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लोकायुक्त के निर्देश पर हुई जांच में 10 .44 लाख का घपला उजागर
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लोकायुक्त के निर्देश पर हुई जांच में 10 .44 लाख का घपला उजागर
संतकबीरनगर। लोकायुक्त के निर्देश पर सेमरियावां विकास खंड के बिगरामीर में हुई जांच में 10,44,089 रुपये की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है। जांच में पाया गया कि ऐसे कई कार्य अभिलेखों में दर्शाए गए हैं, जो धरातल पर मिले ही नहीं। ऐसे में बिना कार्य कराए ही भुगतान लिया गया। जांच में पूर्व प्रधान और संबंधित सचिव आरोपित पाए गए। डीएम ने पूर्व प्रधान को नोटिस जारी करके 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी।
डीएम दिव्या मित्तल ने बताया कि सेमरियावां विकास खंड के बिगरामीर निवासी असलम ने लोकायुक्त से गांव में कराए गए विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायत की थी। लोकायुक्त के निर्देश के क्रम में जांच टीम गठित की गई। टीम में अधिशाषी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग, वरिष्ठ कोषाधिकारी एवं सहायक विकास अधिकारी पंचायत को शामिल किया गया। टीम ने प्रकरण की विंदुवार जांच की। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2016-17 में 14वां वित्त योजना के अंतर्गत स्वीकृत पुलिया से हाफिज जमाल के खेत तक ढक्कन सहित नाला निर्माण का निरीक्षण किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मात्र 30 मीटर ही नाला निर्माण कराया गया है तथा उस पर ढक्कन भी नहीं लगाया गया है।
ग्राम पंचायत पंचायत की ओर से गठित आंगणन को देखा गया। उसमें 70 मीटर नाला निर्माण एवं ढक्कन का कार्य कराए जाने का उल्लेख किया गया है। निरीक्षण के वक्त प्रधान के प्रतिनिधि एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में नाले की माप कराई गई, जो 57 .5 मीटर लंबाई में पाई गई। उसमें से मात्र 30 मीटर नाले का निर्माण और छह-सात ढक्कन ग्राम पंचायत की ओर से लगाया गया है। हाफिज जमाल की ओर से अपने घर के सामने स्वयं के खर्च से नाला पर ह्यूम पाइप एवं आरसीसी ढक्कन लगाया गया है। ग्राम प्रधान ने नाले पर व्यय धनराशि का अनियमित रूप से आहरण कर व्यय किया गया है। उसका मूल्यांकन डीआरडीए के अवर अभियंता से कराया गया। अवर अभियंता की आख्या में उल्लेख है कि पत्रावली में संलग्न माप पुस्तिका के अनुसार 70 मीटर माप का अंकन किया गया है, जिस पर 3,64,226 रुपये का भुगतान किया गया है। मौके पर 30 मीटर ही नाला निर्माण पाया गया। 30 मीटर नाला निर्माण की लागत 1,56,090 रुपये हो रही है। इस प्रकार 2,08,136 रुपये का बिना कार्य कराए भुगतान कराया गया है।
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राज्य वित्त से वर्ष 2018-19 में असदुल हक के घर से झिन्नू के खेत तक आरसीसी ढक्कन का निर्माण कराए बिना ही 1,70,893 रुपये आहरित किए गए। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2018-19 में चौदहा वित्त से रोजई के घर से बड़का के घर तक नाली और इंटरलॉकिग कार्य दर्शाया गया। प्रधान की ओर से बताया गया कि नाली बनी है, लेकिन विवाद के कारण इंटर लॉकिंग कार्य नहीं कराया गया। 40 मीटर तक कार्य दर्शाकर 20 मीटर ही कराया गया। कराए गए कार्य की लागत 82000 रुपये हो रही है। बिना कार्य कराए ही 82024 रुपये का भुगतान कराया गया है। इसी तरह बड़ी मस्जिद से आरफा के घर तक नाली और ढक्कन कार्य कराए बिना ही 1,67,000 रुपये आहरित कर लिया गया, जो वित्तीय अनियमितता है। इसी तरह कलाम की जमीन से गुलाम के घर तक तक सीसी रोड निर्माण का कार्य जांच के समय नहीं पाया गया।
2,34,036 रुपये का अनियमित भुगतान लिया गया है। इसी तरह सीसी रोड मरम्मत एक बार कराकर दो बार भुगतान लिया गया है। इस पर 1,82000 रुपये की धनराशि अनियमित तरीके से आहरित की गई है। डीएम ने बताया कि जांच में पूर्व प्रधान शकीना खातून और संबंधित सचिव आरोपित पाए गए हैं। पूर्व प्रधान को नोटिस जारी करके 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं देने पर अनियमितता की धनराशि भू राजस्व की भांति वसूल कराई जाएगी और इसके साथ ही अन्य कार्रवाई भी की जाएगी।
