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सूर्यकांत हत्याकांड : क्राइम सीन रीक्रिएट की तैयारी में जुटी पुलिस
Tue, 06 May 2025 11:30 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 06 May 2025 11:30 PM IST
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संतकबीरनगर। जिले के बेलहरकला थानाक्षेत्र के बहुचर्चित सूर्यकांत हत्याकांड में विसरा रिपोर्ट आने के बाद भी पुलिस पांच माह बीतने के बाद भी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। विवेचना में जुटी पुलिस अब इस मामले में क्राइम सीन के क्राइम रीक्रिएट की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए सारा डाटा विधि विज्ञान प्रयोगशाला के मेडिकोलीगल एक्सपर्ट के पास भेज दिया गया है।
बेलहरकला थानाक्षेत्र के बरगदवा खुर्द गांव के निवासी चतुर्भुज मिश्र के इकलौते पुत्र सूरज मिश्रा (28) पुणे में काम करते थे। 3 दिसंबर 2024 की सुबह वह घर से निकले, लेकिन देर शाम तक वह नहीं लौटे। इसके बाद उनकी खोजबीन की गई। लेकिन उनका पता नहीं चल सका। चार दिसंबर को उनका शव गांव में ही गेहूं के खेत में पाया गया। इस मामले में पिता की तहरीर पर गांव के ही रामनरायन, अभिमन्यु, अमित, देवेन्द्र, अश्विनी, अभिषेक व संतोष के ऊपर हत्या का केस दर्ज किया गया था। लेकिन पुलिस को इस घटना में उनकी संलिप्तता के कोई प्रमाण नहीं मिले।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की बात सामने नहीं आई। विसरा प्रिजर्व करके जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेजा गया। विसरा रिपोर्ट में भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। घर के लोगों ने इस बात को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया। मुकामी पुलिस पर मामले में ढिलाई का आरोप लगाया। इसके बाद इस मामले की विवेचना बेलहरकला थाने से कोतवाली खलीलाबाद स्थानांतरित कर दी गई। कोतवाली खलीलाबाद की पुलिस भी मामले में किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।
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उच्चाधिकारियों से परामर्श के बाद कोतवाली खलीलाबाद के प्रभारी निरीक्षक पंकज पांडेय ने क्राइम सीन रीक्रिएट के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला को लिखा है। इससे संबंधित सारे सीडीआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान, पंचनामा रिपोर्ट, पीड़ित के परिजनों के बयान के साथ ही साथ अन्य सारे आवश्यक तथ्यों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला के मेडिकोलीगल एक्सपर्ट टीम को भेज दिया गया है। शीघ्र ही मेडिकोलीगल एक्सपर्ट की टीम जिले में आएगी और क्राइम सीन का रीक्रिएट करेगी। संवाद
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क्या है क्राइम रीक्रिएट, कैसे होता है कार्य
अपराध स्थल पुनर्निर्माण गवाहों से पूछताछ, साक्ष्य का विश्लेषण और वैज्ञानिक सिद्धांतों का परीक्षण करके यह निर्धारित करने की प्रक्रिया है कि अपराध कैसे किया गया था। यह हमेशा पीड़ित से शुरू होता है और फिर सबूत, मकसद, संदिग्धों आदि की ओर बढ़ता है। इसकी शुरुआत पीड़ित से होती है। अगर पीड़ित की मौत हो जाती है तो उसके करीबी तथा घटना में शामिल लोगों से पूछताछ होती है। मौके की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी की जाती है। यह बात इस थ्योरी को स्थापित करने में मदद करता है कि क्या हुआ। इसका उपयोग अपराधी का प्रोफाइल बनाने या अपराध को सुलझाने के लिए किया जाता है। पुनर्निर्माण का उपयोग अक्सर न्यायालयों में आपराधिक अपराध के चरित्र को समझने में न्यायालय की सहायता के लिए किया जाता है।
