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सरयू में लगाई आस्था की डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो/ संतकबीरनगर
Updated Mon, 08 Feb 2016 11:31 PM IST
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सोमवार की भोर से श्रद्धालु जय-जय गंगे का नारा लगाते हुए स्नान करना शुुरू कर दिए। पैदल, साइकिल, बाइक और चार पहिया वाहनों से श्रद्धालुओं का रेला बिड़हर घाट पर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
सरयू के रामबाग, चहोड़ा, मंयदी, चाड़ीपुर समेत अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान किए। बिड़हर घाट पर लगे मेले में बच्चें, महिलाएं और पुरुष खरीदारी किए।
घरेलु सामानों में चौका, बेलना, सेई, माना, सूप, छेदना आदि सामानों की खरीददारी करने में जहां महिलाओं की भीड़ दुकानों पर लगी रही, वही खिलौनाें तथा मिठाईयों की दुकानों पर बच्चों एवं पुरुषों की भीड़ देखी गई।
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सरयू नदी के बिड़हर घाट पर स्नान करने आए पंडित कृपा शंकर पांडेय ने बताया कि माघ महीने में चार प्रमुख स्नान पड़ते है। मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और पूर्णिमा।
इसमें मौनी अमावस्या का महत्व वेद पुराणों में बताया गया है। उन्होंने बताया कि सरयू नदी का भी कम महत्व नहीं हैं। यहां पर भी स्नान, दान करने से बहुत ही पुण्य प्राप्त होता है।
इस दौरान सुरक्षा को लेकर पुलिस काफी सतर्क रही। सीओ और थानाध्यक्ष भारी पुलिस बल के साथ सुबह से ही घाट पर जमे रहे।
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सरयू के रामबाग, चहोड़ा, मंयदी, चाड़ीपुर समेत अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान किए। बिड़हर घाट पर लगे मेले में बच्चें, महिलाएं और पुरुष खरीदारी किए।
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घरेलु सामानों में चौका, बेलना, सेई, माना, सूप, छेदना आदि सामानों की खरीददारी करने में जहां महिलाओं की भीड़ दुकानों पर लगी रही, वही खिलौनाें तथा मिठाईयों की दुकानों पर बच्चों एवं पुरुषों की भीड़ देखी गई।
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सरयू नदी के बिड़हर घाट पर स्नान करने आए पंडित कृपा शंकर पांडेय ने बताया कि माघ महीने में चार प्रमुख स्नान पड़ते है। मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी और पूर्णिमा।
इसमें मौनी अमावस्या का महत्व वेद पुराणों में बताया गया है। उन्होंने बताया कि सरयू नदी का भी कम महत्व नहीं हैं। यहां पर भी स्नान, दान करने से बहुत ही पुण्य प्राप्त होता है।
इस दौरान सुरक्षा को लेकर पुलिस काफी सतर्क रही। सीओ और थानाध्यक्ष भारी पुलिस बल के साथ सुबह से ही घाट पर जमे रहे।