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संतकबीरनगर। लोकायुक्त के निर्देश पर सेमरियावां विकास खंड के बिगरामीर में हुई जांच में 10,44,089 रुपये की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है। जांच में पाया गया कि ऐसे कई कार्य अभिलेखों में दर्शाए गए हैं, जो धरातल पर मिले ही नहीं। ऐसे में बिना कार्य कराए ही भुगतान लिया गया। जांच में पूर्व प्रधान और संबंधित सचिव आरोपित पाए गए। डीएम ने पूर्व प्रधान को नोटिस जारी करके 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी।
डीएम दिव्या मित्तल ने बताया कि सेमरियावां विकास खंड के बिगरामीर निवासी असलम ने लोकायुक्त से गांव में कराए गए विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायत की थी। लोकायुक्त के निर्देश के क्रम में जांच टीम गठित की गई। टीम में अधिशाषी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग, वरिष्ठ कोषाधिकारी एवं सहायक विकास अधिकारी पंचायत को शामिल किया गया। टीम ने प्रकरण की विंदुवार जांच की। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2016-17 में 14वां वित्त योजना के अंतर्गत स्वीकृत पुलिया से हाफिज जमाल के खेत तक ढक्कन सहित नाला निर्माण का निरीक्षण किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मात्र 30 मीटर ही नाला निर्माण कराया गया है तथा उस पर ढक्कन भी नहीं लगाया गया है।
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ग्राम पंचायत पंचायत की ओर से गठित आंगणन को देखा गया। उसमें 70 मीटर नाला निर्माण एवं ढक्कन का कार्य कराए जाने का उल्लेख किया गया है। निरीक्षण के वक्त प्रधान के प्रतिनिधि एवं ग्रामवासियों की उपस्थिति में नाले की माप कराई गई, जो 57 .5 मीटर लंबाई में पाई गई। उसमें से मात्र 30 मीटर नाले का निर्माण और छह-सात ढक्कन ग्राम पंचायत की ओर से लगाया गया है। हाफिज जमाल की ओर से अपने घर के सामने स्वयं के खर्च से नाला पर ह्यूम पाइप एवं आरसीसी ढक्कन लगाया गया है। ग्राम प्रधान ने नाले पर व्यय धनराशि का अनियमित रूप से आहरण कर व्यय किया गया है। उसका मूल्यांकन डीआरडीए के अवर अभियंता से कराया गया। अवर अभियंता की आख्या में उल्लेख है कि पत्रावली में संलग्न माप पुस्तिका के अनुसार 70 मीटर माप का अंकन किया गया है, जिस पर 3,64,226 रुपये का भुगतान किया गया है। मौके पर 30 मीटर ही नाला निर्माण पाया गया। 30 मीटर नाला निर्माण की लागत 1,56,090 रुपये हो रही है। इस प्रकार 2,08,136 रुपये का बिना कार्य कराए भुगतान कराया गया है।
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राज्य वित्त से वर्ष 2018-19 में असदुल हक के घर से झिन्नू के खेत तक आरसीसी ढक्कन का निर्माण कराए बिना ही 1,70,893 रुपये आहरित किए गए। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2018-19 में चौदहा वित्त से रोजई के घर से बड़का के घर तक नाली और इंटरलॉकिग कार्य दर्शाया गया। प्रधान की ओर से बताया गया कि नाली बनी है, लेकिन विवाद के कारण इंटर लॉकिंग कार्य नहीं कराया गया। 40 मीटर तक कार्य दर्शाकर 20 मीटर ही कराया गया। कराए गए कार्य की लागत 82000 रुपये हो रही है। बिना कार्य कराए ही 82024 रुपये का भुगतान कराया गया है। इसी तरह बड़ी मस्जिद से आरफा के घर तक नाली और ढक्कन कार्य कराए बिना ही 1,67,000 रुपये आहरित कर लिया गया, जो वित्तीय अनियमितता है। इसी तरह कलाम की जमीन से गुलाम के घर तक तक सीसी रोड निर्माण का कार्य जांच के समय नहीं पाया गया।
2,34,036 रुपये का अनियमित भुगतान लिया गया है। इसी तरह सीसी रोड मरम्मत एक बार कराकर दो बार भुगतान लिया गया है। इस पर 1,82000 रुपये की धनराशि अनियमित तरीके से आहरित की गई है। डीएम ने बताया कि जांच में पूर्व प्रधान शकीना खातून और संबंधित सचिव आरोपित पाए गए हैं। पूर्व प्रधान को नोटिस जारी करके 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं देने पर अनियमितता की धनराशि भू राजस्व की भांति वसूल कराई जाएगी और इसके साथ ही अन्य कार्रवाई भी की जाएगी।