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Sant Kabir Nagar News: खतरे के निशान की ओर बढ़ रही सरयू, 24 घंटे में 300 सेमी बढ़ा पानी
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मेंहदावल में बेलौली बांध का निरीक्षण करते एसडीएम। संवाद
धनघटा/ रोसयाबाजार। मैदानी व पहाड़ी इलाकों में बारिश का असर अब नदियों के जलस्तर पर दिखने लगा है। धनघटा में सरयू के जलस्तर में 24 घंटे में 300 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 800 सेमी नीचे है। पानी में इसी तरह बढ़ोतरी हुई तो माना जा रहा है कि नदी एक-दो दिन में खतरे के निशान को पार कर जाएगी।
धनघटा में वर्ष 2013 को छोड़ दिया जाए तो इधर के 13 वर्षों में सरयू ने एमबीडी बांध को पार नहीं किया है लेकिन बांध और नदी के बीच बसे गांवों में तबाही लाई है। नदी का जलस्तर बिड़हर घाट पर जब खतरे के निशान के करीब पहुंचता है तो नदी का पानी एमबीडी बांध के किनारे पहुंच कर बांध पर दबाव बनाना शुरू कर देता है। बंधे से दक्षिण में बसे अधिकतर गांव में जलभराव हो जाता है। वहां के लोग बांध पर शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं।
इस वर्ष अभी नदी का पानी काफी नीचे है लेकिन नदी की तलहटी में कुछ जगहों पर बोई गई धान की फसल डूब गई है। नदी का पानी धीरे-धीरे गायघाट दक्षिणी, ढोलबजा, गुनवतिया, चकदहा, सियरकला, दौलतपुर, खालेपुरवा, पटौआ, आगापुर गुलरिहा आदि गांवों के पास पहुंच रहा है।
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गांव वालों का कहना है कि नदी ने खतरे के निशान को पार किया तो बाढ़ का पानी गांव में घुस सकता है। ग्रामीण राम अजोर, दीनदयाल, ओमकार, राजाराम, लालमन, लालचंद आदि का कहना है कि पहले गर्मी के समय ही बंधे की मरम्मत की जाती थी, लेकिन इधर कई वर्षों से जब बाढ़ का समय करीब आता है तो बांध का मरम्मत होता है।
इस संबंध में अवर अभियंता अर्चना गुप्ता का कहना है कि नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है लेकिन बांध को कोई खतरा नहीं है। बांध पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत है।
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रोसयाबाजार इलाके में सब्जी की खेती पर गहराया संकट
रोसयाबाजार। धनघटा क्षेत्र के दक्षिणी इलाके में सरयू के किनारे बसने वाले ग्रामीण परवल, करेला, नेनुआ व अन्य सब्जियां तैयार करके अपना जीवन यापन करते हैं। अब सरयू का जलस्तर बढ़ रहा है। आगे चलकर सब्जी की खेती प्रभावित हो सकती है। यदि जलस्तर बढ़ता है तो खेतों में पानी पहुंच जाएगा। पूरी तरह से फसल बर्बाद हो जाएगी। रामपुर पड़रिया, तेजपुर, हरिवंशपुर, नारायणपुर, छपरा, मगरवी गांवों के किनारे सब्जी की खेती होती है।
पड़रिया के किसान जगदीश निषाद का कहना है कि परवर की खेती के लिए गर्मी में पौधा लगाकर काफी मेहनत करके फसल उगाई जाती है लेकिन जैसे ही नदी का पानी खेत में पहुंचता है या तेज बारिश होने लगती है तो हम लोगों की मेहनत बेकार हो जाती है। यहां तक कि लगाई गई पूंजी बड़ी मुश्किल से निकल पाती है।
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हमारे यहां चार बीघा परवल की खेती हुई है। अभी लगाई हुई पूंजी ही निकल पाई है। सरयू का जलस्तर बढ़ने से एक बार खेत में पानी पहुंच गया था, जिसकी वजह से फल नहीं तैयार हो पा रहे हैं। दवा का छिड़काव किया गया है।
-रामाज्ञा निषाद, तेजपुर
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हम लोगों का जीवन माझा क्षेत्र में खेती करके ही बीतता है। हम लोग हमेशा संकट से ही जूझते हैं। कभी छुट्टा जानवरों से तो कभी सरयू के बढ़ते जल स्तर से फसलें नष्ट हो जाती हैं।
-दलसिंगार निषाद, पंडरिया
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राप्ती घटाव पर, एहतियातन बाढ़ चौकियों को सक्रिय रहने के निर्देश
मेंहदावल। राप्ती का जलस्तर लगातार घट रहा है। इससे तटवर्ती गांवों के लोगों को राहत मिली है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर 76.71 मीटर दर्ज किया गया, जबकि बृहस्पतिवार को यह 77.20 मीटर था। दो दिनों से जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर के घटने से काफी राहत मिली है। नदी अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही है। जलस्तर घटने के बावजूद प्रशासन सतर्क है। शुक्रवार को एसडीएम मेंहदावल सुधीर कुमार ने डीएम के निर्देश पर करमैनी बेलौली बांध का निरीक्षण किया। उन्होंने बांध पर चल रहे सुदृढ़ीकरण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता को बारीकी से परखा।
एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बांध पर चल रहे सभी कार्य एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्य मानक और गुणवत्ता के अनुसार ही होना चाहिए।
