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‘समाज की सेवा ही श्रेष्ठ कर्म’
sant kabir nagar
Updated Wed, 06 Apr 2016 12:38 AM IST
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निषादराज गुह्य की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित हुआ।
- फोटो : अमर उजाला
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जीवन में समाज की सेवा श्रेष्ठ कर्म है। निषाद राज गुह्य के व्यक्तित्व से यही सीख मिलती है। निषाद के सिद्धांत अनुकरणीय हैं, जिसे अपनाकर ही निषाद समाज विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकता है। ये बातें मंगलवार को मेंहदावल के ग्राम तुलसीपुर में आयोजित निषादराज गुह्य के जयंती समारोह को संबोधित करते हुए महान गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद निषाद ने कही।
उन्होंने कहा कि देश की सभ्यता और संस्कृति से निषाद वंश का इतिहास जुड़ा है। निषादराज का जन्म त्रेता युग में चैत्र शुक्ल पंचमी के दिन को हुआ था। महर्षि ऋंगी इनके बड़े पिता थे।
देश की गौरवशाली संस्कृति का अंग होने के कारण निषाद समाज के लोग अपने पूर्वज के जन्मदिन पर उनके प्रति श्रद्धा का भाव रखते हैं। उन्होंने निषाद समाज के विकास के लिए एकजुट और शिक्षा के प्रसार पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम आयोजक सतीशचंद्र साहनी ने कहा कि राजवंश होने के बाद भी निषाद अपना हक पाने में सफल नही हो सके है, इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
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शिक्षा के प्रति अपनी दृढ़ शक्ति मजबूत करते हुए नौनिहालों को शिक्षा के प्रति जागरूक करें। कार्यक्रम का प्रारंभ निषादराज की आरती और दीप जलाने से हुआ। इसके बाद गायकों ने गीतों के माध्यम से निषाद समाज के इतिहास की जानकारी दी। इस अवसर पर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रामनयन निषाद, रामबेलाश निषाद, बालकिशुन निषाद, हरिहर निषाद, गजेंन्द्र निषाद, रामलगन साहनी, अवधेश साहनी, गौकरन, महेश निषाद, जमुना, रूद्रनाथ निषाद, रामशब्द निषाद, राधेश्याम यादव, जगरन्नाथ निषाद आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि देश की सभ्यता और संस्कृति से निषाद वंश का इतिहास जुड़ा है। निषादराज का जन्म त्रेता युग में चैत्र शुक्ल पंचमी के दिन को हुआ था। महर्षि ऋंगी इनके बड़े पिता थे।
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देश की गौरवशाली संस्कृति का अंग होने के कारण निषाद समाज के लोग अपने पूर्वज के जन्मदिन पर उनके प्रति श्रद्धा का भाव रखते हैं। उन्होंने निषाद समाज के विकास के लिए एकजुट और शिक्षा के प्रसार पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम आयोजक सतीशचंद्र साहनी ने कहा कि राजवंश होने के बाद भी निषाद अपना हक पाने में सफल नही हो सके है, इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
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शिक्षा के प्रति अपनी दृढ़ शक्ति मजबूत करते हुए नौनिहालों को शिक्षा के प्रति जागरूक करें। कार्यक्रम का प्रारंभ निषादराज की आरती और दीप जलाने से हुआ। इसके बाद गायकों ने गीतों के माध्यम से निषाद समाज के इतिहास की जानकारी दी। इस अवसर पर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष रामनयन निषाद, रामबेलाश निषाद, बालकिशुन निषाद, हरिहर निषाद, गजेंन्द्र निषाद, रामलगन साहनी, अवधेश साहनी, गौकरन, महेश निषाद, जमुना, रूद्रनाथ निषाद, रामशब्द निषाद, राधेश्याम यादव, जगरन्नाथ निषाद आदि मौजूद रहे।