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Sant Kabir Nagar News: हड्डी रोग से पीड़ितों की संख्या बढ़ी, जिला अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे दो दर्जन मरीज
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जिला अस्पताल में दवा के लिए कतार में खड़े मरीज व तीमारदार। संवाद
संतकबीरनगर। हाथ-पैर, कमर, पीठ के दर्द और हड्डी संबंधी समस्याओं से परेशान मरीजों को जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी विंग में राहत मिल रही है। यहां प्रतिदिन दो दर्जन से अधिक मरीजों की फिजियोथेरेपी की जा रही है।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. बलवंत कुमार त्रिपाठी ने बताया कि कमर दर्द, घुटनों का न मुड़ना, हाथ-पैर में कमजोरी, गले का दर्द और पैर ठीक से काम न करने जैसी समस्याओं से ग्रस्त मरीज यहां आ रहे हैं। तीन साल में दो हजार से अधिक मरीज फिजियोथेरेपी से लाभान्वित होकर स्वस्थ हो चुके हैं।
वहीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि जन्म से पहले गर्भावस्था के दौरान मां के गिरने, चोट लगने या ऑक्सीजन की कमी से बच्चे सेरेब्रल पाल्सी नामक विकार से ग्रस्त हो जाते हैं। इसमें बच्चे के हाथ-पैर, कमर और मांसपेशियां प्रभावित होती हैं।
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जिला अस्पताल की फिजियोथेरेपी और डॉक्टरों की सलाह से तीन वर्षों में लगभग 70 बच्चों को इस बीमारी से काफी राहत मिली है। कई बच्चे अब सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो रहे हैं।
डॉ. बलवंत ने लोगों से अपील की है कि सेरेब्रल पाल्सी जैसे रोग को छिपाएं नहीं, समय रहते फिजियोथेरेपी शुरू कर दें तो बच्चे का भविष्य काफी बेहतर हो सकता है।
जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिजियोथेरेपी विंग में स्टाफ और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।
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फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. बलवंत कुमार त्रिपाठी ने बताया कि कमर दर्द, घुटनों का न मुड़ना, हाथ-पैर में कमजोरी, गले का दर्द और पैर ठीक से काम न करने जैसी समस्याओं से ग्रस्त मरीज यहां आ रहे हैं। तीन साल में दो हजार से अधिक मरीज फिजियोथेरेपी से लाभान्वित होकर स्वस्थ हो चुके हैं।
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वहीं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि जन्म से पहले गर्भावस्था के दौरान मां के गिरने, चोट लगने या ऑक्सीजन की कमी से बच्चे सेरेब्रल पाल्सी नामक विकार से ग्रस्त हो जाते हैं। इसमें बच्चे के हाथ-पैर, कमर और मांसपेशियां प्रभावित होती हैं।
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जिला अस्पताल की फिजियोथेरेपी और डॉक्टरों की सलाह से तीन वर्षों में लगभग 70 बच्चों को इस बीमारी से काफी राहत मिली है। कई बच्चे अब सामान्य जीवन जीने में सक्षम हो रहे हैं।
डॉ. बलवंत ने लोगों से अपील की है कि सेरेब्रल पाल्सी जैसे रोग को छिपाएं नहीं, समय रहते फिजियोथेरेपी शुरू कर दें तो बच्चे का भविष्य काफी बेहतर हो सकता है।
जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिजियोथेरेपी विंग में स्टाफ और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।