी समस्या नहीं झेलनी पड़ती।
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-विवेक कुमार तिवारी, गोंडा
...
प्रश्नपत्र तो ठीक थे। हल भी किया गया, पर सफर के दौरान थकान हो गई। गोंडा बस स्टेशन पर सुबह चार बजे पहुंच गए थे। बस नहीं मिली तो ट्रेन का सहारा लेना पड़ा। उसमें भी भीड़ थी। किसी तरह यहां तक आकर परीक्षा दी।
-अभिषेक श्रीवास्तव, गोंडा
...
पेट का फार्म भरते समय यह उम्मीद थी कि परीक्षा के लिए अपना जिला मिलेगा। जब प्रवेशपत्र मिला तो उसमें संतकबीरनगर जिला आवंटित था। रविवार रात में ही यहां आ गए। होटल में ठहरे थे। सुबह परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए। समय भी बर्बाद हुआ और समस्या अलग से झेलनी पड़ी।
-मस्त शर्मा, गोंडा
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परीक्षार्थी बोले-अपने ही जिले में ही होनी चाहिए परीक्षा
अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में हुई परेशान
संतकबीरनगर। प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पेट) के लिए जिले में आए अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए तमाम झंझवात झेलने पड़े। केंद्रों का नाम सही तरीके से अंकित न होने से वे भटकते रहे। उनका कहना था कि सरकार को परीक्षा केंद्र उनके जिले में ही बनाना चाहिए था।
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यहां तक आने में काफी परेशानी हुई है। हालांकि शहर में ही परीक्षा केंद्र आवंटित था। परीक्षा द्वितीय पाली में थी। घर से सुबह सात बजे चले थे। यहां तक आने में एक बज गया। सरकार को परीक्षा केंद्र जिले में ही बना देना चाहिए था।
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-हर्षिता श्रीवास्तव, गोंडा
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गोंडा से ट्रेन से सुबह ही आ गए। दूसरी पाली में परीक्षा थी। पूरे दिन परीक्षा केंद्र के बाहर बैठकर समय व्यतीत करना पड़ा। यदि केंद्र बगल के जिले या उनके जिले में बना होता तो इतनी समस्या नहीं झेलनी पड़ती।
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-विवेक कुमार तिवारी, गोंडा
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प्रश्नपत्र तो ठीक थे। हल भी किया गया, पर सफर के दौरान थकान हो गई। गोंडा बस स्टेशन पर सुबह चार बजे पहुंच गए थे। बस नहीं मिली तो ट्रेन का सहारा लेना पड़ा। उसमें भी भीड़ थी। किसी तरह यहां तक आकर परीक्षा दी।
-अभिषेक श्रीवास्तव, गोंडा
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पेट का फार्म भरते समय यह उम्मीद थी कि परीक्षा के लिए अपना जिला मिलेगा। जब प्रवेशपत्र मिला तो उसमें संतकबीरनगर जिला आवंटित था। रविवार रात में ही यहां आ गए। होटल में ठहरे थे। सुबह परीक्षा केंद्र पर पहुंच गए। समय भी बर्बाद हुआ और समस्या अलग से झेलनी पड़ी।
-मस्त शर्मा, गोंडा

अभिषेक श्रीवास्तव,परीक्षार्थी।- फोटो : KHALILABAD

विवेक कुमार तिवारी,परीक्षार्थी।- फोटो : KHALILABAD

हर्षिता श्रीवास्तव,परीक्षार्थी।- फोटो : KHALILABAD