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Sant Kabir Nagar News: पेंशन के लिए लगानी पड़ रही दौड़ तो कोई वरासत के लिए परेशान
Tue, 21 Jan 2025 12:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 21 Jan 2025 12:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस पर लोग फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन आश्वासन के बाद निराश होकर लौट जा रहे हैं। कोई वरासत के लिए चार साल से तो कोई पेंशन के लिए 10 बार से दौड़ लगा रहा है। लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही है।
खलीलाबाद तहसील पर समाधान दिवस पर पहुंचे पुरानी तहसील निवासी शाह आलम ने बताया कि उनकी देख-रेख के लिए कोई नहीं है। वह अक्सर बीमार रहते है। वृद्धा पेंंशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। लेकिन फाइनल प्रिंट न निकल रहा न ही नया रजिस्ट्रेशन हो पा रहा है। परेशान होकर समाज कल्याण विभाग के कार्यालय गया लेकिन वहां नया रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा जा रहा है। 10 बार तहसील दिवस में शिकायत करने के बाद भी समाधान नहीं हुआ।
इसी तरह से धनघटा तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचे नकहां गांव निवासी लहुरी प्रसाद ने बताया कि उनकी पिता की मौत हुए पांच वर्ष से अधिक का समय व्यतीत हो गया। पिता की जगह अपने नाम का वरासत कराने के लिए चार वर्ष से लेखपाल और तहसील का चक्कर लग रहे हैं, लेकिन वरासत आज तक नहीं हो सका।
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संतकबीरनगर। जिले में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस पर लोग फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन आश्वासन के बाद निराश होकर लौट जा रहे हैं। कोई वरासत के लिए चार साल से तो कोई पेंशन के लिए 10 बार से दौड़ लगा रहा है। लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही है।
खलीलाबाद तहसील पर समाधान दिवस पर पहुंचे पुरानी तहसील निवासी शाह आलम ने बताया कि उनकी देख-रेख के लिए कोई नहीं है। वह अक्सर बीमार रहते है। वृद्धा पेंंशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। लेकिन फाइनल प्रिंट न निकल रहा न ही नया रजिस्ट्रेशन हो पा रहा है। परेशान होकर समाज कल्याण विभाग के कार्यालय गया लेकिन वहां नया रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा जा रहा है। 10 बार तहसील दिवस में शिकायत करने के बाद भी समाधान नहीं हुआ।
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इसी तरह से धनघटा तहसील सभागार में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचे नकहां गांव निवासी लहुरी प्रसाद ने बताया कि उनकी पिता की मौत हुए पांच वर्ष से अधिक का समय व्यतीत हो गया। पिता की जगह अपने नाम का वरासत कराने के लिए चार वर्ष से लेखपाल और तहसील का चक्कर लग रहे हैं, लेकिन वरासत आज तक नहीं हो सका।
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