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राख के ढेर पर कंबल के सहारे गुजरी रात

Fri, 24 Feb 2017 11:03 PM IST
इंद्रेश यादव, अमर उजाला, संतकबीरनगर।
इंद्रेश यादव, अमर उजाला, संतकबीरनगर। Updated Fri, 24 Feb 2017 11:03 PM IST
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People spent night in open area
राख हुए झोपड़ी में सामान तलाशती महिला। - फोटो : Amar Ujala
आग की घटना से गुरुवार को माझा चहोडा गांव के 73 परिवार तबाह हो गए। उनके पास न तो खाने के लिए अनाज बचा और न ही तन ढकने के लिए कपड़े। खुले आकाश के तले उनकी रात कैसे कटी के सवाल पर पीड़ितों की आंखे भर आईं। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए एक-एक कंबल के सहारे ही पीड़ित परिवार के 10 से 12 सदस्यों की रात गुजरी।
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पीड़ित आरती पत्नी शिवकुमार की आंखें आंसुओं से डबडबाई थीं। पूछने पर बताया कि रात करीब नौ बजे तहसील के कर्मी आए और लोगों को एक-एक कंबल देकर चले गए। आठ छोटे-छोटे बच्चों के साथ परिवार के दस लोग रातभर आंसू बहाते रहे। रात में गांव के सभी लोगों का खाना बाबूलाल चौधरी के घर बना था। जिसे थोड़ा बहुत खाया गया। सतीराम बताते हैं कि घर जलने के बाद न तो कुछ खाने के लिए बचा है और न ही रहने का ठिकाना है। कुछ इसी तरह का दर्द पीडित पूनम, उर्मिला, मनिराम ने भी बयां किया। अग्नि पीड़ितों का कहना था कि नेता-अधिकारी सभी आ जा रहे हैं, लेकिन अभी तक छाया के लिए पन्नी की भी व्यवस्था नहीं हो सकी। लग रहा है कि शुक्रवार की भी रात खुले में गुजारनी पडे़गी।
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हालांकि नायब तहसीलदार दीपक गुप्ता का कहना है कि मौके पर पहुंचकर 73 परिवारों को कंबल वितरित किया गया। खाने की व्यवस्था कराई गई है। पीडितों की सूची बना ली गई है। सभी को 79-79 सौ रुपये की अनुग्रह सहायता राशि दी जाएगी। मगर यह सहायता राशि भी पीड़ितों को तत्काल मिलने वाली नहीं है, क्योकि चुनाव के कारण इधर पांच दिनों तक बैंक बंद हैं।
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आठ साल में दो बार हो चुके आग से तबाह      
माझा चहोडा गांव के लोगों पर आठ साल के भीतर दूसरी बार आग ने कहर बरपाया है। वर्ष 2009 के मई में भी इस गांव को आग ने शिकार बनाया था। ग्रामीण मोलई, बाबूलाल चौधरी, दिनेश, रवींद्र आदि का कहना है कि लोगों का आशियाना फूस का मकान ही है। वर्ष 2009 में 85 लोगों के घर राख हुए थे। गांववालों का कहना है कि अगल फायर ब्रिगेड नजदीक में होता तो नुकसान कम किया जा सकता है। जब तक 20 किलोमीटर दूर धनघटा से दमकलकर्मी यहां पहुंचते हैं, तब तक सब कुछ जल चुका था।
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