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‘प्रदेश सरकार अपने वादे से मुकर गई’
अमर उजाला ब्यूरो/संतकबीरनगर
Updated Wed, 16 Dec 2015 11:31 PM IST
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राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर संजय कुमार निषाद की रिहाई व निषाद समाज को आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर बुधवार को भी कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया।
आंदोलनकारियों ने कहा कि मगहर के कसरवल में हुई घटना में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर संजय कुमार निषाद की गिरफ्तारी की गई है, जबकि कई अन्य कार्यकर्ता पहले से ही जेल में बंद हैं।
ऐसे में जब तक नेताओं व कार्यकर्ताओं की रिहाई नहीं हो जाती आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार अपने वादे से मुकर गई है।
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सरकार ने जांच कर मुकदमा वापस लेने की बात कहीं थी, लेकिन अब कोई सुनने को तैयार नहीं है। जिससे पुन:आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा है।
राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के कार्यकर्ता बलिराम निषाद, सुबाष चंद्र निषाद, धर्मेंद्र निषाद आदि के नेतृत्व में निषाद समाज के लोग बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन किया।
यहां पर वक्ताओं ने कहा कि निषाद समाज को आरक्षण पाने का हक है। यह समाज शैक्षिक, राजनीतिक, आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा है। ऐसे में निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए और उन्हें सुविधाएं प्रदान की जाए।
आंदोलनकारियों ने कहा कि मगहर के कसरवल में हुई घटना की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। आंदोलन के दौरान जिन लोगों के वाहन पुलिस उठा ले गई थी, उन्हें रिलीज किया जाए। प्रदर्शन में महाबल निषाद, बनारसी लाल, संतराम निषाद, रामजेत निषाद, रामहित साहनी, अरविंद निषाद, रामजीत निषाद, बृजलाल निषाद, जसवंत निषाद, ठाकुर प्रसाद निषाद, इंद्रजीत निषाद, ओम प्रकाश निषाद, अनारपति, मोलती देवी, चीनी निषाद, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मेवाती निषाद, कलावती निषाद, सुधा, सुमित्रा, सरिता, सुभावती, गुजराती, विमलावती सहित तमाम लोग शामिल रहे।
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आंदोलनकारियों ने कहा कि मगहर के कसरवल में हुई घटना में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर संजय कुमार निषाद की गिरफ्तारी की गई है, जबकि कई अन्य कार्यकर्ता पहले से ही जेल में बंद हैं।
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ऐसे में जब तक नेताओं व कार्यकर्ताओं की रिहाई नहीं हो जाती आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार अपने वादे से मुकर गई है।
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सरकार ने जांच कर मुकदमा वापस लेने की बात कहीं थी, लेकिन अब कोई सुनने को तैयार नहीं है। जिससे पुन:आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा है।
राष्ट्रीय निषाद एकता परिषद के कार्यकर्ता बलिराम निषाद, सुबाष चंद्र निषाद, धर्मेंद्र निषाद आदि के नेतृत्व में निषाद समाज के लोग बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन किया।
यहां पर वक्ताओं ने कहा कि निषाद समाज को आरक्षण पाने का हक है। यह समाज शैक्षिक, राजनीतिक, आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा है। ऐसे में निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किया जाए और उन्हें सुविधाएं प्रदान की जाए।
आंदोलनकारियों ने कहा कि मगहर के कसरवल में हुई घटना की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। आंदोलन के दौरान जिन लोगों के वाहन पुलिस उठा ले गई थी, उन्हें रिलीज किया जाए। प्रदर्शन में महाबल निषाद, बनारसी लाल, संतराम निषाद, रामजेत निषाद, रामहित साहनी, अरविंद निषाद, रामजीत निषाद, बृजलाल निषाद, जसवंत निषाद, ठाकुर प्रसाद निषाद, इंद्रजीत निषाद, ओम प्रकाश निषाद, अनारपति, मोलती देवी, चीनी निषाद, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मेवाती निषाद, कलावती निषाद, सुधा, सुमित्रा, सरिता, सुभावती, गुजराती, विमलावती सहित तमाम लोग शामिल रहे।