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Sant Kabir Nagar News: अवकाश और त्योहारों पर नियमित ड्यूटी का विरोध, रिक्त पद भरने की मांग
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संतकबीरनगर। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने अवकाश, साप्ताहिक छुट्टी और त्योहारों के दिनों में बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों को नियमित रूप से ड्यूटी पर बुलाए जाने की व्यवस्था का विरोध किया है। समिति ने इसे कर्मचारियों पर अनावश्यक मानसिक और शारीरिक दबाव डालने वाला बताते हुए तत्काल समाप्त करने की मांग की है।
समिति की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि विद्युत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल कार्य पर वापस लिया जाए। साथ ही मार्च 2023 के आंदोलन के बाद कर्मचारियों और इंजीनियरों पर की गई उत्पीड़नात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई भी वापस ली जाए, ताकि ऊर्जा निगमों में सकारात्मक कार्य वातावरण स्थापित हो सके।
संघर्ष समिति के केंद्रीय संयोजक शैलेंद्र दुबे के हवाले से कहा गया कि आपातकालीन परिस्थितियों में कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुलाना आवश्यक हो सकता है, लेकिन इसे नियमित व्यवस्था का रूप देना उचित नहीं है। आरोप लगाया कि सार्वजनिक अवकाश और त्योहार घोषित होने के बावजूद कई बार कार्यालय खुले रखने और कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति के आदेश जारी किए जाते हैं।
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समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस, उपभोक्ता सेवा, राजस्व वसूली, मीटरिंग और कामर्शियल गतिविधियों के बढ़ते दायित्वों के कारण अवकाश के दिनों में कर्मचारियों को बुलाना अब फायर फाइटिंग व्यवस्था बन गई है। इसका स्थायी समाधान सभी रिक्त पदों को भरना और बढ़ती उपभोक्ता संख्या के अनुरूप नए पद सृजित करना है।
संघर्ष समिति ने मांग की कि यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति में कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश, सार्वजनिक अवकाश या त्योहार के दिन ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो उन्हें नियमानुसार प्रतिकर अवकाश (कंपनसेटरी ऑफ) अथवा दोगुना वेतन दिया जाए।
शुक्रवार को जिले में हुए विरोध प्रदर्शन में नारायण चंद्र चौरसिया, दिलीप मौर्य, रमेश प्रजापति, आर्यन कुमार, वीरेंद्र मौर्य, अशोक कुमार, आशुतोष कुमार, सूरज प्रजापति, चंद्रकेश मौर्य, भास्कर पांडेय, संजय यादव, दिलीप सिंह, अमरनाथ यादव, संतोष गुप्ता सहित अन्य विद्युत कर्मचारी मौजूद रहे।
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समिति की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि विद्युत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर हटाए गए संविदा कर्मियों को तत्काल कार्य पर वापस लिया जाए। साथ ही मार्च 2023 के आंदोलन के बाद कर्मचारियों और इंजीनियरों पर की गई उत्पीड़नात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई भी वापस ली जाए, ताकि ऊर्जा निगमों में सकारात्मक कार्य वातावरण स्थापित हो सके।
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संघर्ष समिति के केंद्रीय संयोजक शैलेंद्र दुबे के हवाले से कहा गया कि आपातकालीन परिस्थितियों में कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुलाना आवश्यक हो सकता है, लेकिन इसे नियमित व्यवस्था का रूप देना उचित नहीं है। आरोप लगाया कि सार्वजनिक अवकाश और त्योहार घोषित होने के बावजूद कई बार कार्यालय खुले रखने और कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति के आदेश जारी किए जाते हैं।
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समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस, उपभोक्ता सेवा, राजस्व वसूली, मीटरिंग और कामर्शियल गतिविधियों के बढ़ते दायित्वों के कारण अवकाश के दिनों में कर्मचारियों को बुलाना अब फायर फाइटिंग व्यवस्था बन गई है। इसका स्थायी समाधान सभी रिक्त पदों को भरना और बढ़ती उपभोक्ता संख्या के अनुरूप नए पद सृजित करना है।
संघर्ष समिति ने मांग की कि यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति में कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश, सार्वजनिक अवकाश या त्योहार के दिन ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो उन्हें नियमानुसार प्रतिकर अवकाश (कंपनसेटरी ऑफ) अथवा दोगुना वेतन दिया जाए।
शुक्रवार को जिले में हुए विरोध प्रदर्शन में नारायण चंद्र चौरसिया, दिलीप मौर्य, रमेश प्रजापति, आर्यन कुमार, वीरेंद्र मौर्य, अशोक कुमार, आशुतोष कुमार, सूरज प्रजापति, चंद्रकेश मौर्य, भास्कर पांडेय, संजय यादव, दिलीप सिंह, अमरनाथ यादव, संतोष गुप्ता सहित अन्य विद्युत कर्मचारी मौजूद रहे।