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सूर्य को अर्घ्य के साथ किया नमन
संतकबीरनगर
Updated Wed, 14 Nov 2018 11:52 PM IST
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सूर्य को अर्घ्य के साथ किया नमन
- फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। भगवान भाष्कर को भोर में अर्घ्य देने के लिए बुधवार घाट पर पहुंच कर व्रती महिलाओं ने पूजन स्थल पर वेदी सजा दी। गन्ने के मंडप में गीत गाते हुए छट्ठी मइया की विधिवत पूजा की। उन्हें चावल का पीला अच्छत, चंदन, पुष्प, सिंदूर से पूजकर नारियल, सेब, केला, नींबू, कच्ची, अमरूद, मूंगफली, आंवला, पपीता, मीठा ठेकुआ चढ़ाकर मिन्नतें मांगीं। महिलाएं घुटने भर पानी में खड़े होकर सूप में फल आदि लेकर सूर्यदेवता को अर्घ्य देने के लिए प्रस्तुत हुईं तो उनके पति ने दूध और जलधार गिराकर अर्घ्य में सहयोग दिया।...आवहु आवहु हे सुरुज देव! मानहु विनती हमार,... पूरी करहुं मनकाम हे छट्ठी मइया... आदि गीतों से पूजा समारोह स्थल का वातावरण आध्यात्मिक छटा बिखेर रहा था।
भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पित करने के बाद महिलाएं पूजा मंडप में पुन: मां के सामने पहुंचीं। देवी के वेदी के सामने वस्तु रख आरती उतारी, प्रणाम कर मनवांछित फल मांगा। फिर पति के हाथों प्रसाद ग्रहण किया। इस बीच घाट पर पहुंचे सभी लोग अपने परिजनों के साथ इस परंपरा को निभाने में लगे रहे। खलीलाबाद के कोतवाली स्थित पोखरा, शुगर मिल के पास काफी भीड़ रही। नगर पालिका के साथ जिला प्रशासन ने प्रकाश के साथ पेयजल का बंदोबस्त किया था। सुरक्षा में पुलिसकर्मी लगे रहे। शुगर मिल कॉलोनी के सरोवर और विधियानी मां समयजी के पोखरे पर जुटे श्रद्धालुओं ने भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया। 36 घंटे का कठोर निर्जल व्रत करते हुए सूर्य देवता को अपनी श्रद्धा अर्पित करने वाले भक्तों ने कह, हे छठी मइया फिर आना और अगले साल हमारी पूजा स्वीकार करना। यही हाल ग्रामीण क्षेत्रों का भी रहा। धनघटा प्रतिनिधि के अनुसार बिड़हरघाट, हरिहरपुर नगर पंचायत के पोखरे और कुआनो नदी के किनारे राजघाट और मुखलिसपुर मंदिर के पास, बखिरा के भंगेश्वरनाथ, मेंहदावल के कुबेर नाथ पोखरे तथा राप्ती नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने भोर में उदय होते सूर्य को अर्घ्य दिया। हर पूजा स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
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भगवान भाष्कर को अर्घ्य अर्पित करने के बाद महिलाएं पूजा मंडप में पुन: मां के सामने पहुंचीं। देवी के वेदी के सामने वस्तु रख आरती उतारी, प्रणाम कर मनवांछित फल मांगा। फिर पति के हाथों प्रसाद ग्रहण किया। इस बीच घाट पर पहुंचे सभी लोग अपने परिजनों के साथ इस परंपरा को निभाने में लगे रहे। खलीलाबाद के कोतवाली स्थित पोखरा, शुगर मिल के पास काफी भीड़ रही। नगर पालिका के साथ जिला प्रशासन ने प्रकाश के साथ पेयजल का बंदोबस्त किया था। सुरक्षा में पुलिसकर्मी लगे रहे। शुगर मिल कॉलोनी के सरोवर और विधियानी मां समयजी के पोखरे पर जुटे श्रद्धालुओं ने भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया। 36 घंटे का कठोर निर्जल व्रत करते हुए सूर्य देवता को अपनी श्रद्धा अर्पित करने वाले भक्तों ने कह, हे छठी मइया फिर आना और अगले साल हमारी पूजा स्वीकार करना। यही हाल ग्रामीण क्षेत्रों का भी रहा। धनघटा प्रतिनिधि के अनुसार बिड़हरघाट, हरिहरपुर नगर पंचायत के पोखरे और कुआनो नदी के किनारे राजघाट और मुखलिसपुर मंदिर के पास, बखिरा के भंगेश्वरनाथ, मेंहदावल के कुबेर नाथ पोखरे तथा राप्ती नदी के तट पर श्रद्धालुओं ने भोर में उदय होते सूर्य को अर्घ्य दिया। हर पूजा स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
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