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Sant Kabir Nagar News: गठजोड़ से हुआ कब्जा, अब हटाने पर हो रही तकरार
Tue, 28 Jan 2025 12:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 28 Jan 2025 12:31 AM IST
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सिद्धार्थनगर। सरकारी भूमि पर कब्जा हटाने के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों से लोगों की तकरार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। पहले विभागीय शह पर होने वाले कब्जे की शिकायत पर अब जब अधिकारी कार्रवाई के लिए आगे आ रहे हैं तो उनसे नोकझोंक की स्थिति बन जा रही है। पूर्व में कई मामलों में कब्जा हटाने गई राजस्व टीम से हाथापाई भी हो चुकी है।
जिले में अवैध कब्जे पर प्रशासन का बुलडोजर तो चल रहा है, लेकिन अवैध रूप से कब्जा करने वालों के हौसले बुलंद हैं। रोकने जा रहे अधिकारियों से भिड़ जा रहे हैं। जैसा की दो दिन पहले नगर पालिका क्षेत्र के पकड़ी में एक घटना हुई थी। गोरखपुर-नौगढ़ एनएच पर सरकारी जमीन पर हो रहे निर्माण रोकने गए तहसील प्रशासन से बवाल शुरू हो गया। जमकर नोकझोंक हुई।
अगर फोर्स नहीं होती तो शायद हाथापाई भी हो जाती। प्रशासन की कार्रवाई पर गौर करें तो एक सप्ताह में भीतर 10 से अधिक स्थानों पर प्रशासन का बुलडोजर चल चुका है। इसके बाद भी सरकारी भूमि पर कब्जे की शिकायतों का सिलसिला थम नहीं रहा है, जिनमें कार्रवाई से अधिकारियों से तकरार हो जा रही है।
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गठजोड़ में हो रहा ल
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर बढ़ रही लोगों की भूख और प्रशासन की कार्रवाई पर तकरार होने की नौबत के पीछे कहीं न कहीं विभाग ही जिम्मेदार है। एक सेवानिवृत्त कानूनगो ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कब्जे का खेल पूरा सिस्टम जानता है। गांव हो या फिर कस्बा वहां की सरकारी भूमि जैसे घूर गड्डा, पशुचर, हड़वाही, जलधर और बंजर गड्ढा और पोखरे के रकबे के बारे में हर राजस्व कर्मी को जानकारी होती है। उसकी ड्यूटी है कि वह गांव का भ्रमण करके और जानकारी लेता रहे।
अगर कोई कब्जा करता है तो उसे रोके और रिपोर्ट करे पर किसी के बहकावे में तो कहीं अन्य कारण से वह खामोश हो जाता है। कई बार शिकायतें भी होती हैं, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिसका नतीजा लोग कब्जा करने के साथ-साथ निर्माण कर लेते हैं। जब अधिक दिन हो जाता है तो वह समझ लेते हैं कि उनका हो गया है। इसीलिए कब्जा हटाने के दौरान कई बार मारपीट हो जाती है। प्रशासन को लौटना पड़ता है। तमाम समस्याएं होती हैं। अगर शुरू में रोका जाए, तो नोकझोंक और विवाद की नौबत ही न आए।
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तहसीलदार से नोकझोंक
नगर पालिका क्षेत्र के पकड़ी में गोरखपुर-नौगढ़ एनएच से सटे एक जमीन के टुकड़े पर निर्माण हो रहा है, जो अभिलेखों में सरकारी है। नगर पालिका में शामिल होने और एनएच के कारण कौड़ियों में बिकने वाले भूमि की कीमत लाखों में हो गई है। जमीन पर निर्माण की शिकायत मिली। इसके बाद तहसीलदार डॉ. संतराज सिंह हटाने गए थे। जहां उनसे नोकझोंक तक हो गई। बड़ी सख्ती के बाद हटवा सके। अगर फोर्स और राजस्व टीम नहीं होती तो शायद कब्जा मुक्त कराने में मशक्कत करनी पड़ती और बड़ा बवाल हो जाता।
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कानूनगो पर कर दिया था हमला
बीते वर्ष शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हुए अवैध कब्जा हटाने गई राजस्व टीम से विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि एक कानूनगो पर हमला कर दिया, जिससे वे चोटिल हो गए थे। इस मामले में सरकारी काम में बाधा, हमला करने सहित अन्य धारा में केस दर्ज किया गया। अभी 15 दिन पहले सदर थाना क्षेत्र में ही वन विभाग की जमीन पर हो रहे खनन को रोकने गए वन कर्मियों पर हमला कर दिया गया। इसमें दोनों लोगों को चोटें आई थीं। पुलिस मुकदमा दर्ज करके मामले की जांच कर रही है।
