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Sant Kabir Nagar News: 25 साल पहले बने जिले में अब तक नहीं बन सका रोडवेज बस अड्डा
Sat, 17 Jun 2023 11:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 17 Jun 2023 11:06 PM IST
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मेंहदावल बाईपास पर चिलचिलाती धूप में रोडवेस बस में बैठने के लिए लगी भीड़।संवाद
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संतकबीरनगर। तापमान लगातार बढ़ रहा है। पारा 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। तेज धूप व तपिश के बीच खुले आसमान के नीचे यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। यह यात्रियों के लिए किसी यातना से कम नहीं है। साथ ही न तो पानी का इंतजाम है और न ही बैठने की व्यवस्था। ऐसे में प्रतिदिन मुसाफिरों को दुर्दशा झेलनी पड़ रही है।
जिले का सृजन हुए करीब 25 साल गुजर गए हैं, लेकिन जनपद मुख्यालय पर रोडवेज बस अड्डा अभी तक नहीं बन पाया है। मेंहदावल बाईपास पर अस्थायी बस स्टैंड बनाया गया है। यहां से गोरखपुर व बस्ती की ओर जाने वाले यात्रियों को बस पकड़ने के लिए आना पड़ता है, लेकिन यहां यात्रियों की सुविधा के लिए कोई भी सुविधा नहीं है। 43 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच यात्रियों को खुले आसमान के नीचे बसों व अन्य वाहनों का इंतजार करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में यात्रियों को इसके चलते दुर्दशा झेलनी पड़ रही है। प्रतिदिन यात्री परेशानी झेल रहे हैं।
खासकर जो लोग परिवार के साथ यात्रा करते हैं, उन्हें खासी दिक्कत हो रही है। बच्चों व परिवार की महिला के साथ बस के लिए उन्हें तपिश झेलनी पड़ रही है।
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सुबह 11 बजे
मेंहदावल बाईपास के अस्थायी बस स्टैंड पर बस पकड़ने आए यात्री गर्मी से बेहाल दिखे। पसीने से तरबतर हुए लोग सामान के साथ बस में चढ़ने के लिए मशक्कत करते रहे। बसों में भीड़ होने और साथ में परिवार होने के चलते कई बसें छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। लखनऊ जाने के लिए बस पकड़ने आए दिनेश कुमार ने बताया कि काफी देर से खड़े हैं। यहां छाया न होने से तेज धूप झेलनी पड़ रही है। जाना आवश्यक है, ऐसे में मजबूरी में यह यातना झेल रहे हैं।
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दोपहर दो बजे
मेंहदावल बाईपास पर गोरखपुर जाने के लिए बस पकड़ने आए सुनील कुमार ने बताया कि काफी देर से खड़े हैं। बसें भरी हुई आ रही हैं। खुले आसमान के नीचे बस का इंतजार करना काफी मुश्किल हो रहा है। पानी का भी इंतजाम नहीं है। ऐसे में बोतल बंद पानी खरीदने की मजबूरी बनी हुई है। बस डिपो बने तो शायद समस्या से निजात मिल सके।
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बैठने के लिए बेंच तक की नहीं है व्यवस्था
अस्थायी बस स्टैंड पर यात्रियों के बैठने के लिए बेंच तक का इंतजाम नहीं है। ओवरब्रिज के नीचे कुछ बेंच लगी है, लेकिन वहां बैठने का मतलब है कि बस छूट जाए। ऐसे में मजबूरी में खुले आसमान के नीचे खड़े होकर बस पकड़ने का इंतजार करना पड़ रहा है।
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बस डिपो के ड्रेनेज खंड-दो के परिसर को किया गया है चिह्नित
