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Sant Kabir Nagar News: बस डिपो की जमीन की हुई पैमाइश, चहारदीवारी का निर्माण शुरू
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मीरगंज में रोडवेज बस स्टेशन के लिए पैमाइश करते कर्मी। संवाद
संतकबीरनगर। लंबे अरसे के इंतजार के बाद आखिरकार बस डिपो के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पहले बस डिपो की जमीन की पैमाइश कराई गई, फिर चहारदीवारी निर्माण के लिए नींव की खोदाई का कार्य शुरू कराया गया। इससे बस डिपो और कार्यशाला के निर्माण की उम्मीद जग गई है।
वर्ष 1997 में जिले का सृजन हुआ। इसके बाद बस डिपो की स्थापना की मांग लगातार उठती रही। कई जगह जमीन चिह्नित की गई, लेकिन तकनीकी कारणों से जमीन फाइनल नहीं हो सकी। इसके बाद प्रशासन के हस्तक्षेप से मीरगंज में 1.503 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई। साथ ही इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया। शासन ने इसकी मंजूरी प्रदान करते हुए 15 करोड़ 80 लाख रुपये के बजट को स्वीकृति प्रदान की है।
बजट मिलने के बाद बस डिपो और कार्यशाला बनाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कराई गई। शनिवार को एसडीएम सदर अरुण कुमार के निर्माण शुरू कराने से पूर्व नए सिरे से जमीन के चिह्नांकन के लिए 11 सदस्यीय टीम मौके पर भेजी। इसमें तहसीलदार खलीलाबाद, एसएचओ खलीलाबाद, क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक, क्षेत्रीय लेखपाल के साथ छह अन्य लेखपाल शामिल रहे।
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टीम ने शाम तक जमीन के चिह्नांकन का कार्य पूर्ण कराकर रिपोर्ट साैंपी। इसके बाद रविवार को सुबह से ही चिह्नित की गई जमीन की चहारदीवारी बनाने के लिए नींव की खोदाई का कार्य शुरू कराया गया। दिनभर जेसीबी से नींव की खोदाई का कार्य चलता रहा। इससे उम्मीद जग गई है कि जनपदवासियों की जल्द ही बस डिपो की आस पूरी हो जाएगी।
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मेंहदावल बाईपास पर खुले आसमान के नीचे बसों का इंतजार करते हैं लोग
जिला मुख्यालय पर बस डिपो न होने के कारण शहर में मेंहदावल बाईपास पर बने अस्थायी बस स्टाॅप पर खुले आसमान तले खड़े होकर यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। यहां न तो यात्री शेड है और न ही बैठने के लिए व्यवस्था है। इससे यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर परिवार के साथ बस का इंतजार करना काफी पीड़ादायक होता है। यात्री संजीव कुमार, मनोज कुमार आदि का कहना है कि अस्थायी बस स्टाॅप सेंटर पर काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं। बस डिपो बनने के बाद काफी राहत मिलेगी।
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बस डिपो और कार्यशाला के निर्माण के लिए यूपी प्रोजेक्ट काॅरपोरशन को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। नए सिरे से जमीन के चिह्नांकन का कार्य पूर्ण करा लिया गया है। इसके साथ ही चहारदीवारी निर्माण के लिए कार्य शुरू करा दिया गया है।
-आयुष भटनागर, एआरएम, बस्ती
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वर्ष 1997 में जिले का सृजन हुआ। इसके बाद बस डिपो की स्थापना की मांग लगातार उठती रही। कई जगह जमीन चिह्नित की गई, लेकिन तकनीकी कारणों से जमीन फाइनल नहीं हो सकी। इसके बाद प्रशासन के हस्तक्षेप से मीरगंज में 1.503 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई। साथ ही इसका प्रस्ताव शासन को भेजा गया। शासन ने इसकी मंजूरी प्रदान करते हुए 15 करोड़ 80 लाख रुपये के बजट को स्वीकृति प्रदान की है।
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बजट मिलने के बाद बस डिपो और कार्यशाला बनाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कराई गई। शनिवार को एसडीएम सदर अरुण कुमार के निर्माण शुरू कराने से पूर्व नए सिरे से जमीन के चिह्नांकन के लिए 11 सदस्यीय टीम मौके पर भेजी। इसमें तहसीलदार खलीलाबाद, एसएचओ खलीलाबाद, क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक, क्षेत्रीय लेखपाल के साथ छह अन्य लेखपाल शामिल रहे।
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टीम ने शाम तक जमीन के चिह्नांकन का कार्य पूर्ण कराकर रिपोर्ट साैंपी। इसके बाद रविवार को सुबह से ही चिह्नित की गई जमीन की चहारदीवारी बनाने के लिए नींव की खोदाई का कार्य शुरू कराया गया। दिनभर जेसीबी से नींव की खोदाई का कार्य चलता रहा। इससे उम्मीद जग गई है कि जनपदवासियों की जल्द ही बस डिपो की आस पूरी हो जाएगी।
मेंहदावल बाईपास पर खुले आसमान के नीचे बसों का इंतजार करते हैं लोग
जिला मुख्यालय पर बस डिपो न होने के कारण शहर में मेंहदावल बाईपास पर बने अस्थायी बस स्टाॅप पर खुले आसमान तले खड़े होकर यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। यहां न तो यात्री शेड है और न ही बैठने के लिए व्यवस्था है। इससे यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर परिवार के साथ बस का इंतजार करना काफी पीड़ादायक होता है। यात्री संजीव कुमार, मनोज कुमार आदि का कहना है कि अस्थायी बस स्टाॅप सेंटर पर काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ती हैं। बस डिपो बनने के बाद काफी राहत मिलेगी।
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बस डिपो और कार्यशाला के निर्माण के लिए यूपी प्रोजेक्ट काॅरपोरशन को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। नए सिरे से जमीन के चिह्नांकन का कार्य पूर्ण करा लिया गया है। इसके साथ ही चहारदीवारी निर्माण के लिए कार्य शुरू करा दिया गया है।
-आयुष भटनागर, एआरएम, बस्ती