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Sant Kabir Nagar News: सरयू के जलस्तर में कमी जारी, ढोलबजा मार्ग को काट रही नदी, ग्रामीण चिंतित
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ढोलबजा गांव जाने वाले रास्ते को काटती सरयू नदी। संवाद
लोहरैया। सरयू नदी का जलस्तर कम हो रहा है। हालांकि बाढ़ग्रस्त गांवों में लोगों की दुश्वारियां बरकरार हैं। एमबीडी बांध से ढोलबजा जाने वाले रास्ते को नदी काट रही है। रास्ते पर लगाई गई बोरियां धीरे- धीरे नदी में समा रही हैं। नदी कभी भी सड़क को काटकर ढोलबजा और भौवापार गांव को निशाना बना सकती है। धनघटा क्षेत्र के गांवों में जगह-जगह बाढ़ का पानी जमा होने से संक्रामक रोगों का भी खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से गांवों में दवाओं के छिड़काव और आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। चकदहा, खड़कपुर, कंचनपुर, भौवापार, गायघाट, सियरकला सहित कई गांव प्रतिवर्ष सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित होते हैं। जलस्तर कम होने के बाद भी गांवों में जमा पानी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है।
ग्रामीण पूरन कुमार, चंद्रभान, सत्य प्रकाश, रमेश आदि का कहना है कि सड़क में पर्याप्त पुलिया और पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण बाढ़ का पानी गांवों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। जगह-जगह जमा पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। बाढ़ का पानी खेतों में जमा रहने से फसलों पर भी संकट खड़ा हो गया है। किसानों की चिंता बढ़ गई है कि यदि पानी जल्द नहीं निकला तो खड़ी फसलें खराब हो सकती हैं।
वहीं कई ग्रामीणों के घरों में रखा पशुओं का चारा भी भीग गया है, जिससे पशुपालकों के सामने चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। एसडीएम विरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने बताया कि नदी का जल स्तर घट रहा है। फिर भी प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।
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विद्यालयों में पढ़ाई बाधित, भविष्य की चिंता ः बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। चकदहा, गायघाट, सियरकला समेत कई गांवों के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्राथमिक विद्यालय गायघाट और प्राथमिक विद्यालय सियरकला बंद हो गए हैं।
गांवों और विद्यालयों तक जाने वाले रास्तों में पानी भरा होने तथा संक्रामक रोगों के डर से अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भेजने से कतरा रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
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ग्रामीण पूरन कुमार, चंद्रभान, सत्य प्रकाश, रमेश आदि का कहना है कि सड़क में पर्याप्त पुलिया और पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण बाढ़ का पानी गांवों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। जगह-जगह जमा पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। बाढ़ का पानी खेतों में जमा रहने से फसलों पर भी संकट खड़ा हो गया है। किसानों की चिंता बढ़ गई है कि यदि पानी जल्द नहीं निकला तो खड़ी फसलें खराब हो सकती हैं।
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वहीं कई ग्रामीणों के घरों में रखा पशुओं का चारा भी भीग गया है, जिससे पशुपालकों के सामने चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। एसडीएम विरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने बताया कि नदी का जल स्तर घट रहा है। फिर भी प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।
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विद्यालयों में पढ़ाई बाधित, भविष्य की चिंता ः बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। चकदहा, गायघाट, सियरकला समेत कई गांवों के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्राथमिक विद्यालय गायघाट और प्राथमिक विद्यालय सियरकला बंद हो गए हैं।
गांवों और विद्यालयों तक जाने वाले रास्तों में पानी भरा होने तथा संक्रामक रोगों के डर से अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भेजने से कतरा रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।