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Sant Kabir Nagar News: बहुत कठिन है शिक्षा की डगर...जान जाेखिम में डाल बच्चे पार कर रहे नहर

Sun, 20 Jul 2025 11:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Sun, 20 Jul 2025 11:53 PM IST
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The path of education is very difficult... children are crossing the canal risking their lives
गुलरिहा प्राथमिक स्कूल के बच्चों को बिजली के पोल के सहारे नहर पार कराते हुए ​शिक्षक
संतकबीरनगर। खलीलाबाद ब्लाॅक क्षेत्र के गुलरिहा गांव के बच्चों की शिक्षा की डगर बहुत ही कठिन है, प्राथमिक स्कूल में पढ़ने जाने वाले बच्चों को जान जोखिम में डालकर पोल के सहारे उफनाई नहर को पार करना पड़ता है। हालांकि तीन साल पहले डीएम ने यहां पर रास्ता बनाने का निर्देश दिया था, लेकिन अभी तक अधिकारी निर्देश को अमली-जामा नहीं पहना सके।
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खलीलाबाद ब्लाॅक क्षेत्र के गुलरिहा स्थित प्राथमिक विद्यालय पर जाने के लिए बच्चों और शिक्षक और शिक्षिकाओं को जान जोखिम में डालकर पतले बिजली के पोल के सहारे उफनाई नहर पार करना पड़ता है। उनके स्कूल आने-जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। छुट्टी होती है तो स्कूल की शिक्षिका और शिक्षक बच्चों को सुरक्षित नहर पार कराते हैं। अभिभावकों में हर समय अनहोनी की आशंका बनी रहती है। बच्चों सही सलामत घर पहुंचने के वह राहत की सांस लेते हैं। स्थिति तो यह है कि स्कूल पर निरीक्षण करने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी भी जाते हैं। लेकिन उनके द्वारा भी कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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नहर की पटरी से ही निरीक्षण कर लौट जाते हैं अधिकारी
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की स्थिति यह है कि अधिकारीगण नहर की पटरी पर ही खड़े होकर स्कूल का निरीक्षण कर लेते हैं। कभी कोई अधिकारी इस स्कूल में जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाता है। मोबाइल पर फोन करके शिक्षकों को रजिस्टर लेकर बुलाया जाता है और निरीक्षण आख्या तैयार कर ली जाती है।
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नहर के रास्ते पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां
स्कूल पर जाने के लिए एक दूसरा रास्ता भी है। यह रास्ता नहर की पटरी का है। लेकिन इस रास्ते पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हैं। यह रास्ता जाने के लायक ही नहीं है। यही नहीं इस रास्ते से जाने के बाद स्कूल की दूरी आधा किलोमीटर से अधिक बढ़ जाती है। यही नहीं इस रास्ते पर नित्यक्रिया भी लोगों द्वारा की जाती है, जिससे बहुत ही गंदगी भी है।
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लगातार घट रही बच्चों की संख्या
सत्र 2021-22 में इस स्कूल में 115 बच्चे थे, वर्ष 2023 में यह संख्या घटकर 99 हो गई है। अब यह संख्या घटकर 60 पहुंच गई है। ऐसी स्थिति में बच्चों की संख्या जब घटेगी नहीं तो आखिर क्या होगा?
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बार-बार अनुरोध, न सुनवाई न समाधान
इस स्कूल की प्रधानाध्यापिका अनु सचान हैं। वह पिछले सात साल से वहां तैनात हैं। वह बताती हैं कि वह भी इसी पुल से होकर आती-जाती हैं। मजबूरी है, बार-बार अनुरोध के बाद भी सुनवाई नहीं होती है। बच्चों को खेतों की मेड़ से होकर गुजरना पड़ता है। विभागीय अधिकारी एवं ग्राम प्रधान से रास्ते की समस्या को लेकर कई बार कहा गया, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। वर्ष 2023 में तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर नहर के किनारे की झाड़ियां काटी गईं, लेकिन रास्ता नहीं बना।

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कोट
नहर पर रास्ते का काम दो साल पहले करवाए थे। लेकिन हमारा भुगतान नहीं किया गया। सिंचाई विभाग को भी नहर पर पुलिया बनवाने के लिए कहा गया, लेकिन विभाग हमारी बात को नहीं सुनता है।-
राजकुमार यादव, प्रधान प्रतिनिधि
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मामले के बारे में पूरी जानकारी लेंगे। जो भी बेहतर व्यवस्था होगी वह कराई जाएगी, ताकि बच्चे वहां पर सुरक्षित जाकर शिक्षा ग्रहण कर सकें।
-आलोक कुमार, जिलाधिकारी, संतकबीरनगर
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