एसडीएम ने कहा कि नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। अभी खतरे की कोई बात नहीं है लेकिन एहतियात के तौर पर बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखा जाए। ड्रेनेज और सिंचाई विभाग की टीमों को तटबंधों की नियमित गश्त करते रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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धनघटा में वर्ष 2013 को छोड़ दिया जाए तो इधर के 13 वर्षों में सरयू ने एमबीडी बांध को पार नहीं किया है लेकिन बांध और नदी के बीच बसे गांवों में तबाही लाई है। नदी का जलस्तर बिड़हर घाट पर जब खतरे के निशान के करीब पहुंचता है तो नदी का पानी एमबीडी बांध के किनारे पहुंच कर बांध पर दबाव बनाना शुरू कर देता है। बंधे से दक्षिण में बसे अधिकतर गांव में जलभराव हो जाता है। वहां के लोग बांध पर शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं।
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इस वर्ष अभी नदी का पानी काफी नीचे है लेकिन नदी की तलहटी में कुछ जगहों पर बोई गई धान की फसल डूब गई है। नदी का पानी धीरे-धीरे गायघाट दक्षिणी, ढोलबजा, गुनवतिया, चकदहा, सियरकला, दौलतपुर, खालेपुरवा, पटौआ, आगापुर गुलरिहा आदि गांवों के पास पहुंच रहा है।
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गांव वालों का कहना है कि नदी ने खतरे के निशान को पार किया तो बाढ़ का पानी गांव में घुस सकता है। ग्रामीण राम अजोर, दीनदयाल, ओमकार, राजाराम, लालमन, लालचंद आदि का कहना है कि पहले गर्मी के समय ही बंधे की मरम्मत की जाती थी, लेकिन इधर कई वर्षों से जब बाढ़ का समय करीब आता है तो बांध का मरम्मत होता है।
इस संबंध में अवर अभियंता अर्चना गुप्ता का कहना है कि नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है लेकिन बांध को कोई खतरा नहीं है। बांध पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत है।
रोसयाबाजार इलाके में सब्जी की खेती पर गहराया संकट
रोसयाबाजार। धनघटा क्षेत्र के दक्षिणी इलाके में सरयू के किनारे बसने वाले ग्रामीण परवल, करेला, नेनुआ व अन्य सब्जियां तैयार करके अपना जीवन यापन करते हैं। अब सरयू का जलस्तर बढ़ रहा है। आगे चलकर सब्जी की खेती प्रभावित हो सकती है। यदि जलस्तर बढ़ता है तो खेतों में पानी पहुंच जाएगा। पूरी तरह से फसल बर्बाद हो जाएगी। रामपुर पड़रिया, तेजपुर, हरिवंशपुर, नारायणपुर, छपरा, मगरवी गांवों के किनारे सब्जी की खेती होती है।
पड़रिया के किसान जगदीश निषाद का कहना है कि परवर की खेती के लिए गर्मी में पौधा लगाकर काफी मेहनत करके फसल उगाई जाती है लेकिन जैसे ही नदी का पानी खेत में पहुंचता है या तेज बारिश होने लगती है तो हम लोगों की मेहनत बेकार हो जाती है। यहां तक कि लगाई गई पूंजी बड़ी मुश्किल से निकल पाती है।
हमारे यहां चार बीघा परवल की खेती हुई है। अभी लगाई हुई पूंजी ही निकल पाई है। सरयू का जलस्तर बढ़ने से एक बार खेत में पानी पहुंच गया था, जिसकी वजह से फल नहीं तैयार हो पा रहे हैं। दवा का छिड़काव किया गया है।
-रामाज्ञा निषाद, तेजपुर
हम लोगों का जीवन माझा क्षेत्र में खेती करके ही बीतता है। हम लोग हमेशा संकट से ही जूझते हैं। कभी छुट्टा जानवरों से तो कभी सरयू के बढ़ते जल स्तर से फसलें नष्ट हो जाती हैं।
-दलसिंगार निषाद, पंडरिया
राप्ती घटाव पर, एहतियातन बाढ़ चौकियों को सक्रिय रहने के निर्देश
मेंहदावल। राप्ती का जलस्तर लगातार घट रहा है। इससे तटवर्ती गांवों के लोगों को राहत मिली है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर 76.71 मीटर दर्ज किया गया, जबकि बृहस्पतिवार को यह 77.20 मीटर था। दो दिनों से जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर के घटने से काफी राहत मिली है। नदी अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही है। जलस्तर घटने के बावजूद प्रशासन सतर्क है। शुक्रवार को एसडीएम मेंहदावल सुधीर कुमार ने डीएम के निर्देश पर करमैनी बेलौली बांध का निरीक्षण किया। उन्होंने बांध पर चल रहे सुदृढ़ीकरण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता को बारीकी से परखा।
एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बांध पर चल रहे सभी कार्य एक सप्ताह के भीतर हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्य मानक और गुणवत्ता के अनुसार ही होना चाहिए।
एसडीएम ने कहा कि नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। अभी खतरे की कोई बात नहीं है लेकिन एहतियात के तौर पर बाढ़ चौकियों को सक्रिय रखा जाए। ड्रेनेज और सिंचाई विभाग की टीमों को तटबंधों की नियमित गश्त करते रहने के निर्देश दिए गए हैं।