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शिक्षक बच्चों को डेंगू से बचाव की देंगे जानकारी
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शिक्षक बच्चों को डेंगू से बचाव की देंगे जानकारी
आज से फ्रंट लाइन वर्कर घर-घर जाकर लोगों को डेंगू से बचाव के लिए जागरूक करेंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। डेंगू से बचाव के लिए जुलाई को डेंगू रोधी माह के रूप में मनाया जा रहा है। 13 जुलाई से शुरू हुए अभियान में फ्रंट लाइन वर्कर घर-घर जाकर लोगों को डेंगू के बारे में जागरूक करेंगी। शिक्षकों को भी इस बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। जिससे स्कूल खुलने पर वे डेंगू से बचाव व रोकथाम की जानकारी बच्चों को दे सकें।
अपर सीएमओ वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम डॉ. वीपी पांडेय ने बताया कि जनपद के लोगों को डेंगू से बचाने के लिए डेंगू रोधी माह का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करके जिले के सभी विद्यालयों के एक-एक शिक्षक को चयनित कर करके डेंगू से बचाव के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। जिससे विद्यालय खुलने पर शिक्षक बच्चों को डेंगू से बचाव व रोकथाम की जानकारी दे सकें। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कर्मियों के जरिए सप्ताह में एक दिन पानी के टैंक, बाल्टी, टायर आदि मच्छरों के प्रजनन स्थलों का निरीक्षण करके उसका उन्मूलन किया जाएगा। आशा कर्मी घर-घर भ्रमण करेंगी। यह घर के आंगन, छत व आसपास खाली पड़े प्लॉट में निष्प्रयोज्य सामग्री को नष्ट कराने के लिए गृह स्वामी व अन्य लोगों को प्रेरित करेंगी। हर रविवार-मच्छर पर वार व बुखार में देरी पड़ेगी भारी अभियान चलाया जाएगा।
सर्विलांस पर भी दिया जोर
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि डेंगू के वाहक एडीज मच्छर पैदा न हों, इस बात पर अधिक जोर है। उन्होंने बताया कि मलेरिया विभाग से जुड़ी टीम जिले में घूमेंगी और सरकारी कार्यालयों, दुकानों, लोगों के घरों जहां पर साफ पानी जमा होने व मच्छर पैदा होने की संभावना है, वहां पर लार्वा की जांच करेंगी। लार्वा मिलने पर पहली बार नोटिस और दूसरी बार जुर्माने का प्रावधान है। टीम लोगों को इस बात के लिए जागरूक भी करेंगी कि वे वह अपने घरों, टीबी और फ्रिज तथा अन्य स्थानों पर साफ पानी न जमा होने दें।
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यह होते हैं डेंगू ज्वर के लक्षण
डेंगू के मरीज को तीव्र ज्वर होता है। यह ज्वर 102 से 104 फारेनहाइट तक जा सकता है। मसूड़ों से खून आने लगता है। आंखों में काफी दर्द होता है। मांसपेशियों में भी दर्द होता है और शरीर में बेचैनी होती रहती है।
जिले में उपलब्ध हैं यह सुविधाएं
जिले में सभी ब्लॉकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर डेंगू की रैपिड जांच की सुविधा के साथ ही इलाज की भी सुविधा है। वहां से मरीज के रक्त के सीरम को जांच के लिए सेंटीनल लैब भेजने की भी सुविधा है। जिला अस्पताल पर डेंगू वार्ड के साथ ही सेंटीनल लैब की सुविधा है। जहां मरीज के रक्त का एलाइजा टेस्ट करके डेंगू की पुष्टि की जा सके। जिला अस्पताल पर डेंगू के मरीजों के लिए 10 और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पांच मच्छरदानीयुक्त वार्ड की व्यवस्था की गई है।
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आज से फ्रंट लाइन वर्कर घर-घर जाकर लोगों को डेंगू से बचाव के लिए जागरूक करेंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। डेंगू से बचाव के लिए जुलाई को डेंगू रोधी माह के रूप में मनाया जा रहा है। 13 जुलाई से शुरू हुए अभियान में फ्रंट लाइन वर्कर घर-घर जाकर लोगों को डेंगू के बारे में जागरूक करेंगी। शिक्षकों को भी इस बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। जिससे स्कूल खुलने पर वे डेंगू से बचाव व रोकथाम की जानकारी बच्चों को दे सकें।
अपर सीएमओ वेक्टर बार्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम डॉ. वीपी पांडेय ने बताया कि जनपद के लोगों को डेंगू से बचाने के लिए डेंगू रोधी माह का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करके जिले के सभी विद्यालयों के एक-एक शिक्षक को चयनित कर करके डेंगू से बचाव के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। जिससे विद्यालय खुलने पर शिक्षक बच्चों को डेंगू से बचाव व रोकथाम की जानकारी दे सकें। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कर्मियों के जरिए सप्ताह में एक दिन पानी के टैंक, बाल्टी, टायर आदि मच्छरों के प्रजनन स्थलों का निरीक्षण करके उसका उन्मूलन किया जाएगा। आशा कर्मी घर-घर भ्रमण करेंगी। यह घर के आंगन, छत व आसपास खाली पड़े प्लॉट में निष्प्रयोज्य सामग्री को नष्ट कराने के लिए गृह स्वामी व अन्य लोगों को प्रेरित करेंगी। हर रविवार-मच्छर पर वार व बुखार में देरी पड़ेगी भारी अभियान चलाया जाएगा।
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सर्विलांस पर भी दिया जोर
जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि डेंगू के वाहक एडीज मच्छर पैदा न हों, इस बात पर अधिक जोर है। उन्होंने बताया कि मलेरिया विभाग से जुड़ी टीम जिले में घूमेंगी और सरकारी कार्यालयों, दुकानों, लोगों के घरों जहां पर साफ पानी जमा होने व मच्छर पैदा होने की संभावना है, वहां पर लार्वा की जांच करेंगी। लार्वा मिलने पर पहली बार नोटिस और दूसरी बार जुर्माने का प्रावधान है। टीम लोगों को इस बात के लिए जागरूक भी करेंगी कि वे वह अपने घरों, टीबी और फ्रिज तथा अन्य स्थानों पर साफ पानी न जमा होने दें।
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यह होते हैं डेंगू ज्वर के लक्षण
डेंगू के मरीज को तीव्र ज्वर होता है। यह ज्वर 102 से 104 फारेनहाइट तक जा सकता है। मसूड़ों से खून आने लगता है। आंखों में काफी दर्द होता है। मांसपेशियों में भी दर्द होता है और शरीर में बेचैनी होती रहती है।
जिले में उपलब्ध हैं यह सुविधाएं
जिले में सभी ब्लॉकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर डेंगू की रैपिड जांच की सुविधा के साथ ही इलाज की भी सुविधा है। वहां से मरीज के रक्त के सीरम को जांच के लिए सेंटीनल लैब भेजने की भी सुविधा है। जिला अस्पताल पर डेंगू वार्ड के साथ ही सेंटीनल लैब की सुविधा है। जहां मरीज के रक्त का एलाइजा टेस्ट करके डेंगू की पुष्टि की जा सके। जिला अस्पताल पर डेंगू के मरीजों के लिए 10 और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पांच मच्छरदानीयुक्त वार्ड की व्यवस्था की गई है।