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एक सप्ताह में 10 से अधिक स्थानों से हटे कब्जे
आकड़ों पर गौर करें तो जिले में एक सप्ताह के भीतर सदर, शोहरतगढ़, इटवा, डुमरियागंज और बांसी तहसील क्षेत्र में 10 से अधिक अवैध कब्जा प्रशासन ने हटवाया है। इसमें पांच स्थानों पर निर्माण करने से रोका गया था, लेकिन बिना डरे लोग निर्माण कर रहे थे। इसके बाद प्रशासन को बुलडोजर लेकर जाना पड़ा।
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जिले में अवैध कब्जे पर प्रशासन का बुलडोजर तो चल रहा है, लेकिन अवैध रूप से कब्जा करने वालों के हौसले बुलंद हैं। रोकने जा रहे अधिकारियों से भिड़ जा रहे हैं। जैसा की दो दिन पहले नगर पालिका क्षेत्र के पकड़ी में एक घटना हुई थी। गोरखपुर-नौगढ़ एनएच पर सरकारी जमीन पर हो रहे निर्माण रोकने गए तहसील प्रशासन से बवाल शुरू हो गया। जमकर नोकझोंक हुई।
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अगर फोर्स नहीं होती तो शायद हाथापाई भी हो जाती। प्रशासन की कार्रवाई पर गौर करें तो एक सप्ताह में भीतर 10 से अधिक स्थानों पर प्रशासन का बुलडोजर चल चुका है। इसके बाद भी सरकारी भूमि पर कब्जे की शिकायतों का सिलसिला थम नहीं रहा है, जिनमें कार्रवाई से अधिकारियों से तकरार हो जा रही है।
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गठजोड़ में हो रहा ल
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर बढ़ रही लोगों की भूख और प्रशासन की कार्रवाई पर तकरार होने की नौबत के पीछे कहीं न कहीं विभाग ही जिम्मेदार है। एक सेवानिवृत्त कानूनगो ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कब्जे का खेल पूरा सिस्टम जानता है। गांव हो या फिर कस्बा वहां की सरकारी भूमि जैसे घूर गड्डा, पशुचर, हड़वाही, जलधर और बंजर गड्ढा और पोखरे के रकबे के बारे में हर राजस्व कर्मी को जानकारी होती है। उसकी ड्यूटी है कि वह गांव का भ्रमण करके और जानकारी लेता रहे।
अगर कोई कब्जा करता है तो उसे रोके और रिपोर्ट करे पर किसी के बहकावे में तो कहीं अन्य कारण से वह खामोश हो जाता है। कई बार शिकायतें भी होती हैं, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिसका नतीजा लोग कब्जा करने के साथ-साथ निर्माण कर लेते हैं। जब अधिक दिन हो जाता है तो वह समझ लेते हैं कि उनका हो गया है। इसीलिए कब्जा हटाने के दौरान कई बार मारपीट हो जाती है। प्रशासन को लौटना पड़ता है। तमाम समस्याएं होती हैं। अगर शुरू में रोका जाए, तो नोकझोंक और विवाद की नौबत ही न आए।
तहसीलदार से नोकझोंक
नगर पालिका क्षेत्र के पकड़ी में गोरखपुर-नौगढ़ एनएच से सटे एक जमीन के टुकड़े पर निर्माण हो रहा है, जो अभिलेखों में सरकारी है। नगर पालिका में शामिल होने और एनएच के कारण कौड़ियों में बिकने वाले भूमि की कीमत लाखों में हो गई है। जमीन पर निर्माण की शिकायत मिली। इसके बाद तहसीलदार डॉ. संतराज सिंह हटाने गए थे। जहां उनसे नोकझोंक तक हो गई। बड़ी सख्ती के बाद हटवा सके। अगर फोर्स और राजस्व टीम नहीं होती तो शायद कब्जा मुक्त कराने में मशक्कत करनी पड़ती और बड़ा बवाल हो जाता।
कानूनगो पर कर दिया था हमला
बीते वर्ष शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में सरकारी जमीन पर हुए अवैध कब्जा हटाने गई राजस्व टीम से विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ गया कि एक कानूनगो पर हमला कर दिया, जिससे वे चोटिल हो गए थे। इस मामले में सरकारी काम में बाधा, हमला करने सहित अन्य धारा में केस दर्ज किया गया। अभी 15 दिन पहले सदर थाना क्षेत्र में ही वन विभाग की जमीन पर हो रहे खनन को रोकने गए वन कर्मियों पर हमला कर दिया गया। इसमें दोनों लोगों को चोटें आई थीं। पुलिस मुकदमा दर्ज करके मामले की जांच कर रही है।
एक सप्ताह में 10 से अधिक स्थानों से हटे कब्जे
आकड़ों पर गौर करें तो जिले में एक सप्ताह के भीतर सदर, शोहरतगढ़, इटवा, डुमरियागंज और बांसी तहसील क्षेत्र में 10 से अधिक अवैध कब्जा प्रशासन ने हटवाया है। इसमें पांच स्थानों पर निर्माण करने से रोका गया था, लेकिन बिना डरे लोग निर्माण कर रहे थे। इसके बाद प्रशासन को बुलडोजर लेकर जाना पड़ा।