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न्यायिक अधिकारी ने जताया जान के खतरे का अंदेशा
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न्यायिक अधिकारी ने जताया जान के खतरे का अंदेशा
एसपी को पत्र भेजकर जांच कराके कार्रवाई की बात कहीं
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले के एक न्यायिक अधिकारी ने खुद की जान को खतरा बताया है। बुधवार को एसपी को पत्र भेेजकर उन्होंने खुद के साथ किसी बड़ी साजिश व जान-माल की क्षति होने के संबंध में जांच और कार्रवाई करने को कहा है।
पत्र में न्यायिक अधिकारी ने कहा है कि मैं अपने वाहन से गोरखपुर से खलीलाबाद आता-जाता हूं। मैंने अपनी कार सर्विस कराने के लिए गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज रोड स्थित एक सेंटर पर 21 फरवरी को भेजी थी। कार उसी दिन मिल गई, लेकिन कार लहराकर चल रही थी। जब उसे संतकबीरनगर के रास्ते पर मगहर में मैकेनिक को दिखाया तो उसने बताया कि कार के दो पहिए में हवा का दबाव 100 पीएसआई है, जबकि 32 होना चाहिए। टायर फटने की स्थिति में था। पुन: 27 फरवरी को कार सर्विस सेंटर में भेजी गई तो वहां के कर्मचारी ने बताया कि हवा वाली मशीन खराब थी। ऐसे में हवा नहीं भरी गई थी, जबकि कार को दुबारा सर्विस सेंटर पर भेजे जाने पर अत्यधिक हवा भरने से रिम क्षतिग्रस्त हो गया। कार की विंडशील्ड पर जज का स्टीकर लगा था तथा सर्विस सेंटर के मैनेजर व कर्मचारियों को पता था कि यह कार न्यायिक अधिकारी की है। ऐसे में सर्विस सेंटर के मैनेजर व कर्मचारी ने जान-बूझकर कार को दुर्घटनाग्रस्त करने एवं जानमाल को क्षति पहुंचाने के लिए ऐसा कृत्य किया है। उन्होंने बताया कि उनके न्यायालय में हत्या एवं गंभीर अपराधों से संबंधित मामले लंबित हैं। ऐसे में इसकी जांच कराके उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
कोट :
न्यायिक अधिकारी की ओर से भेजा गया पत्र अभी नहीं मिला है। जैसे ही पत्र प्राप्त होगा, मामले की जांच कराएंगे। जांच के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. कौस्तुभ, एसपी
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एसपी को पत्र भेजकर जांच कराके कार्रवाई की बात कहीं
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले के एक न्यायिक अधिकारी ने खुद की जान को खतरा बताया है। बुधवार को एसपी को पत्र भेेजकर उन्होंने खुद के साथ किसी बड़ी साजिश व जान-माल की क्षति होने के संबंध में जांच और कार्रवाई करने को कहा है।
पत्र में न्यायिक अधिकारी ने कहा है कि मैं अपने वाहन से गोरखपुर से खलीलाबाद आता-जाता हूं। मैंने अपनी कार सर्विस कराने के लिए गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज रोड स्थित एक सेंटर पर 21 फरवरी को भेजी थी। कार उसी दिन मिल गई, लेकिन कार लहराकर चल रही थी। जब उसे संतकबीरनगर के रास्ते पर मगहर में मैकेनिक को दिखाया तो उसने बताया कि कार के दो पहिए में हवा का दबाव 100 पीएसआई है, जबकि 32 होना चाहिए। टायर फटने की स्थिति में था। पुन: 27 फरवरी को कार सर्विस सेंटर में भेजी गई तो वहां के कर्मचारी ने बताया कि हवा वाली मशीन खराब थी। ऐसे में हवा नहीं भरी गई थी, जबकि कार को दुबारा सर्विस सेंटर पर भेजे जाने पर अत्यधिक हवा भरने से रिम क्षतिग्रस्त हो गया। कार की विंडशील्ड पर जज का स्टीकर लगा था तथा सर्विस सेंटर के मैनेजर व कर्मचारियों को पता था कि यह कार न्यायिक अधिकारी की है। ऐसे में सर्विस सेंटर के मैनेजर व कर्मचारी ने जान-बूझकर कार को दुर्घटनाग्रस्त करने एवं जानमाल को क्षति पहुंचाने के लिए ऐसा कृत्य किया है। उन्होंने बताया कि उनके न्यायालय में हत्या एवं गंभीर अपराधों से संबंधित मामले लंबित हैं। ऐसे में इसकी जांच कराके उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
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कोट :
न्यायिक अधिकारी की ओर से भेजा गया पत्र अभी नहीं मिला है। जैसे ही पत्र प्राप्त होगा, मामले की जांच कराएंगे। जांच के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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- डॉ. कौस्तुभ, एसपी