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Sant Kabir Nagar News: सत्कर्म की प्रेरणा देती है श्रीमद्भागवत कथा
Mon, 13 Oct 2025 11:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Mon, 13 Oct 2025 11:58 PM IST
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इंडस्ट्रियल एरिया में चल रही कथा के दौरान कथावाचक पचौरी जी का तिलक करते हुए मुख्य यजमान । स्रो
- फोटो : सांकेतिक
संतकबीरनगर। राष्ट्रीय संत बाल योगी पचौरी जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मोह माया से दूर रहकर सत्कर्म करने की प्रेरणा देती है। हमारा हृदय संसार रूपी सागर है और हमारे अच्छे-बुरे विचार ही देवता और दानव के बीच होने वाले मंथन के समान हैं।
यह प्रसंग उन्होंने औद्योगिक क्षेत्रमें चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ के तीसरे दिन कथा के यजमान एचआर इंटर काॅलेज के प्रधानाचार्य रामकुमार सिंह तथा उर्मिला सिंह को कथारस का अमृतपान कराते हुए कहा। कथा के दौरान उन्होंने ध्रुव के जीवन की कहानी बताते हुए कहा कि कैसे उन्होंने अपने पिता की गोद में बैठने की इच्छा पूरी करने के लिए तपस्या की और भगवान को प्राप्त किया। इससे यह शिक्षा मिलती है कि हमें कठिनाइयों को भी अच्छे अवसरों के रूप में देखना चाहिए।
भक्त प्रह्लाद और नरसिंह अवतार पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यप के अत्याचारों और प्रह्लाद की अटूट भक्ति में अंतत: भक्ति ही जीतती है। इसमें अंत में भगवान नरसिंह के रूप में अवतार लेकर प्रह्लाद की रक्षा करते हैं।
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यह प्रसंग भगवान की भक्ति में निहित शक्ति को दर्शाता है। भगवान के चौबीस अवतार संसार को बचाने और बुराई का नाश करने के लिए प्रकट होते हैं। इन कथाओं का मुख्य उद्देश्य लोगों को भक्ति और सत्कर्म के प्रति प्रेरित करना है। ज्ञान प्राप्त करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और जीवन को सार्थक बनाने के लिए सत्संग बहुत ही आवश्यक है।
कथा के दौरान रामशंकर सिंह, प्राचार्य प्रो. श्याम कुमार सिंह, संतोष सिंह, हिमांशु सिंह, सुधांशु सिंह, रेयांश आदि माैजूद रहे।
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यह प्रसंग उन्होंने औद्योगिक क्षेत्रमें चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ के तीसरे दिन कथा के यजमान एचआर इंटर काॅलेज के प्रधानाचार्य रामकुमार सिंह तथा उर्मिला सिंह को कथारस का अमृतपान कराते हुए कहा। कथा के दौरान उन्होंने ध्रुव के जीवन की कहानी बताते हुए कहा कि कैसे उन्होंने अपने पिता की गोद में बैठने की इच्छा पूरी करने के लिए तपस्या की और भगवान को प्राप्त किया। इससे यह शिक्षा मिलती है कि हमें कठिनाइयों को भी अच्छे अवसरों के रूप में देखना चाहिए।
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भक्त प्रह्लाद और नरसिंह अवतार पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यप के अत्याचारों और प्रह्लाद की अटूट भक्ति में अंतत: भक्ति ही जीतती है। इसमें अंत में भगवान नरसिंह के रूप में अवतार लेकर प्रह्लाद की रक्षा करते हैं।
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यह प्रसंग भगवान की भक्ति में निहित शक्ति को दर्शाता है। भगवान के चौबीस अवतार संसार को बचाने और बुराई का नाश करने के लिए प्रकट होते हैं। इन कथाओं का मुख्य उद्देश्य लोगों को भक्ति और सत्कर्म के प्रति प्रेरित करना है। ज्ञान प्राप्त करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और जीवन को सार्थक बनाने के लिए सत्संग बहुत ही आवश्यक है।
कथा के दौरान रामशंकर सिंह, प्राचार्य प्रो. श्याम कुमार सिंह, संतोष सिंह, हिमांशु सिंह, सुधांशु सिंह, रेयांश आदि माैजूद रहे।