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Sant Kabir Nagar News: मटर की खेती ने बदली किसान भोला की तकदीर
Thu, 02 Mar 2023 12:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Thu, 02 Mar 2023 12:44 AM IST
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फरेंदा सर्वजीत में मटर की तुड़ाई करते किसान भोला चौधरी।संवाद
हरियाणा, दिल्ली, मध्यप्रदेश तक पहुंच रहा फरेंदा का मटर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरेंदा। फरेंदा का मटर पूर्वाचल ही नहीं दिल्ली, हरियाणा तक पहुंच रहा है। लंबी फली व मीठे दानों के लिए पसंद की जाने वाली मटर की खेती ने क्षेत्र के कई किसानों की तकदीर बदल दी है। परंपरागत और घाटे की खेती से आगे बढ़ते हुए किसान मटर के उत्पादन से बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। फरेंदा सर्वजीत गांव के किसान भोला चौधरी हरी मटर की खेती से अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार रहे हैं। उन्होंने खेती को ही जीविकोपार्जन का सहारा बनाया लिया है। एक एकड़ की खेत में एडवांटा गोल्डन जीएस 10 मटर के बीज की वैज्ञानिक विधि से खेती करने के बाद इस वर्ष डेढ़ लाख रुपये की मटर की बिक्री कर चुके हैं। किसान भोला चौधरी ने बताया कि हरा मटर क्षेत्र के साथ अन्य प्रदेश जैसे दिल्ली, हरियाणा के अलावा मध्य प्रदेश तक भेजी जा रही है। खेत से ही व्यापारी फसल की खरीदारी कर लेते हैं।
इस वर्ष दाम महंगा होने के कारण मुनाफा अच्छा हुआ है। इन दिनों बाजार में 50 रुपये प्रतिकिलो के रेट से मटर की बिक्री हो रही है। पिछले वर्ष करीब दो लाख रुपये का मुनाफा मटर की खेती से हुआ था। सीजन के अनुसार खेती करने का शौक है। बटहरी विधि से मटर की खेती करने पर फलियों में दाने का औसत काफी अच्छा रहता है। जल निकासी की अच्छी व्यवस्था खेत में रखने से फसल ठीक रहती है। मटर का फसल बरसात के दिनों से लेकर सर्दियों के दिनों तक चलता है। हरा फल के साथ सूखा मटर भी अच्छे दामों पर बिक जाता है।
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एक एकड़ खेत में दस किलो बीज की जरूरत
किसान भोला चौधरी ने बताया कि करीब एक एकड़ खेत में 10 किलो बीज की आवश्यकता होती है। बुआई से पहले बीज को थीरम व मैकोजेब विधि से उपचारित करना आवश्यक है। बीज को करीब सात सेंटीमीटर की गहराई में दबाकर बुआई करनी चाहिए। बीच की दूरी 25 सेंटीमीटर आवश्यक होनी चाहिए। क्षेत्र के अमहवां, ददनहवां, मरचहवां व मझार क्षेत्र के अधिकतर किसान मटर की खेती से तरक्की कर रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरेंदा। फरेंदा का मटर पूर्वाचल ही नहीं दिल्ली, हरियाणा तक पहुंच रहा है। लंबी फली व मीठे दानों के लिए पसंद की जाने वाली मटर की खेती ने क्षेत्र के कई किसानों की तकदीर बदल दी है। परंपरागत और घाटे की खेती से आगे बढ़ते हुए किसान मटर के उत्पादन से बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। फरेंदा सर्वजीत गांव के किसान भोला चौधरी हरी मटर की खेती से अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार रहे हैं। उन्होंने खेती को ही जीविकोपार्जन का सहारा बनाया लिया है। एक एकड़ की खेत में एडवांटा गोल्डन जीएस 10 मटर के बीज की वैज्ञानिक विधि से खेती करने के बाद इस वर्ष डेढ़ लाख रुपये की मटर की बिक्री कर चुके हैं। किसान भोला चौधरी ने बताया कि हरा मटर क्षेत्र के साथ अन्य प्रदेश जैसे दिल्ली, हरियाणा के अलावा मध्य प्रदेश तक भेजी जा रही है। खेत से ही व्यापारी फसल की खरीदारी कर लेते हैं।
इस वर्ष दाम महंगा होने के कारण मुनाफा अच्छा हुआ है। इन दिनों बाजार में 50 रुपये प्रतिकिलो के रेट से मटर की बिक्री हो रही है। पिछले वर्ष करीब दो लाख रुपये का मुनाफा मटर की खेती से हुआ था। सीजन के अनुसार खेती करने का शौक है। बटहरी विधि से मटर की खेती करने पर फलियों में दाने का औसत काफी अच्छा रहता है। जल निकासी की अच्छी व्यवस्था खेत में रखने से फसल ठीक रहती है। मटर का फसल बरसात के दिनों से लेकर सर्दियों के दिनों तक चलता है। हरा फल के साथ सूखा मटर भी अच्छे दामों पर बिक जाता है।
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एक एकड़ खेत में दस किलो बीज की जरूरत
किसान भोला चौधरी ने बताया कि करीब एक एकड़ खेत में 10 किलो बीज की आवश्यकता होती है। बुआई से पहले बीज को थीरम व मैकोजेब विधि से उपचारित करना आवश्यक है। बीज को करीब सात सेंटीमीटर की गहराई में दबाकर बुआई करनी चाहिए। बीच की दूरी 25 सेंटीमीटर आवश्यक होनी चाहिए। क्षेत्र के अमहवां, ददनहवां, मरचहवां व मझार क्षेत्र के अधिकतर किसान मटर की खेती से तरक्की कर रहे हैं।
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