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रंगपाल ने विदेश तक पहुंचाई भोजपुरी फाग गीतों की महक
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कवि रंगपाल (फाइल फोटो)
- फोटो : KHALILABAD
रंगपाल ने विदेश तक पहुंचाई भोजपुरी फाग गीतों की महक
हरिहरपुर (संतकबीरनगर)। वसंत ऋतु के आते ही कवि रंगपाल के फाग गीतों की सुरलहरियां लोगों को रिझाने लगती हैं। उनकी रचनाएं विदेशों में बस गए पूर्वांचल के भोजपुरी भाषाई लोग आज भी गाकर अपनी मिट्टी की खुशबू का अहसास करते हैं। कवि के फाग गीत अवधी और ब्रजभाषा में लयबद्ध हैं। उत्कृष्ट लेखन शैली के नाते कवि रंगपाल को भारतेंदु हरिशचंद ने महाकवि की उपाधि से अलंकृत किया था।
वर्ष-1864 में नगर पंचायत हरिहरपुर में जन्मे कवि रंगपाल के पिता विश्वेश्वर पाल जमींदार थे। माता सुशीला देवी को संस्कृत और हिंदी भाषा की गहरी समझ थी। आश्रयदाता कवियों में शुमार कवि रंगपाल ने करीब साढ़े सात सौ रचनाओं को लय ताल में पिरोया। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम की कविताओं सहित पशु-पक्षियों के प्रति उदारता साफ दिखती है। उनके गीतों में फाग विधा के गीत सबसे अधिक लोकप्रिय हुए। उनके फाग गीतों में ऋतुपति गयौ आय, हाय गुंजन लगे भौंरा...,बलम सोये रहो अबहीं, दीन्हें बहिंया गले डारि...पिया रतिया कहां जागे, नयना अनुरागे... सहित तमाम रचनाएं लोक गायकों के जरिए सुनने को मिलती है।
कठिनइया नदी के किनारे राजघाट पर बनी कवि रंगपाल की समाधि स्थल जीर्णशीर्ण है। हरिहरपुर निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रामभरोस पांडेय और भगवान दास ने बताया कि चंदा जुटाकर कवि की समाधि और वाचनालय का निर्माण कराया गया था। शासन-प्रशासन की उपेक्षा की वजह से समाधि स्थल जीर्णशीर्ण हाल में पहुंच गया है। सिर्फ कवि कीजयंती कार्यक्रम में आने वाले जिम्मेदार उम्मीद जताते हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों ने बताया कि 20 फरवरी को कवि की जयंती मनाई जाएगी।
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कवि की रचनाओं में वीरों की शौर्यगाथा भी शामिल
कवि रंगपाल की रचनाओं में एक ओर जहां नायक-नायिका के मिलन और वियोग का वर्णन है, वहीं सौंदर्य और शृंगार रसों की प्रधानता भी है। उनकी रचनाओं में देश प्रेम के साथ उनके कविता संग्रह ‘वीर वीरेश’ में देश के वीर सपूतों और वीरांगनाओं की शौर्य गाथा है। उनकी कविता संग्रह में छत्रशाल की वीरता का प्रमाण मिलता है तो वीरांगना झांसी की रानी और महारानी पद्मावत की ओजपूर्ण वीरगाथा भी शामिल है।
मंच से सीएम योगी भी कर चुके हैं कवि का जिक्र
संसदीय चुनाव में धनघटा में आयोजित जनसभा के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिले के धार्मिक स्थलों के विकास के साथ कवि रंगपाल की स्मृतियों को सहेजने की दिशा में पहल करने की बात कही थी। इससे लोगों को उम्मीद जगी थी कि कवि की सांस्कृतिक धरोहरों को नई पहचान मिलेगी, लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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हरिहरपुर (संतकबीरनगर)। वसंत ऋतु के आते ही कवि रंगपाल के फाग गीतों की सुरलहरियां लोगों को रिझाने लगती हैं। उनकी रचनाएं विदेशों में बस गए पूर्वांचल के भोजपुरी भाषाई लोग आज भी गाकर अपनी मिट्टी की खुशबू का अहसास करते हैं। कवि के फाग गीत अवधी और ब्रजभाषा में लयबद्ध हैं। उत्कृष्ट लेखन शैली के नाते कवि रंगपाल को भारतेंदु हरिशचंद ने महाकवि की उपाधि से अलंकृत किया था।
वर्ष-1864 में नगर पंचायत हरिहरपुर में जन्मे कवि रंगपाल के पिता विश्वेश्वर पाल जमींदार थे। माता सुशीला देवी को संस्कृत और हिंदी भाषा की गहरी समझ थी। आश्रयदाता कवियों में शुमार कवि रंगपाल ने करीब साढ़े सात सौ रचनाओं को लय ताल में पिरोया। उनकी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम की कविताओं सहित पशु-पक्षियों के प्रति उदारता साफ दिखती है। उनके गीतों में फाग विधा के गीत सबसे अधिक लोकप्रिय हुए। उनके फाग गीतों में ऋतुपति गयौ आय, हाय गुंजन लगे भौंरा...,बलम सोये रहो अबहीं, दीन्हें बहिंया गले डारि...पिया रतिया कहां जागे, नयना अनुरागे... सहित तमाम रचनाएं लोक गायकों के जरिए सुनने को मिलती है।
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कठिनइया नदी के किनारे राजघाट पर बनी कवि रंगपाल की समाधि स्थल जीर्णशीर्ण है। हरिहरपुर निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक रामभरोस पांडेय और भगवान दास ने बताया कि चंदा जुटाकर कवि की समाधि और वाचनालय का निर्माण कराया गया था। शासन-प्रशासन की उपेक्षा की वजह से समाधि स्थल जीर्णशीर्ण हाल में पहुंच गया है। सिर्फ कवि कीजयंती कार्यक्रम में आने वाले जिम्मेदार उम्मीद जताते हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों ने बताया कि 20 फरवरी को कवि की जयंती मनाई जाएगी।
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कवि की रचनाओं में वीरों की शौर्यगाथा भी शामिल
कवि रंगपाल की रचनाओं में एक ओर जहां नायक-नायिका के मिलन और वियोग का वर्णन है, वहीं सौंदर्य और शृंगार रसों की प्रधानता भी है। उनकी रचनाओं में देश प्रेम के साथ उनके कविता संग्रह ‘वीर वीरेश’ में देश के वीर सपूतों और वीरांगनाओं की शौर्य गाथा है। उनकी कविता संग्रह में छत्रशाल की वीरता का प्रमाण मिलता है तो वीरांगना झांसी की रानी और महारानी पद्मावत की ओजपूर्ण वीरगाथा भी शामिल है।
मंच से सीएम योगी भी कर चुके हैं कवि का जिक्र
संसदीय चुनाव में धनघटा में आयोजित जनसभा के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने जिले के धार्मिक स्थलों के विकास के साथ कवि रंगपाल की स्मृतियों को सहेजने की दिशा में पहल करने की बात कही थी। इससे लोगों को उम्मीद जगी थी कि कवि की सांस्कृतिक धरोहरों को नई पहचान मिलेगी, लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ।