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सिर्फ चुनाव में आते हैं नेता, फिर भूल जाते हैं रास्ता

Sat, 22 Jan 2022 11:34 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jan 2022 11:34 PM IST
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politician come only in election
सिर्फ चुनाव में आते हैं नेता, फिर भूल जाते हैं रास्ता
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- घाघरा नदी और एमबीडी बांध के बीच बसे गांवों की समस्याएं बरकरार
- झलका ग्रामीणों का दर्द, फिर भी लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदान बताया जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। विधानसभा चुनाव का बिगुल बजा तो घाघरा और एमबीडी बांध के बीच बसे गांवों में भी संभावित दावेदार पहुंचने लगे हैं। इन गांवों के लोगों की समस्याएं भी उन्हें याद आने लगी है। यहां के लोगों की पीड़ा है कि सिर्फ चुनाव में नेता यहां आते हैं और चुनाव समाप्त होने के बाद फिर रास्ता भूल जाते हैं। शायद यही वजह है कि उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई है, फिर भी ग्रामीणों ने लोकतंत्र की मजबूरी के लिए मतदान को जरूरी बताया।

घाघरा नदी और एमबीडी बांध के बीच बसे 38 गांवों में करीब 18,000 आबादी निवास करती है। बारिश के मौसम में जैसे ही घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ता है, वैसे ही इन गांवों के लोगों के घरों में पानी घुस जाता है। लोगों के आने-जाने वाले रास्ते भी बंद हो जाते हैं। जिससे लोग अपने घरों से पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं। लोग एमबीडी बांध पर पहुंचकर शरण लेते हैं। वर्ष 2020 में घाघरा नदी की कटान से 13 लोगों का मकान नदी की धारा में विलीन हो गया था। इस परिवार के लोग आज भी एमबीडी बांध पर शरण लिए हुए हैं। वर्ष 2021 में भी कटान कर घाघरा नदी ने 23 लोगों के मकान को अपनी धारा में विलीन कर लिया था। गायघाट दक्षिणी गांव के सभी लोग एमबीडी बांध तथा अपने-अपने नजदीकी लोगों के वहां शरण लिए हुए हैं। ग्राम प्रधान बालेंद्र उर्फ पप्पू, राम सुरेश मौर्य, राम शंकर, लालचंद, कन्हैया लाल, सीताराम आदि का कहना है कि एमबीडी बांध के उत्तर दिशा में ग्राम समाज की तमाम जमीनें पड़ी हुई हैं। नदी और बांध के बीच बसे गांवों के लोगों को वहां बसाए जाने की मांग, यहां के लोग लंबे समय से करते चले आ रहे हैं, लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का, उसी दौर में इस इलाके में नेता दर्शन देते हैं और चुनाव जीतने के बाद पांच वर्ष तक दर्शन नहीं देते हैं। लोगों का कहना है कि हर पांचवें साल सरकारें बनती, बिगड़ती हैं, लेकिन यहां के लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं इस इलाके के कई गांव में अभी तक न तो बिजली पहुंची है और न ही आने-जाने के लिए सपर्क मार्ग और पीने के लिए शुद्ध पानी का इंतजाम हो सका है। लोगों का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदान किया जाना आवश्यक है। इस इलाके के लोग अपना कार्य कर रहे हैं, शेष भगवान के भरोसे छोड़ दिया गया है। विधानसभा चुनाव में संभावित दावेदार यहां पहुंच रहे हैं और लोगों की समस्याएं सुन भी रहे हैं। ग्रामीणों को फिर से विकास की उम्मीद जगी है।
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