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तामेश्वरनाथ धाम कॉरिडोर : विकास को लगेंगे पंख, खुलेंगे रोजगार के द्वार

Mon, 26 May 2025 11:47 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 26 May 2025 11:47 PM IST
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Tameshwarnath Dham Corridor: Development will get wings, doors of employment will open
तामेश्वरनाथ पोखरे में मछलियों को दाना डालते हुए योगी आदित्यना​थ
संतकबीरनगर। सीएम योगी आदित्यनाथ ने तामेश्वरधाम कॉरिडोर के लिए प्रस्ताव मांग कर जिले के विकास को नई उड़ान दी है। कॉरिडोर से अबतक गुमनाम रहा महाभारतकाल का तामेश्वरनाथ शिवलिंग को देश-विदेश में पहचान मिलेगी। शिवलिंग के पौराणिक महत्व को लोग जान सकेंगे। कॉरिडोर बनने से यहां न सिर्फ श्रद्धालुओं की संख्या बल्कि पर्यटकों की तादाद भी बढ़ेगी। इससे लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे।
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महाभारतकाल में मां कुंती ने स्थापित किया था तामेश्वरनाथ शिवलिंग
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडव अपनी माता कुंती के साथ तामेश्वरनाथ धाम में पहुंचे थे। जहां शिव की आराधना के लिए कुंती ने शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर से थोड़ी दूर रामपुर में स्थित एक पोखरे का निर्माण भी पांडवों ने कराया था। जो आज द्वापरा के नाम से जाना जाता है। मंदिर के गर्भगृह का निर्माण आज से करीब 350 वर्ष पूर्व बांसी के तत्कालीन राजा ने कराया था। उस समय भारती परिवार के पूर्वज संयासी टेकधर भारती इस मंदिर की देखरेख करते थे। ब्रह्मशंकर भारती बताते हैं कि आज परिसर में मुख्य शिव मंदिर सहित करीब सोलह छोटे-बड़े शिवालय और हनुमान मंदिर भी हैं। हर वर्ष श्रावणमास में परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंचती है। इसी तरह पुरुषोत्तम मास में भी शिव भक्तों का यहां जमावड़ा होता है। महाशिवरात्रि में एक महीने तक अनवरत यहां मेले का आयोजन होता है। इसमें लाखों श्रद्धालु शिव जी को जलाभिषेक करते हैं।
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महात्मा बुद्ध ने यहीं करवाया था अपना मुंडन संस्कार



बनियाबारी निवासी समाजसेवी बृजभूषण पांडेय बताते हैं कि महात्मा बुद्ध ने अपना मुंडन संस्कार यहीं कराया था। ऐसा भारती पूर्वज बताते थे। मंदिर परिसर में स्थित एक अर्धनारीश्वर मंदिर की आकृति भी बुद्ध कालीन मंदिर की ही तरह बना हुआ है। इस बात की तस्दीक मंदिर पर पहुंची पुरातत्व विभाग की टीम ने भी किया था।आज भी लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार यहां करवाते हैं।
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