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कागजों में सिमट कर रह गई विद्यालय प्रबंध समिति
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कागजों में सिमट कर रह गई विद्यालय प्रबंध समिति
- दो वर्ष पहले चुने गए थे 1247 विद्यालयों में प्रबंध समिति के अध्यक्ष व पदाधिकारी
- न बैठक और न ही विद्यालय पर हो रहे कार्यों का सत्यापन हुआ
-जिला समन्वयक के निरीक्षण में लगातार खुल रहा मामला
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। परिषदीय स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दो वर्ष पहले चुने गए विद्यालय प्रबंध समिति के पदाधिकारियों का कार्य सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया है। समिति के पदाधिकारी न विद्यालय आते हैं और न ही विद्यालयों में हो कार्यों पर अपनी राय देते हैं। यह सब मामला जिला समन्वयक के निरीक्षण में खुल रहा है।
दो वर्ष पहले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे-मील, ड्रेस, किताबों का वितरण, विद्यालय के मद में किए जाने वाले कार्य समेत अन्य सभी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विद्यालय प्रबंध समिति का गठन किया गया, जिसमें विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र के अभिभावक में से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व 15 सदस्यों का चुनाव हुआ। जिले में 1236 स्कूलों में विद्यालय प्रबंध समिति चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य चुने गए। इन सदस्यों को प्रशिक्षण देकर उनका दायित्व भी बताया गया, लेकिन ये पदाधिकारी अपने दायित्वों को भूल गए। इनका कार्य सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया है। विद्यालय कोविड के पश्चात जब खुले तो प्रधानाध्यापकों के जरिए इस कार्य में कोई रुचि नहीं ली गई। जिसके कारण प्रत्येक माह के पहले बुधवार को निर्धारित प्रबंध समितियों की बैठक जमीनी स्तर पर नहीं दिखाई दे रही है। जिससे बच्चों के चिह्नांकन नामांकन एवं अन्य गतिविधियों में एसएमसी की भूमिका शून्य हो गई है।
जिला समन्वयक समेकित शिक्षा रजनीश वैद्यनाथ के निरीक्षण में यह मामला प्रकाश में आया है। जबकि शासन की मंशा के अनुसार विद्यालय विकास योजना का निर्माण विद्यालय प्रबंध समिति द्वारा ही किया जाना है। डीसी समेकित शिक्षा रजनीश वैद्यनाथ ने बताया कि किसी भी विद्यालय में प्रबंध समिति सक्रिय नहीं है। जिले स्तर से विद्यालय प्रबंध समिति का रजिस्टर भी दिया गया है। अनुश्रवण उसी पंजिका पर होना है, लेकिन वह रजिस्टर दिखाई नहीं दे रहा है। संवाद
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विद्यालय प्रबंध समिति को फिर से सक्रिय किया जाएगा, इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक माह के पहले बुधवार को किसी न किसी विद्यालय पर एसएमसी की बैठक में स्वयं प्रतिभाग करें। इसके साथ ही इसकी सूचना कार्यालय को भी उपलब्ध कराएं।
गिरीश कुमार सिंह, प्रभारी बीएसए
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- दो वर्ष पहले चुने गए थे 1247 विद्यालयों में प्रबंध समिति के अध्यक्ष व पदाधिकारी
- न बैठक और न ही विद्यालय पर हो रहे कार्यों का सत्यापन हुआ
-जिला समन्वयक के निरीक्षण में लगातार खुल रहा मामला
पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। परिषदीय स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए दो वर्ष पहले चुने गए विद्यालय प्रबंध समिति के पदाधिकारियों का कार्य सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया है। समिति के पदाधिकारी न विद्यालय आते हैं और न ही विद्यालयों में हो कार्यों पर अपनी राय देते हैं। यह सब मामला जिला समन्वयक के निरीक्षण में खुल रहा है।
दो वर्ष पहले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे-मील, ड्रेस, किताबों का वितरण, विद्यालय के मद में किए जाने वाले कार्य समेत अन्य सभी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए विद्यालय प्रबंध समिति का गठन किया गया, जिसमें विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र के अभिभावक में से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व 15 सदस्यों का चुनाव हुआ। जिले में 1236 स्कूलों में विद्यालय प्रबंध समिति चुनाव में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य चुने गए। इन सदस्यों को प्रशिक्षण देकर उनका दायित्व भी बताया गया, लेकिन ये पदाधिकारी अपने दायित्वों को भूल गए। इनका कार्य सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया है। विद्यालय कोविड के पश्चात जब खुले तो प्रधानाध्यापकों के जरिए इस कार्य में कोई रुचि नहीं ली गई। जिसके कारण प्रत्येक माह के पहले बुधवार को निर्धारित प्रबंध समितियों की बैठक जमीनी स्तर पर नहीं दिखाई दे रही है। जिससे बच्चों के चिह्नांकन नामांकन एवं अन्य गतिविधियों में एसएमसी की भूमिका शून्य हो गई है।
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जिला समन्वयक समेकित शिक्षा रजनीश वैद्यनाथ के निरीक्षण में यह मामला प्रकाश में आया है। जबकि शासन की मंशा के अनुसार विद्यालय विकास योजना का निर्माण विद्यालय प्रबंध समिति द्वारा ही किया जाना है। डीसी समेकित शिक्षा रजनीश वैद्यनाथ ने बताया कि किसी भी विद्यालय में प्रबंध समिति सक्रिय नहीं है। जिले स्तर से विद्यालय प्रबंध समिति का रजिस्टर भी दिया गया है। अनुश्रवण उसी पंजिका पर होना है, लेकिन वह रजिस्टर दिखाई नहीं दे रहा है। संवाद
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विद्यालय प्रबंध समिति को फिर से सक्रिय किया जाएगा, इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक माह के पहले बुधवार को किसी न किसी विद्यालय पर एसएमसी की बैठक में स्वयं प्रतिभाग करें। इसके साथ ही इसकी सूचना कार्यालय को भी उपलब्ध कराएं।
गिरीश कुमार सिंह, प्रभारी बीएसए