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रकम मिलनी बंद तो मजदूरी ही सहारा बचा

Sat, 15 Oct 2022 11:24 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 15 Oct 2022 11:24 PM IST
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rakam milanee band to majadooree hee sahaara bacha
रकम मिलनी बंद तो मजदूरी ही सहारा बचा
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कोरोना से पति की मौत के बाद तीन बच्चों की परवरिश की मां को सता रही चिंता
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। कोरोना से पति की मौत हुई तो तीन बच्चों की परवरिश मुश्किल होने लगी। सीएम बाल सेवा योजना से मदद मिली तो उम्मीद जगी। इधर, अप्रैल से रकम मिलना बंद हुआ तो मां की मुसीबत बढ़ गई। बच्चों के पालन पोषण व पढ़ाई का जिम्मा संभालने के लिए जब कोई सहारा नहीं मिला तो वह मजदूरी करने को मजबूर हो गई।
कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली महिला अपनी पीड़ा सुनाते हुए रोने लगी। उसने कहा कि पति की कोरोना से जब मौत हुई तो बड़ा बेटा दस साल और दो बेटियां सात और पांच साल की थीं। पति की मौत के बाद ससुरालियों ने किनारा कर लिया। मायके की भी माली हालत ठीक न होने से बच्चों की परवरिश कठिन होती गई। जब कोई रास्ता नहीं बचा तो दो वक्त की रोटी के इंतजाम के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ा।
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जब अप्रैल से योजना का रकम मिलना बंद हो गया, तब बच्चों को पढ़ने के लिए सरकारी स्कूल में भेजना पड़ा, लेकिन दवा और खानेपीने की व्यवस्था करना मुश्किल होने लगा। कम पढ़ी लिखी होने की वजह और कुछ नहीं कर सकी तो मजदूरी को सहारा बना लिया।
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पिता पर बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी
कोरोना से पत्नी की मौत हुई तो दो मासूम बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी पिता के सिर पर आ गई। परवरिश के लिए रकम की व्यवस्था करने के साथ ही मासूमों की देखभाल का जिम्मा संभालना काफी मुश्किल भरा हो गया। बघौली क्षेत्र के रहने वाले दो मासूम बच्चों के पिता ने कहा कि दिनरात बच्चों की परवरिश की चिंता सताती रहती है। जब पत्नी की मौत हुई तो बड़ा बेटा सात साल व दूसरा पांच साल का था। इस समय छोटा बेटा एलकेजी और बड़ा बेटा प्रथम में पढ़ रहा है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए तैयार करना, फिर वापस आने पर भोजन का इंतजाम करने में वक्त बीत जाता है। आसपास स्थित कुछ कार्य कर बच्चों की पढ़ाई लिखाई करा रहे हैं।उन्होंने बताया कि सीएम बाल योजना का रकम अप्रैल से मिलना बंद हो गया है।
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