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अपहरण के दोषी को पांच वर्ष की सजा
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अपहरण के दोषी को पांच वर्ष की सजा
- 10,500 रुपये अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल ने अपहरण के दोषी को पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही 10,500 रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया। अर्थदंड न अदा करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि दुधारा क्षेत्र के रहने वाले पीड़ित ने दुधारा पुलिस को 11 मार्च 2007 को प्रार्थना पत्र दिया। उसमें आरोप मढ़ा कि क्षेत्र के ही एक गांव के रहने वाले उसके रिश्तेदार किराए के मकान में बाघनगर में रहते थे। जब वह कहीं बाहर जाता था, तो उसकी पत्नी रिश्तेदार के घर पर रहा करती थी। वह मुंबई में अपना कारोबार करते थे। घर पर उसका लड़का और नाबालिग लड़कियां रहती थीं। 10 मार्च 2007 को वह मुंबई से आने वाले थे कि बस्ती रेलवे स्टेशन पर गए। भोर में 4:30 बजे रिश्तेदार तथा उसकी पत्नी दोनों लड़कियों को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया तथा साथ में जेवरात भी ले गया। मामले में थाना दुधारा में प्रार्थना पत्र देने पर मुकदमा पंजीकृत हुआ। अभियोजन की तरफ से आठ साक्षियों की गवाही कराई गई तथा अभियोजन साक्ष्य से अभियुक्त के विरुद्ध मामला साबित पाए जाने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ला ने दोषी को पांच साल की सजा और 10,500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की अदायगी न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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- 10,500 रुपये अर्थदंड भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल ने अपहरण के दोषी को पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही 10,500 रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया। अर्थदंड न अदा करने पर एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि दुधारा क्षेत्र के रहने वाले पीड़ित ने दुधारा पुलिस को 11 मार्च 2007 को प्रार्थना पत्र दिया। उसमें आरोप मढ़ा कि क्षेत्र के ही एक गांव के रहने वाले उसके रिश्तेदार किराए के मकान में बाघनगर में रहते थे। जब वह कहीं बाहर जाता था, तो उसकी पत्नी रिश्तेदार के घर पर रहा करती थी। वह मुंबई में अपना कारोबार करते थे। घर पर उसका लड़का और नाबालिग लड़कियां रहती थीं। 10 मार्च 2007 को वह मुंबई से आने वाले थे कि बस्ती रेलवे स्टेशन पर गए। भोर में 4:30 बजे रिश्तेदार तथा उसकी पत्नी दोनों लड़कियों को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया तथा साथ में जेवरात भी ले गया। मामले में थाना दुधारा में प्रार्थना पत्र देने पर मुकदमा पंजीकृत हुआ। अभियोजन की तरफ से आठ साक्षियों की गवाही कराई गई तथा अभियोजन साक्ष्य से अभियुक्त के विरुद्ध मामला साबित पाए जाने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ला ने दोषी को पांच साल की सजा और 10,500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की अदायगी न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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