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कीटनाशक पीने से तीन की हालत बिगड़ी
अमर उजाला ब्यूरो/ संतकबीरनगर
Updated Sat, 13 Feb 2016 12:03 AM IST
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बैंरहा गांव निवासी शाकिर अली का ने बताया कि उसकी छह वर्षीय बेटी नसीबा, तीन वर्षीय नरगिस और भाई बदरे आलम की पांच वर्षीय बेटी सोहाना घर के दरवाजे पर खेल रही थी।
खेलते -खेलते बच्चियां बरामदे में रखे गए तख्त के पास पहुंच गई। खेत मे बोई सब्जी में छिड़काव करने के लिए लाई गई दवा को तख्ते पर रखकर वह बाहर जाकर दूसरा काम करने लगे।
काम में अधिक समय लगा गया और इधर बच्चियां दवा को अज्ञानता के कारण पी गई। आगे बताया कि थोड़ी देर बाद जब वापस लौटा तो बच्चियों की हालत खराब थी और उन्हें उल्टी हो रही थी।
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दवा पर नजर पड़ी तो उसे खुला देखकर आवाक रह गए। परिजन बच्चियों को लेकर सीएचसी मलौली ले गए। जहां चिकित्सकों ने उनका इलाज शुरू किया।
डॉक्टर बी के शुक्ला ने बताया कि कीटनशाक दवा पीने से बच्चियों की हालत बिगड़ी थी। अब उनकी हालत में धीरे- धीरे सुधार हो रहा है। आगे बताया कि बच्चियों को अब कोई खतरा नहीं है।
परिजनों के चेहरे पर बच्चियों के स्वास्थ्य में सुधार आने पर ही मुस्कान लौटी। लोग यहीं कह रहे थे कि कभी भी कीटनाशक दवा अथवा हानिकारक पदार्थ को सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए, इससे छोटे बच्चों के हाथ न लग पाए, नहीं तो इसी तरह की घटनाएं हो सकती है।
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खेलते -खेलते बच्चियां बरामदे में रखे गए तख्त के पास पहुंच गई। खेत मे बोई सब्जी में छिड़काव करने के लिए लाई गई दवा को तख्ते पर रखकर वह बाहर जाकर दूसरा काम करने लगे।
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काम में अधिक समय लगा गया और इधर बच्चियां दवा को अज्ञानता के कारण पी गई। आगे बताया कि थोड़ी देर बाद जब वापस लौटा तो बच्चियों की हालत खराब थी और उन्हें उल्टी हो रही थी।
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दवा पर नजर पड़ी तो उसे खुला देखकर आवाक रह गए। परिजन बच्चियों को लेकर सीएचसी मलौली ले गए। जहां चिकित्सकों ने उनका इलाज शुरू किया।
डॉक्टर बी के शुक्ला ने बताया कि कीटनशाक दवा पीने से बच्चियों की हालत बिगड़ी थी। अब उनकी हालत में धीरे- धीरे सुधार हो रहा है। आगे बताया कि बच्चियों को अब कोई खतरा नहीं है।
परिजनों के चेहरे पर बच्चियों के स्वास्थ्य में सुधार आने पर ही मुस्कान लौटी। लोग यहीं कह रहे थे कि कभी भी कीटनाशक दवा अथवा हानिकारक पदार्थ को सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए, इससे छोटे बच्चों के हाथ न लग पाए, नहीं तो इसी तरह की घटनाएं हो सकती है।