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सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की आस रह गई अधूरी
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मगहर कबीर चौरा परिसर के समीप स्थित आमी नदी।संवाद
- फोटो : KHALILABAD
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सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की आस रह गई अधूरी
- एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी ने मांगी थी रिपोर्ट, बनाया गया था डीपीआर
- खलीलाबाद व मगहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का है प्रस्ताव
- नदी के दोनों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्र में होना है पौधरोपण
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। खलीलाबाद और मगहर में बनने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की आस अब भी अधूरी रह गई है। जबकि करीब तीन साल पहले नेेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की पहल पर जिला प्रशासन ने डीपीआर बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन अब तक इस पर मुहर नहीं लग सकी है।
सिद्धार्थनगर के सिकोहरा ताल से निकलकर गोरखपुर जिले में राप्ती नदी में मिलने वाली 135 किलोमीटर लंबी आमी नदी का अधिकांश हिस्सा प्रदूषित हो चुका है। औद्योगिक कचरा और शहरी क्षेत्रों के नालों व प्रदूषित पानी से नदी का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक दशक से समय-समय पर आंदोलन चलता रहा है। अब पूरा मामला एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी के पास है। करीब तीन साल पहले हाईपॉवर कमेटी के चेयरमैन न्यायामूर्ति डीपी सिंह की अगुवाई में एक टीम ने आमी नदी के उद्गम स्थल से गोरखपुर जिले में इसके अंतिम छोर तक का निरीक्षण किया था। इस दौरान खलीलाबाद डाक बंगले पर डीएम की मौजूदगी में कमेटी ने नदी के प्रदूषण के मामले पर चर्चा की थी। टीम ने गंदे नाले का पानी सीधे नदी में गिराने से रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव मांगा था। इसमें खलीलाबाद विकास खंड के चकपिहानी व मगहर के रेलवे पुल के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसमें चकपिहनी में 42 करोड़ व मगहर में 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। इसके पीछे मंशा थी कि खलीलाबाद और मगहर कस्बे से प्रतिदिन निकलने वाला प्रदूषित जल सीधे आमी नदी में न जाए। इसके साथ ही नदी के दोनों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्रफल में आम, बरगद और अन्य प्रजाति के पौधे लगाने के निर्देश दिए थे। नदी में पानी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अगल-बगल के गांवों के जलाशयों की खुदाई आदि के भी निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
आमी नदी को निर्मल बनाने के लिए एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी ने जो निर्देश दिए थे, उनके अनुरूप प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जैसे ही इसकी मंजूरी मिलेगी, काम शुरू करा दिया जाएगा।
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- अजय कुमार उपाध्याय, प्रभारी एक्सईएन जल निगम
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- एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी ने मांगी थी रिपोर्ट, बनाया गया था डीपीआर
- खलीलाबाद व मगहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का है प्रस्ताव
- नदी के दोनों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्र में होना है पौधरोपण
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। खलीलाबाद और मगहर में बनने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की आस अब भी अधूरी रह गई है। जबकि करीब तीन साल पहले नेेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की पहल पर जिला प्रशासन ने डीपीआर बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन अब तक इस पर मुहर नहीं लग सकी है।
सिद्धार्थनगर के सिकोहरा ताल से निकलकर गोरखपुर जिले में राप्ती नदी में मिलने वाली 135 किलोमीटर लंबी आमी नदी का अधिकांश हिस्सा प्रदूषित हो चुका है। औद्योगिक कचरा और शहरी क्षेत्रों के नालों व प्रदूषित पानी से नदी का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक दशक से समय-समय पर आंदोलन चलता रहा है। अब पूरा मामला एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी के पास है। करीब तीन साल पहले हाईपॉवर कमेटी के चेयरमैन न्यायामूर्ति डीपी सिंह की अगुवाई में एक टीम ने आमी नदी के उद्गम स्थल से गोरखपुर जिले में इसके अंतिम छोर तक का निरीक्षण किया था। इस दौरान खलीलाबाद डाक बंगले पर डीएम की मौजूदगी में कमेटी ने नदी के प्रदूषण के मामले पर चर्चा की थी। टीम ने गंदे नाले का पानी सीधे नदी में गिराने से रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव मांगा था। इसमें खलीलाबाद विकास खंड के चकपिहानी व मगहर के रेलवे पुल के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसमें चकपिहनी में 42 करोड़ व मगहर में 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। इसके पीछे मंशा थी कि खलीलाबाद और मगहर कस्बे से प्रतिदिन निकलने वाला प्रदूषित जल सीधे आमी नदी में न जाए। इसके साथ ही नदी के दोनों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्रफल में आम, बरगद और अन्य प्रजाति के पौधे लगाने के निर्देश दिए थे। नदी में पानी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अगल-बगल के गांवों के जलाशयों की खुदाई आदि के भी निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
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आमी नदी को निर्मल बनाने के लिए एनजीटी की हाईपॉवर कमेटी ने जो निर्देश दिए थे, उनके अनुरूप प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। जैसे ही इसकी मंजूरी मिलेगी, काम शुरू करा दिया जाएगा।
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- अजय कुमार उपाध्याय, प्रभारी एक्सईएन जल निगम