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62 राजस्व गांवों की डेढ़ लाख की आबादी को मिलेगा टोटी का पानी
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62 राजस्व गांवों की डेढ़ लाख की आबादी को मिलेगा टोटी का पानी
जेई, एईएस प्रभावित चिह्नित 402 गांवों में से 232 गांवों में नहीं मिल रही निशुल्क जमीन
जेई, एईएस प्रभावित 32 गांवों में पहले से ही कार्य करवा रहा जल निगम
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले की 29 ग्राम पंचायतों के 62 राजस्व गांवों की डेढ़ लाख की आबादी को पीने के लिए टोटी का पानी मिलेगा। इसके लिए शासन ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। उम्मीद है कि जल्द ही कार्यदायी संस्था कार्य भी शुरू करवाएगी।
जेई, एईएस की रोकथाम के लिए शासन बेहद गंभीर है। इसके लिए प्राथमिकता के तौर पर जेई, एईएस प्रभावित चिह्नित गांवों में पाइपलाइन बिछा कर ग्रामीणों को टोटी के जरिए शुद्ध पानी उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वैसे जिले में 402 गांव जेई, एईएस प्रभावित चिह्नित हैं। इसमें से 32 गांवों में जल निगम की ओर से पहले ही पानी की टंकी का निर्माण कार्य करवाया गया है। जबकि जेई, एईएस प्रभावित 232 गांवों में निशुल्क जमीन ही उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वैसे 29 जेई, एईएस प्रभावित ग्राम पंचायतों के 62 राजस्व गांवों में पाइपलाइन बिछाए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। इसमें जिवधरा, मुंडेरी, बेलवा सेंगर, पुनया, पटनाखास, डबरा, जसवल, बनौली, कोईलभार, बढ़या, सुकरौली, जोरवा, भटपुरवा दरघाट, भटौली, भरपुरवा, उतरावल, महौरी आदि शामिल हैं। जल निगम के प्रभारी एक्सईएन अजय कुमार उपाध्याय ने बताया कि 29 ग्राम पंचायतों में पाइपलाइन बिछाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में करीब तीन करोड़ का प्रोजेक्ट है। शासन की ओर से कार्यदायी संस्था मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्टक्चर लिमिटेड हैदराबाद नामित हुई है। इस संस्था ने तेलंगाना राज्य में पेयजल में सबसे अच्छा काम किया है। पहले तो जेई, एईएस प्रभावित गांवों में प्राथमिकता के साथ जमीन की निशुल्क उपलब्धता होने पर पाइपलाइन बिछाए जाने का प्रस्ताव तैयार कराना है। इसके अलावा विकल्प के रूप में जहां अनुसूचित जाति जनजाति की आबादी अधिक हो अथवा सांसद आदर्श गांव और आकांक्षात्मक चयनित ब्लॉकों के गांवों को शामिल किया जा सकता है। सीडीओ अतुल मिश्र ने बताया कि 29 ग्राम पंचायतों में पानी की टंकी का निर्माण होगा। पाइप लाइन बिछाया जाएगी। पंप लगाया जाएगा। इन ग्राम पंचायतों के 62 राजस्व गांवों की करीब डेढ़ लाख की आबादी को लाभ मिलेगा। यह सच है कि अधिकांश जेई, एईएस प्रभावित गांवों में निशुल्क सार्वजनिक जमीन उपलब्ध नहीं हो रहा है। इसमें प्रशासन की मदद ली जा रही है।
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जेई, एईएस प्रभावित चिह्नित 402 गांवों में से 232 गांवों में नहीं मिल रही निशुल्क जमीन
जेई, एईएस प्रभावित 32 गांवों में पहले से ही कार्य करवा रहा जल निगम
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले की 29 ग्राम पंचायतों के 62 राजस्व गांवों की डेढ़ लाख की आबादी को पीने के लिए टोटी का पानी मिलेगा। इसके लिए शासन ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। उम्मीद है कि जल्द ही कार्यदायी संस्था कार्य भी शुरू करवाएगी।
जेई, एईएस की रोकथाम के लिए शासन बेहद गंभीर है। इसके लिए प्राथमिकता के तौर पर जेई, एईएस प्रभावित चिह्नित गांवों में पाइपलाइन बिछा कर ग्रामीणों को टोटी के जरिए शुद्ध पानी उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वैसे जिले में 402 गांव जेई, एईएस प्रभावित चिह्नित हैं। इसमें से 32 गांवों में जल निगम की ओर से पहले ही पानी की टंकी का निर्माण कार्य करवाया गया है। जबकि जेई, एईएस प्रभावित 232 गांवों में निशुल्क जमीन ही उपलब्ध नहीं हो पा रही है। वैसे 29 जेई, एईएस प्रभावित ग्राम पंचायतों के 62 राजस्व गांवों में पाइपलाइन बिछाए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। इसमें जिवधरा, मुंडेरी, बेलवा सेंगर, पुनया, पटनाखास, डबरा, जसवल, बनौली, कोईलभार, बढ़या, सुकरौली, जोरवा, भटपुरवा दरघाट, भटौली, भरपुरवा, उतरावल, महौरी आदि शामिल हैं। जल निगम के प्रभारी एक्सईएन अजय कुमार उपाध्याय ने बताया कि 29 ग्राम पंचायतों में पाइपलाइन बिछाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में करीब तीन करोड़ का प्रोजेक्ट है। शासन की ओर से कार्यदायी संस्था मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्टक्चर लिमिटेड हैदराबाद नामित हुई है। इस संस्था ने तेलंगाना राज्य में पेयजल में सबसे अच्छा काम किया है। पहले तो जेई, एईएस प्रभावित गांवों में प्राथमिकता के साथ जमीन की निशुल्क उपलब्धता होने पर पाइपलाइन बिछाए जाने का प्रस्ताव तैयार कराना है। इसके अलावा विकल्प के रूप में जहां अनुसूचित जाति जनजाति की आबादी अधिक हो अथवा सांसद आदर्श गांव और आकांक्षात्मक चयनित ब्लॉकों के गांवों को शामिल किया जा सकता है। सीडीओ अतुल मिश्र ने बताया कि 29 ग्राम पंचायतों में पानी की टंकी का निर्माण होगा। पाइप लाइन बिछाया जाएगी। पंप लगाया जाएगा। इन ग्राम पंचायतों के 62 राजस्व गांवों की करीब डेढ़ लाख की आबादी को लाभ मिलेगा। यह सच है कि अधिकांश जेई, एईएस प्रभावित गांवों में निशुल्क सार्वजनिक जमीन उपलब्ध नहीं हो रहा है। इसमें प्रशासन की मदद ली जा रही है।
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