जिला बनने के 25 साल बाद भी बस डिपो की स्थापना नहीं हो सकी है। हालांकि कई जगह जमीन देखी गई, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। वर्तमान में सिंचाई ड्रेनेज खंड-दो के कार्यालय परिसर को बस डिपो के लिए चिह्नित किया गया है, लेकिन इस प्रस्ताव पर भी अब तक शासन की मुहर नहीं लग सकी है। ऐसे में यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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बस डिपो की स्थापना के लिए ड्रेनेज खंड-दो के परिसर को चिह्नित कर परिवहन निदेशालय को भेेजा गया है। जैसे ही शासन से मंजूरी मिलेगी, वैसे ही बस डिपो की स्थापना के लिए कार्य शुरू कराया जाएगा।
-आयुष भटनागर, एआरएम परिवहन
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जिले का सृजन हुए करीब 25 साल गुजर गए हैं, लेकिन जनपद मुख्यालय पर रोडवेज बस अड्डा अभी तक नहीं बन पाया है। मेंहदावल बाईपास पर अस्थायी बस स्टैंड बनाया गया है। यहां से गोरखपुर व बस्ती की ओर जाने वाले यात्रियों को बस पकड़ने के लिए आना पड़ता है, लेकिन यहां यात्रियों की सुविधा के लिए कोई भी सुविधा नहीं है। 43 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच यात्रियों को खुले आसमान के नीचे बसों व अन्य वाहनों का इंतजार करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में यात्रियों को इसके चलते दुर्दशा झेलनी पड़ रही है। प्रतिदिन यात्री परेशानी झेल रहे हैं।
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खासकर जो लोग परिवार के साथ यात्रा करते हैं, उन्हें खासी दिक्कत हो रही है। बच्चों व परिवार की महिला के साथ बस के लिए उन्हें तपिश झेलनी पड़ रही है।
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मेंहदावल बाईपास के अस्थायी बस स्टैंड पर बस पकड़ने आए यात्री गर्मी से बेहाल दिखे। पसीने से तरबतर हुए लोग सामान के साथ बस में चढ़ने के लिए मशक्कत करते रहे। बसों में भीड़ होने और साथ में परिवार होने के चलते कई बसें छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। लखनऊ जाने के लिए बस पकड़ने आए दिनेश कुमार ने बताया कि काफी देर से खड़े हैं। यहां छाया न होने से तेज धूप झेलनी पड़ रही है। जाना आवश्यक है, ऐसे में मजबूरी में यह यातना झेल रहे हैं।
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मेंहदावल बाईपास पर गोरखपुर जाने के लिए बस पकड़ने आए सुनील कुमार ने बताया कि काफी देर से खड़े हैं। बसें भरी हुई आ रही हैं। खुले आसमान के नीचे बस का इंतजार करना काफी मुश्किल हो रहा है। पानी का भी इंतजाम नहीं है। ऐसे में बोतल बंद पानी खरीदने की मजबूरी बनी हुई है। बस डिपो बने तो शायद समस्या से निजात मिल सके।
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बैठने के लिए बेंच तक की नहीं है व्यवस्था
अस्थायी बस स्टैंड पर यात्रियों के बैठने के लिए बेंच तक का इंतजाम नहीं है। ओवरब्रिज के नीचे कुछ बेंच लगी है, लेकिन वहां बैठने का मतलब है कि बस छूट जाए। ऐसे में मजबूरी में खुले आसमान के नीचे खड़े होकर बस पकड़ने का इंतजार करना पड़ रहा है।
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बस डिपो के ड्रेनेज खंड-दो के परिसर को किया गया है चिह्नित
जिला बनने के 25 साल बाद भी बस डिपो की स्थापना नहीं हो सकी है। हालांकि कई जगह जमीन देखी गई, लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। वर्तमान में सिंचाई ड्रेनेज खंड-दो के कार्यालय परिसर को बस डिपो के लिए चिह्नित किया गया है, लेकिन इस प्रस्ताव पर भी अब तक शासन की मुहर नहीं लग सकी है। ऐसे में यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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बस डिपो की स्थापना के लिए ड्रेनेज खंड-दो के परिसर को चिह्नित कर परिवहन निदेशालय को भेेजा गया है। जैसे ही शासन से मंजूरी मिलेगी, वैसे ही बस डिपो की स्थापना के लिए कार्य शुरू कराया जाएगा।
-आयुष भटनागर, एआरएम परिवहन