कोट
इस मामले में विधि विज्ञान प्रयोगशाला के मेडिकोलीगल एक्सपर्ट की राय ली जाएगी। घटना से जुड़े सारे दस्तावेजों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेज दिया गया है। शीघ्र ही टीम आकर क्राइम सीन का रीक्रिएट करेगी। इसके बाद सारे तथ्यों को ध्यान में रखकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
-पंकज पांडेय, विवेचक/कोतवाल
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बेलहरकला थानाक्षेत्र के बरगदवा खुर्द गांव के निवासी चतुर्भुज मिश्र के इकलौते पुत्र सूरज मिश्रा (28) पुणे में काम करते थे। 3 दिसंबर 2024 की सुबह वह घर से निकले, लेकिन देर शाम तक वह नहीं लौटे। इसके बाद उनकी खोजबीन की गई। लेकिन उनका पता नहीं चल सका। चार दिसंबर को उनका शव गांव में ही गेहूं के खेत में पाया गया। इस मामले में पिता की तहरीर पर गांव के ही रामनरायन, अभिमन्यु, अमित, देवेन्द्र, अश्विनी, अभिषेक व संतोष के ऊपर हत्या का केस दर्ज किया गया था। लेकिन पुलिस को इस घटना में उनकी संलिप्तता के कोई प्रमाण नहीं मिले।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की बात सामने नहीं आई। विसरा प्रिजर्व करके जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेजा गया। विसरा रिपोर्ट में भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। घर के लोगों ने इस बात को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया। मुकामी पुलिस पर मामले में ढिलाई का आरोप लगाया। इसके बाद इस मामले की विवेचना बेलहरकला थाने से कोतवाली खलीलाबाद स्थानांतरित कर दी गई। कोतवाली खलीलाबाद की पुलिस भी मामले में किसी नतीजे पर नहीं पहुंची।
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उच्चाधिकारियों से परामर्श के बाद कोतवाली खलीलाबाद के प्रभारी निरीक्षक पंकज पांडेय ने क्राइम सीन रीक्रिएट के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला को लिखा है। इससे संबंधित सारे सीडीआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान, पंचनामा रिपोर्ट, पीड़ित के परिजनों के बयान के साथ ही साथ अन्य सारे आवश्यक तथ्यों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला के मेडिकोलीगल एक्सपर्ट टीम को भेज दिया गया है। शीघ्र ही मेडिकोलीगल एक्सपर्ट की टीम जिले में आएगी और क्राइम सीन का रीक्रिएट करेगी। संवाद
क्या है क्राइम रीक्रिएट, कैसे होता है कार्य
अपराध स्थल पुनर्निर्माण गवाहों से पूछताछ, साक्ष्य का विश्लेषण और वैज्ञानिक सिद्धांतों का परीक्षण करके यह निर्धारित करने की प्रक्रिया है कि अपराध कैसे किया गया था। यह हमेशा पीड़ित से शुरू होता है और फिर सबूत, मकसद, संदिग्धों आदि की ओर बढ़ता है। इसकी शुरुआत पीड़ित से होती है। अगर पीड़ित की मौत हो जाती है तो उसके करीबी तथा घटना में शामिल लोगों से पूछताछ होती है। मौके की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी की जाती है। यह बात इस थ्योरी को स्थापित करने में मदद करता है कि क्या हुआ। इसका उपयोग अपराधी का प्रोफाइल बनाने या अपराध को सुलझाने के लिए किया जाता है। पुनर्निर्माण का उपयोग अक्सर न्यायालयों में आपराधिक अपराध के चरित्र को समझने में न्यायालय की सहायता के लिए किया जाता है।
कोट
इस मामले में विधि विज्ञान प्रयोगशाला के मेडिकोलीगल एक्सपर्ट की राय ली जाएगी। घटना से जुड़े सारे दस्तावेजों को विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेज दिया गया है। शीघ्र ही टीम आकर क्राइम सीन का रीक्रिएट करेगी। इसके बाद सारे तथ्यों को ध्यान में रखकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
-पंकज पांडेय, विवेचक/कोतवाल