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Sant Kabir Nagar News: गुनाहों से निजात की रात है शब-ए-बरात
Tue, 03 Feb 2026 01:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 03 Feb 2026 01:29 AM IST
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सेमरियावां। इस्लामी कैलेंडर के माह शाबान की 15वीं तारीख की रात को शब-ए-बरात के नाम से जाना जाता है।
इस वर्ष तीन फरवरी की रात को शब ए बरात है। इस रात को इबादत का सिलसिला मंगलवार मगरिब की नमाज के बाद से शुरू होकर सुबह चार बजे तक चलेगा। इसके दिन और अगले दिन तक कई लोग रोजा रखते हैं, जिसे फर्ज नहीं बल्कि नफिल रोजा कहा जाता है। शब ए बरात की रात खुदा की इबादत, गुनाहों से निजात, माफी मांगने, बख्शीश और तौबा करने की रात है। इस रात खुदा की रहमत बरसती है। कब्रिस्तान की साफ-सफाई, दरगाहों और मस्जिदों की सजावट की तैयारी की जा रही है। शब-ए-बरात का आना इस बात की गवाही है कि बरकतों और रहमतों का महीना ‘रमजान’ बेहद करीब है।
मौलाना सलमान कबीरनगरी ने बताया कि माह-ए-शाबान बहुत मुबारक महीना है। यह दीन-ए-इस्लाम का 8वां महीना है। इसके बाद माह-ए-रमजान आएगा। इस रात लोग जागकर नमाज पढ़ते हैं। कुरान की तिलावत करते हैं। मौलाना शोएब नदवी ने बताया कि शब-ए-बरात का अर्थ होता है छुटकारे की रात या निजात की रात।
इस्लाम धर्म में इस रात को महत्वपूर्ण माना जाता है। हदीस शरीफ में है कि इस रात में साल भर के होने वाले तमाम काम बांटे जाते हैं जैसे कौन पैदा होगा, कौन मरेगा, किसे कितनी रोजी मिलेगी आदि। सारी चीजें इसी रात को तक्सीम की जाती है। इस दिन शहर की छोटी से लेकर बड़ी मस्जिदों, घरों में लोग इबादत करते है। अल्लाह से दुआ मांगते हैं। बताया कि मुसलमानों को शब-ए -बरात की रात खुदा के जिक्र, कुरान पाक की तिलावत और नमाज में गुजारनी चाहिए।र
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इस वर्ष तीन फरवरी की रात को शब ए बरात है। इस रात को इबादत का सिलसिला मंगलवार मगरिब की नमाज के बाद से शुरू होकर सुबह चार बजे तक चलेगा। इसके दिन और अगले दिन तक कई लोग रोजा रखते हैं, जिसे फर्ज नहीं बल्कि नफिल रोजा कहा जाता है। शब ए बरात की रात खुदा की इबादत, गुनाहों से निजात, माफी मांगने, बख्शीश और तौबा करने की रात है। इस रात खुदा की रहमत बरसती है। कब्रिस्तान की साफ-सफाई, दरगाहों और मस्जिदों की सजावट की तैयारी की जा रही है। शब-ए-बरात का आना इस बात की गवाही है कि बरकतों और रहमतों का महीना ‘रमजान’ बेहद करीब है।
मौलाना सलमान कबीरनगरी ने बताया कि माह-ए-शाबान बहुत मुबारक महीना है। यह दीन-ए-इस्लाम का 8वां महीना है। इसके बाद माह-ए-रमजान आएगा। इस रात लोग जागकर नमाज पढ़ते हैं। कुरान की तिलावत करते हैं। मौलाना शोएब नदवी ने बताया कि शब-ए-बरात का अर्थ होता है छुटकारे की रात या निजात की रात।
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इस्लाम धर्म में इस रात को महत्वपूर्ण माना जाता है। हदीस शरीफ में है कि इस रात में साल भर के होने वाले तमाम काम बांटे जाते हैं जैसे कौन पैदा होगा, कौन मरेगा, किसे कितनी रोजी मिलेगी आदि। सारी चीजें इसी रात को तक्सीम की जाती है। इस दिन शहर की छोटी से लेकर बड़ी मस्जिदों, घरों में लोग इबादत करते है। अल्लाह से दुआ मांगते हैं। बताया कि मुसलमानों को शब-ए -बरात की रात खुदा के जिक्र, कुरान पाक की तिलावत और नमाज में गुजारनी चाहिए।र
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